जामली मेंं जनवरी में शुरू हो सकता है दूध डेयरी प्लांट

युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद, जामली में बना रहा शासकीय दूध प्लांट

By: vishal yadav

Updated: 08 Dec 2019, 10:43 AM IST

बड़वानी. सेंधवा नगर सहित कई क्षेत्र में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए शासकीय दूध प्लांट का निर्माण करीब पूर्णता की ओर है। जनवरी माह में प्लांट शुरू होने की संभावना है। ग्रामीणों को रोजगार के साथ ही दूध उत्पादन के क्षेत्र में प्रगति की संभावना है। वर्ष 2016 में दूध प्लांट के निर्माण की शुरुआत हुई थी। अब निर्माण अंतिम चरणों में है।
किसानों को होगा फायदा, पशुधन बढ़ेगा
जानकारी के मुताबिक किसानों को दूध प्लांट शुरू होने के बाद पशुधन बढऩे की प्रेरणा मिलेगी। वर्तमान में ग्रामीण व शहरी दूध उत्पादकों के लिए दूध बेचने का कोई बेहतर जरिया नहीं था। वहीं स्थानीय डेयरियों और व्यापारियों को दूध सप्लाई करते है, लेकिन शासकीय दूध प्लांट शुरू होने से किसानों को रोजगार को नयी राह मिलेगी। दूध प्लांट में किसानों द्वारा पशुधन का दूध निकालकर दूध केंंद्र पर बेचा जाएगा। इसके लिए किसानों को परेशान होने की जरुरत नहीं होगी। प्लांट का वाहन किसानों के घर तक पहुंचकर दूध एकत्र करेगा। सेंधवा में किसानों द्वारा वर्तमान में बकरी पालन को महत्व दिया जा रहा है। क्योंकि उनके पास बकरियां बेचने के लिए सेंधवा का बाजार उपलब्ध है, लेकिन दूध उत्पादन में क्षेत्र बेहद पिछड़ा है। अब दूध प्लांट शुरू होने के बाद किसानों और आदिवासियों पशुधन पालने की प्रेरणा मिलेगी। किसान को आर्थिक लाभ हो सकेगा।
बीएमसी प्लांट पर मिल रहा हजारों लीटर दूध प्रतिदिन
दूध उत्पादन के क्षेत्र में फिलहाल वरला रोड पर बीएमसी मशीन लगाई है। इस केंद्र पर प्रतिदिन 4 से 5 हजार लीटर दूध किसानों द्वारा लाया जा रहा है। फिलहाल सेंधवा सहित नागलवाड़ी, निवाली क्षेत्र से दूध केंद्र पर पहुंच रहा है। जामली स्थित दूध प्लांट के शुरू होने के बाद दूध उत्पादकों को आर्थिक लाभ होगा। जामली स्थित प्लांट में प्रतिदिन 60 हजार लीटर से अधिक दूध को संग्रहित करने की क्षमता है। फिलहाल बिल्डिंग बनकर तैयार हो चुका है। मशीनरी भी पूरी तरह स्टॉल हो चुकी है।
किसानों को मिले बेहतर पशुधन
सेंधवा विधानसभा में अधिकतर किसान आर्थिक रूप से कमजोर है। पलायन क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या है। यदि पशुधन बेहतर मिले तो किसान डेयरी क्षेत्र के प्रति आकर्षित हो सकते है। सबसे ज्यादा जरुरत ऐसे किसानों को है। जिनके पास खेती के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है। सैकड़ों किसान ऐसे है, जो साल में बारिश में ही फसल ले पाते है। सिंचाई के लिए पर्याप्त साधनों की कमी के चलते सैकड़ों किसान बारिश में खेती करते है। इसके बाद विभिन्न राज्यों में मजदूरी के लिए पलायन कर जाते है। यदि किसानों को डेयरी लिए बेहतर पशुधन मिले तो वे दूध का बेहतर उत्पादन कर सकते है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। वहीं पलायन भी रुकेगा। पशुधन की संख्या बढऩे से किसानों को चारा सहित अन्य फसल जो पशुओं को खिलाई जाती है। उसकी बुवाई करने की प्रेरणा मिलेगी।
वर्जन...
किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए हम पूरा प्रयास कर रहे है। दूध प्लांट के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा। हम ग्रामीण जनता के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध कराने का प्रयत्न कर रहे है।
-ग्यारसीलाल रावत, विधायक, सेंधवा

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