दो डिग्री पारा और गिरा तो होगा फसलों को नुकसान


पाले से फसल बचाने के लिए किसान करें उपचार, 4 डिग्री से नीचे गया पारा तो पड़ सकता है पाला

सीहोर. मौसम बदलते ही रबी की फसल पर संकट के बादल मडऱाने लगे हैं। रात का पारा लगातार गिर रहा है। यदि चार डिग्री से नीचे जाता है तो पाले की संभावना बनेगी। पाला पडऩे से रबी सीजन की फसलों में 20 से 70 फीसदी तक का नुकसान हो सकता है। सोमवार को शहर के तापमान में दो डिग्री से ज्यादा की गिरावट रेकॉर्ड की गई है। न्यूनतम पारा दो डिग्री की गिरावट के बाद 4.2 डिग्री और अधिकतम तापमान 22.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है।

आरएके कृषि महाविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएस तोमर ने बताया कि उत्तर भारत में बर्फबारी होने के कारण मध्यप्रदेश में ठंड का असर दिखाई दे रहा है। उत्तर की तरफ से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण ठंड का असर तेज हो रहा है। शीत लहर और पाले की संभावना बनी हुई है। तोमर ने बताया कि इस समय रबी सीजन की फसल को सुरक्षा की दरकार है। पाले से फसल को बचाने के लिए किसान उचित उपचार करें। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में ठंड का असर तेज होगा और तापमान में गिरावट रेकॉर्ड की जाएगी।

पाले से फसल पर असर
- पाले के प्रभाव से फल मर जाते है और फूल झडऩे लगते है। प्रभावित फसल का हरा रंग समाप्त हो जाता है।
- पत्तियों का रंग मिट्टी के रंग जैसा दिखता है। ऐसे में पौधों के पत्ते सडऩे से बैक्टीरिया जनित बीमारियों का प्रकोप अधिक बढ़ जाता है।
- पत्ती, फूल एवं फल सूख जाते है। फल के ऊपर धब्बे पड़ जाते हैं और स्वाद भी खराब हो जाता है।
- पाले से फल और सब्जियों में कीटों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। सब्जियों पर पाले का प्रभाव अधिक होता है। कभी-कभी शत प्रतिशत सब्जी की फसल नष्ट हो जाती है।
शीत ऋतु वाले पौधे 2 डिग्री सेंटीग्रेड तक का तापमान सहने में सक्षम होते है। इससे कम तापमान होने पर पौधे की बाहर व अन्दर की कोशिकाओं में बर्फ जम जाती है।

पाले से फसल को बचाने के उपाय
- जिस रात पाला पडऩे की संभावना हो, उस रात 12 से 2 बजे के आस-पास खेत को ठंडी हवाओं से बचाने के लिए कूड़ा-कचरा, घास-फूस जलाकर धुआं करना चाहिए।
- रात को वायुरोधी टाटिया को हवा आने वाली दिशा की तरफ से बांधकर क्यारियों के किनारों पर लगाएं।
- पाला पडऩे की संभावना हो तब खेत में सिंचाई करनी चाहिए। नमी युक्त जमीन में काफी देर तक गर्मी रहती है और भूमि का तापमान कम नहीं होता है।
- सर्दी में फसल में सिंचाई करने से 0.5 डिग्री से 2 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ जाता है। जिन दिनों पाला पडऩे की संभावना हो उन दिनों फसलों पर गंधक के तेजाब के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करना चाहिए। 1 लीटर गंधक के तेजाब को 1000 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टर क्षेत्र में प्लास्टिक के स्प्रेयर से छिड़काव करना चाहिए।
- इसका असर 2 सप्ताह तक रहता है। यदि इस अवधि के बाद भी शीत लहर पाले की संभावना बनी रहे तो गंधक के तेजाब के छिड़काव को 15-15 दिन के अंतराल पर दोहराते रहे।
- सरसों, गेहूं, चावल, आलू, मटर जैसी फसलों को पाले से बचाने में गंधक के तेजाब का छिड़काव करने से न केवल पाले से बचाव होता है, बल्कि पौधों में लौह तत्व एवं रासायनिक सक्रियता बढ़ जाती है।
- दीर्घकालीन उपाय के रूप में फसलों को बचाने के लिए खेत की उत्तरी-पश्चिमी मेड़ों पर और बीच-बीच में उचित स्थान पर वायु अवरोधक पेड़ जैसे शहतूत, शीशम, बबूल, खेजड़ी, एवं जामुन आदि के पेड़ लगाए।

कौन सी फसल पर कितना प्रभाव
शीतलहर एवं पाले से सर्दी के मौसम में सभी फसलों को थोड़ा नुकसान होता है। टमाटर, मिर्च, बैंगन आदि सब्जियों व सरसों, जीरा, धनिया, सौंफ, की फसल पर बसे ज्यादा 8 0 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। अरहर में 70 प्रतिशत, गन्ने में 50 प्रतिशत एवं गेहूं, जौ में 10 से 20 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है।

एक्सपर्ट ब्यू
आरएके कृषि महाविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएस तोमर ने बताया कि पाला दो तरह का होता है। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार पहला एडवेक्टिव और दूसरा रेडिएटिव। एडवेक्टिव पाला तब पड़ता है जब ठंडी हवाएं चलती है। ऐसी हवा की परत एक-डेढ़ किलोमीटर तक हो सकती है। इस अवस्था में आसमान खुला हो या बादल हों, दोनों परिस्थितियों में एडवेक्टिव पाला पड़ सका है लेकिन जब आकाश बिलकुल साफ हो और हवा शांत हो, तब रेडिएटिव प्रकार का पाला गिरता है। किसान पाले से फसल को बचाने के लिए सिंचाई करें।

रबी फसल का रकबा
फसल लक्ष्य बोवनी
गेहूं 2, 40000 2, 15000
चना 98000 99000
मसूर 5000 4700
मटर 2000 2000
अलसी 1400 1300
अन्य 2600 18000
कुल 3,49000 3,4000
(नोट- रकबा हेक्टेयर में है।)

 

वीरेंद्र शिल्पी Desk
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