MLA said : मंडी में किसानों का माल नहीं खरीदने वाले व्यापारियों पर करें कार्रवाई

मंडी अधिकारी और निरीक्षकों की मिलीभगत से लाखों रुपए के अनाज की कालाबाजारी जारी, खुले बाजार में अनाज खरीदी का मामला, दिन में 2 बार मंडी में खरीदी हुई तो रुकेगी अनाज की कलाबाजारी, पंचनामा नहीं बनाने से हो रही गड़बड़ी

By: vishal yadav

Published: 08 Dec 2019, 11:07 AM IST

बड़वानी. सेंधवा विकासखंड में अधिकारियों और मंडी निरीक्षकों की मिलीभगत से प्रतिदिन गरीब किसानों का लाखों रुपए का अनाज की कालाबाजारी की जा रही है। सेंधवा विकासखंड के लाइसेंस धारी व्यापारियों की मनमानी के कारण किसानों का शोषण हो रहा है, ये स्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंडी अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वह तत्काल ऐसे व्यापारियों पर कार्रवाई करें जो मंडी के राजस्व को हानि पहुंचा रहे है। वहीं अनाज की कालाबाजारी में लिप्त हैं। ये बातें सेंधवा के विधायक ग्यारसीलाल रावत ने पत्रिका से चर्चा के दौरान कही।
विधायक रावत ने कहा कि लंबे समय से सेंधवा में अनाज के तहत गेहूं सोयाबीन मक्का और कपास की कालाबाजारी जारी है। किसानों के साथ धोखा हो रहा है, लेकिन मंडी के अधिकारी-कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे है। खासकर मंडी निरीक्षकों की व्यापारियों से मिलीभगत के चलते करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि मंडी प्रशासन को हो चुकी है। यदि मंडी अधिकारियों और निरीक्षकों ने अपना रवैया नहीं बदला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दोपहर बाद कालाबाजारी का खेल होता है शुरू
सेंधवा में किसानों की उपज को खरीदने के लिए लाइसेंस धारी व्यापारी सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक मंडी प्रांगण में खरीदी करते है। इसके बाद कोई भी व्यापारी मंडी में फटकता भी नहीं है। ऐसे में दोपहर के बाद नगर में आने वाला अनाज और कपास खुले बाजार में लिखने को मजबूर होता है। किसानों की मजबूरी रहती है कि वह मंडी में माल नहीं तौल सकते है। इसलिए वह व्यापारियों की दुकानों पर सीधे माल लेकर पहुंचते हैं और व्यापारी मनमाने दाम पर किसानों का अनाज खरीद लेते है। ये प्रथा पिछले कई सालों से सेंधवा में चली आ रहे है। इसमें प्रतिदिन व्यापारी हजारों किलो अनाज और कपास खरीद रहे है। खरीदी के इस खेल में व्यापारियों ने करोडो रुपए का माल खरीदा है। वहीं मंडी प्रशासन को लाखों रुपए के राजस्व की हानि हो चुकी है।
क्लास की मंडी में अब तनख्वाह के लाले
विधायक ग्यारसीलाल रावत का कहना है कि वर्तमान में मंडी की हालत ये हो गई है कि कभी करोड़ों का राजस्व देने वाली ए क्लास मंडी में वर्तमान में कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लाले पड़ रहे है। कई कर्मचारियों का कहना है कि अधिकारी सहित निरीक्षकों की मिली भगत और दादागिरी के सामने इमानदार कर्मचारियों की एक नहीं चलती है। जानकारों का कहना है कि मंडी निरीक्षक खुले बाजार में अनाज और कपास की खरीदी बिक्री पर कोई कार्रवाई नहीं करते है। जबकि मंडी बोर्ड ने निरीक्षकों को चालान बनाने और व्यापारी के विरुद्ध कार्रवाई करने के अधिकार दे रखे है, लेकिन वह व्यापारियों से सांठगांठ करके मंडी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे है। निरीक्षकों और व्यापारियों की मिलीभगत की जांच कराई जाएगी। यदि गड़बड़ी पाई गई तो निरीक्षकों पर सख्त कार्रवाई करेंगे। गरीब किसानों के अनाज की कालाबाजारी का दौर जल्द खत्म करने का प्रयास करेंगे।
मंडी गोदामों पर कार्रवाई से नाराज है व्यापारी
मंडी गोडाउन पर अवैध कब्जा करने वाले व्यापारियों के गोदामों पर मंडी ने ताले लगा दिए थे। इसके बाद दलहन, तिलहन, व्यापारी संघ द्वारा बीते 5 अक्टूबर को अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की थी। व्यापारियों की अवैध हड़ताल और मंडी परिसर में खरीदी पिछले डेढ़ महीने से बंद होने के बावजूद भारसाधक अधिकारी और मंडी सचिव सहित कई अधिकारियों ने कोई कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई। हालांकि पत्रिका में खबर का प्रकाशन होने के बाद व्यापारियों को नोटिस जारी कर मंडी में खरीदी करने के निर्देश दिए थे।
नहीं हो रहा लाइसेंस के नियमों का पालन
ए क्लास कृषि उपज मंडी व्यापारी लाइसेंस के कई व्यापारियों ने बनवा रखे है, लेकिन सभी सक्रिय नहीं है। ऐसे में लाइसेंस नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है। खरीदी नहीं करने वाले लाइसेंस धारियों को कृषि मंडी समिति ने अभी तक कोई नोटिस नहीं दिया है। नियमानुसार ऐसे लाइसेंस धारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, जो खरीदी में सक्रिय नहीं है। सेंधवा कृषि उपज मंडी से प्राप्त जानकारी के अनुसार कृषि मंडी में खरीदी के दौरान सिर्फ 50 व्यापारी सक्रिय है। इसके विपरीत 170 व्यापारियों ने विभिन्न उपज खरीदने के लिए लाइसेंस बनवा रखे है। इसमें कई समितियां भी शामिल है, जो वर्ष भर मंडी में किसानों की खरीदी में सक्रिय रहती है। लाइसेंस बनवा कर मंडी में खरीदी नहीं करना मंडी समिति के नियमों का उल्लंघन है। प्रशासक एवं मंडी अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। मंडी प्रशासन को निष्क्रिय लाइसेंस धारी व्यापारियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।
वर्जन
मंडी में दिन में दो बार खरीदी पर करेंगे चर्चा
अभी तक सेंधवा कृषि उपज मंडी में परंपरागत रूप से एक समय खरीदी होती आई है। हालांकि इसकी जानकारी मंडी सचिव से लेकर यदि दो बार खरीदी कराए जाने की मांग आएगी तो कार्रवाई करेंगे।
-अंशु चावला, एसडीएम और कृषि उपज मंडी की प्रशासक

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