आजादी की लड़ाई में था सेंधवा का अहम योगदान, 1935 से 1942 तक घटी कई घटनाएं

किसी ने किले की प्राचीर पर फहराया था तिरंगा तो किसी ने टेलीग्राम के तार काट खत्म किया था अंग्रेजों का नेटवर्क, महात्मा गांधी के आदेश पर आदिवासियों को जागरूक करने आए थे

By: vishal yadav

Updated: 14 Aug 2020, 11:21 AM IST

सेंधवा/बड़वानी. स्वतंत्रता दिवस दिन जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है लोगों में आजादी के समय के किस्से आम हो रहे है। नगर के वरिष्ठ लोग कई कहानी किस्सों को याद करते हुए कोई तिरंगा फहराने तो कोई अंग्रेजों की संचार व्यवस्था को खत्म करने जैसे महत्वपूर्ण घटनाओं को याद कर रहा है। सेंधवा एक ऐतिहासिक और प्राचीन नगरी रही है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1935 से लेकर 1942 तक कई महत्वपूर्ण घटनाएं सेंधवा में भी घटी है। जब युवाओं ने भारत मां को आजाद कराने के लिए हर संभव प्रयास किए थे। हालांकि सरकारी दस्तावेजों में दर्ज स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बेहद कम है, लेकिन ऐसे कई युवा आजादी के परवाने रहे हैं जो अब गुमनाम हो चुके हैं। सेंधवा का ऐतिहासिक किला आजादी के पहले कई घटनाओं का साक्षात गवाह है। यहां युवाओं सहित महिलाओं ने भी अपने तरीकों से अंग्रेज सरकार के विरुद्ध कई आंदोलन किए थे।
ग्राम सेवा कुटीर संस्था की स्थापना फ्रीडम फाइटर दशरथ सोनी ने की थी
नगर के प्रो. इस्माइल बेग बताया कि 1935 के दौरान सेंधवा में भी ग्राम सेवा कुटीर संस्था की स्थापना फ्रीडम फाइटर दशरथ सोनी ने की थी। ये संस्था आदिवासी अंचल में आजादी के लिए जनजागृति फैलाने के लिए बनाई गई थी। संस्था द्वारा मेर खेड़ी में एक स्कूल का निर्माण किया गया था। स्कूल के संचालन की जि?मेदारी राम रतन शर्मा, प्रभु दयाल चौबे और घनश्याम मुंदड़ा को शिक्षक के रूप में सौंपी गई थी। 1938 -39 में राज्य प्रजामंडल का गठन हो चुका था। इसमें गांधी विचारधारा के युवाओं को शामिल किया गया। मंडल का प्रतिनिधित्व राम रतन शर्मा, प्रभु दयाल चौबे और घनश्याम मुंदड़ा द्वारा किया जाता था। धीरे-धीरे इस मंडल से नगर के युवा बाबूलाल सोनी, सीताराम सोनी, विनायकराव जोशी, शालिग्राम कानून, मोह?मद दादा पटेल, नागेश गुप्ता, डॉ. जगन गुप्ता, शिव नाथ गुप्ता आदि जुड़ गए और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध योजना बनाकर आंदोलनों में शामिल होते रहे।
राम मंदिर चौक पर हुई थी आमसभा
प्रो. बैग ने बताया कि 9 अगस्त 1942 को मुंबई में हुए अधिवेशन से लौटकर राम रतन शर्मा नगर के राम मंदिर चौराहे पर एक सभा का आयोजन किया था और लोगों से आह्वान किया था कि वह मातृभूमि को आजाद कराने में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दें। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 18 अगस्त 1942 को ये निर्णय लिया गया कि प्रतिदिन प्रभात फेरी निकाली जाएगी नगर के प्रमुख मार्गों पर भजन कर्तन किए जाएंगे और शासकीय कार्यालयों के बाहर धरना दिया जाएगा।
महिलाओं ने चूड़ी देकर अधिकारी से हेड मांग जलाई होली
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सेंधवा की कमलाबाई शर्मा और सुंदर बाई सोनी के नेतृत्व में एक प्रभात फेरी निकाली गई। इस दौरान महिलाओं ने किला गेट पर अंग्रेज शासन के अधिकारी पीएन मुंशी को चूडिय़ां भेंट कर उनकी सिर पर लगाई गई हेड मांगी। महिलाओं ने अफसर से कहा कि आपकी हेड अंग्रेजी सरकार का प्रतिनिधि कर रही है।हम इस की होली जलाकर विरोध करेंगे। महिलाओं ने किला गेट पर विदेशी सामान की होली के साथ उसको भी जला दिया जो अंग्रेज अधिकारी से ली थी। इस तरह देश की आजादी के पहले महिलाओं द्वारा किया गया ये आंदोलन नगर की महत्वपूर्ण घटना है।
21 अगस्त 1942 को ही फहरा दिया था किले पर तिरंगा
आंदोलनों के दौरान युवाओं का जोश इतना अधिक था कि उन्होंने अंग्रेज सरकार की सजा और जेल जाने के डर को दरकिनार करते हुए किले की प्राचीर पर तिरंगा फहरा दिया था। राम रतन शर्मा और प्रभु दयाल चौबे को गिरफ्तार करने के कारण युवाओं में नाराजगी थी। युवा जमनालाल शाह, किशन काले नागेश गुप्ता और शिवनाथ गुप्ता ने किले के ऊपर तिरंगा झंडा फहराने का निश्चय किया और 21 अगस्त 1942 तिरंगा किले की प्राचीर पर फहरा दिया। जानकारों ने बताया कि करीब एक घंटे तक तिरंगा किले की प्राचीर पर शान से लहराता रहा। इस घटना के बाद सभी लोग भूमिगत हो गए थे।
3 युवाओं ने काटे टेलीग्राम के तार
तिरंगा फहराने की घटना के बाद युवाओं का जोश और बढ़ गया। युवा शिवनाथ गुप्ता, मदन लाल गर्ग और बाबूलाल सोनी ने अंग्रेजी सरकार की संचार व्यवस्था को ठप करने का निश्चय किया। इसके लिए जरूरी था कि टेलीग्राम के तारों को काटा जाए। ऐसा करना मतलब अंग्रेजों की प्रताडऩा झेलना और जेल जाना था, लेकिन युवा नहीं भेजा और एक रात में जंगलों में टेलीग्राम के तारों को नष्ट कर दिया। अंग्रेजी सरकार के आदेश पर पुलिस ने शिवनाथ गुप्ता और बाबूलाल सोनी को गिरफतार कर लिया।

vishal yadav Reporting
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