जल स्रोतों ने तोड़ा दम, बूंद-बूंद के लिए ग्रामीणों को करना पड़ रही मशक्कत

कुओं पर पानी भरने सुबह से ही लग जाती है महिलाओं की भीड़

By: Radheshyam Rai

Published: 07 Jan 2019, 01:04 PM IST

सीहोर. गांव दौलतपुर और दोराहा में जलसंकट ने सर्दी में ही अपनी दस्तक दे दी है। ऐसे में ग्रामीणों को पेयजल की आपूर्ति करने के लिए खासी मशक्कत करना पड़ रही है। हैंडपंपों पर एक-एक घंटे इंतजार के बाद लोगों को पीने का पानी उपलब्ध हो पा रहा है। आलम यह है कि गांव में स्थित परंपरागत जल स्त्रोत दम तोड़ चुके ह। इसके चलते ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति के लिएं इधर -उधर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है। गांव में पानी की समस्या अभी से गहरा गई है तो आने वाले गर्मी के मौसम में यह कितनी विकराल होंगी इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। फिर भी इस समस्या के निराकरण को लेकर ग्राम पंचायत और प्रशासन द्वारा अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।

करीब दो हजार की आबादी वाले गांव दौलतपुर में ग्रामीणों को इस समय पेयजल की गंभीर समस्या से जूझना पड़ रहा है। दरअसल गांव में जलापूर्ति करने वाली कुंडियां और हैंडपंप दम तोड़ चुके है। हालत यह है कि उक्त कुंडियों में रात में थोड़ा बहुत पानी जमा होता है उसे भरने के लिए सुबह 4 बजे से ही महिलाओं की भीड़ जमा हो जाती है। यही हाल हैंडपंप के भी है। दो मोहल्ले और स्कूली बच्चों को पेयजल की सुविधा मुहैया कराने वाला स्कूल परिसर में स्थित हैंडपंप भी हांफ-हांफ कर 2-3 बाल्टी पानी ही दे रहा है। इसके चलते जहां मोहल्लेवासी को पानी की व्यवस्था के लिए इधर -उधर भटकना पड़ता है। वहीं छात्र -छात्राओं को भी अपनी प्यास बुझाने के लिए घर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिस ओर किसी का ध्यान न होनेसे ग्रामीण परेशान हैं।

दो हजार से अधिक की आबादी वाले गांव दौलतपुर में जलापूर्ति के लिए कोई समुचित व्यवस्था नही है। आजादी के बाद से ही ग्रामीण पानी की आपूर्ति के लिए दो छोटे-छोटे कुओं व दो हैंडपंप पर आश्रित हंै। यह कुएं और हैंडपंप भी गर्मी के शुरूआती दौर में ही सूख जाते है। इसके बाद ग्रामीणों को गर्मी के पूरे 4 माह दो-ढाई किमी दूर खेतों पर स्थित कुएं, ट्यूबवेल से पानी लाना पड़ता है। खासबात यह है कि इस समस्या से निजात दिलाने के लिए ग्रामीण सालों से प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक आश्वासन के अलावा पानी की उपलब्धता नहीं हो पाई है।

दम तोडऩे लगे प्राचीन जलस्रोत
ग्राम के प्राचीन जल स्रोत दम तोडऩे लगे हैं। इस संबंध में ग्रामीण अनूपसिंह, रमासिंह ने बताया कि गांव में आजादी के बाद से ही पेयजल व्यवस्था के लिए शासन, प्रशासन द्वारा कोई प्रबंध नहीं किए हैं। दशकों पुरानी कुंडियों से ही पानी की आपूर्ति करते हैं। जो इस समय सूख चुकी हैं। ऐसे में पानी के ग्रामीणों लिए इधर -उधर भटकना पड़ रहा है। गांव के लोग शासन, प्रशासन की उपेक्षा की सजा भुगत रहे हैं। यही कारण है कि आज भी ग्रामीण पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की बांट जोह रहे हैं।

यह सच है कि चौपड़ा और बावडी प्राचीन होने के साथ ही इनमें पर्याप्त पानी है, लेकिन यह निजी संपत्ति है। इस कारण ग्राम पंचायत द्वारा इसकी साफ-सफाई कराना संभव नहीं है। जो हैंडपंप खराब हैं उन्हें सुधरवाने के लिए पीएचई विभाग को अवगत कराएं।
सौरम बाई, सरपंच, ग्राम पंचायत दौलतपुर

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