दूध-सब्जी की ब्रिकी रोकी, सड़कों पर कराया खाली

दूध-सब्जी की ब्रिकी रोकी, सड़कों पर कराया खाली
sehore

veerendra singh | Publish: Jun, 01 2017 11:35:00 PM (IST) Sehore, Madhya Pradesh, India

विरोध के चलते बंद रही मंडी, व्यापारी करते रहे उपज का इंतजार, आमजन की हुई फजीहत, करते रहे दूध और सब्जी का इंतजार, अपनी मांगों को लेकर दस दिवसीय हड़ताल कर रहा यूनियन


सीहोर.
जिलेभर में किसान यूनियन संघ की हड़ताल के चलते उपज नहीं आने के कारण कृषि और सब्जी मंडी में सन्नाटा पसर गया। व्यापारी उपज आने का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। इधर आष्टा सहित कई जगह बंद के बावजूद दूध सप्लाई और सब्जी बेचने आने वालों को रास्ते में रोक लिया। दूध को सड़क और नाली में बहाने तथा सब्जी को सड़क पर फेंकने के समाचार मिले हैं। इसका असर आमजन पर भी पड़ा है।

लंबेंं समय तक संघर्ष करने के बाद भी मांगों को पूरा होता नहीं देख राष्ट्रीय किसान यूनियन संघ सड़क पर उतर आया है। गुरुवार से दस दिन के लिए हड़तान करना शुरु कर दी है। इसका सीधा असर मंडियों में देखने को मिला। ट्रैक्टर-ट्राली और वाहन से भरी नजर आने वाली मंडी में पहले दिन बंद जैसा माहौल रहा। जिले के आष्टा शहर में कुछ एक किसान दूध सप्लाई और सब्जी बेचने पहुंचे थे। उनको किसानों ने भोपाल नाका मुगली रोड पर पकड़ लिया। दूध को सड़क पर खाली करा दिया। वहीं सब्जी को सड़क पर फिकवाने के समाचार मिले हैं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दूध सड़क पर खाली कराने से लोग इंतजार करते रहे, जब कोई नहीं पहुंचा तो मायूस हो गए।

यूूनियन ने बताया कि शासन की गलत विरोधी नितियों से किसान दर दर की ठोकरे खाने पर मजबूर हो गया है। बदहाली के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठा रहा है। कारण यह है कि उद्योगों में निर्मित वस्तुओं की कीमतों के अनुपात में कृषि उत्पादों का भाव नहीं बढऩा है। इसके चलते हड़ताल का कदम उठाया है। इसके समर्थन मेें कृषि उत्पाद दूध, सब्जी, फल फूल आदि का विक्रय नहीं करने को शामिल किया। मंडी में उपज नहीं बेचना और बाजार से सामान नहीं खरीदना भी है। हड़ताल के समर्थन में प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण पटेल, उपाध्यक्ष त्रिलोक गोठी, महामंत्री हेमराज पटेल, प्रदेश कार्य समिति सदस्य बाबूलाल पाटीदार, संरक्षक हरिसिंह धाकड़, जिलाध्यक्ष महेश भाटी, मंत्री डॉ. सुरेश दुबे, कोषाध्यक्ष धरम सिंह भैसानिया, उपाध्यक्ष नन्नूलाल गौर हैं।

रबी सीजन समाप्त होने के बाद भी सीहोर कृषि उपज मंडी में छह से सात हजार के करीब रोजाना आवक हो रही है। हड़ताल के चलते किसानों के नहीं पहुंचने से मंडी में सन्नाटा पसरा रहा। उम्मीद जताई जा रही थी कि किसान उपज लेकर आएंगे, लेकिन पहले दिन असर रहा कि कोई नहीं पहुंचा। इससे व्यापारी खाली हाथ बैठे रहे। इसी प्रकार की स्थिति आष्टा, जावर सहित जिलेभर की मंडियों में रही। एक दिन में लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।

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