आसमान से गिरे ऑफत के बाद किसानों के नहीं रूक रहे आंसू

आसमान से गिरे ऑफत के बाद किसानों के नहीं रूक रहे आंसू

mahendra baghel | Publish: Feb, 15 2018 01:03:00 PM (IST) Seoni, Madhya Pradesh, India

जिले के सैकड़ों गांवों में ओलावृष्टि, सौ फीसदी फसल का नुकसान

सिवनी. आसमान से मंगलवार की दोपहर ओले के रूप में गिरी ऑफत से किसानों के आंसू थम नहीं रहे हैं। मंगलवार की सुबह तक जिन फसल को देखकर किसानों के चेहरे खिले थे। घर-परिवार के लिए कुछ करने को लेकर उनको तरह-तरह के सपने आ रहे थे। दोपहर बाद जब फसल ओले की भेंट चढ़ गए तो सारे सपने चकनाचूर हो गए। बुधवार को खेतों में पहुंचे किसान बदहवाश होकर फसल की ओर निहार रहे थे।
ऐरमा की शीलाबाई मंगलवार को खेत में पहुंचकर दहाड़े मारकर रो रही थी। बुधवार को जब वह पत्रिका टीम के खेत में पहुंचने की जानकारी पर पहुंची तो रोते हुए बोली बेटा कुछ नहीं बचा है खेत में। कलावती, राजेश्वरी, फूल कुमारी, सुरभी वर्मा, लीलावती व भूमि ने सौ फीसदी फसल नुकसानी की बात बताई। चिखला के किसान तेजराम उइके, भूरिया, कविता आदि ने बताया कि जब ओले पड़े तो हम लोग खेत में बनी झोपड़ी में ही थे। हमलोगों ने झोपड़ी को हाथ से पकड़कर ओले की चपेट में आकर गिरने से बचाया। बताया कि ओले जब गिरकर थमे तो पूरे खेत में करीब एक फीट मोटी चादर बिछ गई थी। हर तरफ का नजारा सफेद दिख रहा था। बादलपार व डुंगरिया निवासी किसान अर्जुन राय, इंद्र कुमार रघुवंशी, छबीला सिंह रघुवंशी आदि ने बताया कि क्षेत्र के किसी भी खेत में कोई फसल नहीं बचा है। गन्ने के फसल भी बर्बाद हो गए हैं। लहसून व प्याज के फसल में बुधवार को भी ओले दिखे। चिखला की महिला किसान सूरजवती बाई खेत की दशा देखकर अपनी पीड़ा सुनाते हुए रोने लगी। बताया कि कुरई क्षेत्र में उसकी बेटी की शादी तय है, लेकिन पांच एकड़ में लगी फसल बर्बाद हो जाने के बाद शादी को लेकर समस्याएं अभी से खड़ी होने लगी है।

पटवारी ड्यूटी में दिखे मुस्तैद
मोहगांव. मोहगांव में पटवारी संदीप पांडेय ने सभी किसानों के खेतों में जाकर सर्वे किया। सबकी रिपोर्ट बनाकर दो दिवस के अंदर कार्यालय में देने की बात बताई। पटवारी के साथ दर्जनों की संख्या में किसान आगे-पीछे चल रहे थे। ऐरमा में पटवारी अलकेश डहरवाल ग्राम में किसानों को दस्तावेज से सबंधित जानकारी देते हुए दिखे। डुंगरिया ग्राम में पटवारी ज्योत्सना उइके किसानों से सर्वे की जानकारी लेने के साथ ही उसकी रिपोर्ट तैयार करते दिखी। ऐरमा व डुंगरिया में सिवनी से पटवारी जाने वाले थे, लेकिन वे पहुंचे नहीं, जिससे दोनों जगह दोनों पटवारियों को अकेले कार्य करना पड़ा। चिखला में जगदीश सराठे खेत में पटवारी का इंतजार करते दिखे। दोपहर तीन बजे तक पटवारी उनके खेत में नहीं पहुंचा था। उनके खेत से १०० मीटर दूर गोपी उइके के खेत में पटवारी सर्वे कर चुकी थी।

ड्यूटी लगने के बाद नहीं पहुंचे सिवनी के पटवारी
मोहगांव. ऐरमा, बादलपार डुंगरिया में ड्यूटी लगने के बाद भी सिवनी के पटवारी नहीं पहुंचे। हल्के पटवारी वहां करीब ११ बजे पहुंचे गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों पटवारी मंगलवार को भी ओलावृष्टि के बाद पहुंचे थे। क्षेत्र में एसडीएम व तहसीलदार का भी दौरा लगा रहा।
शिव की सिवनी में महाशिवरात्रि को ये क्या हो गया
सिवनी. मंगलवार की दोपहर को जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में ओले पडऩे शुरू हुए। चंद समय में यह बात कलेक्टर से लगायत मुख्यमंत्री तक पहुंच गई। आनन-फानन में अमला वाहनों के काफिलों संग किसानों की खबर लेने पहुंच गया। लेकिन ओले ने किसानों को ऐसी चोट पहुंचाई की उनको सरकार की ओर से मल्हम के रूप में मिलने वाली राशि नाकाफी साबित होगी। किसानों के फसल बिल्कुल तैयार होने के करीब थे। कई जगह फसल तो ऐसी थी कि आजकल में कटने को थी। खेत में पहुंचे हर शख्स के मुंह से यही आवाज निकल रही थी कि आखिर शिव की सिवनी में महाशिवरात्रि को ये क्या हो गया?
कबीर दास जी की काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगो कब। पंक्ति जिले के मोहगांव निवासी सालिक राम राय पर सटिक बैठ रही है। सालिक राम की पांच एकड़ खेत में लगी गेहूं की फसल तैयार हो गई है। सालिक दो दिनों से मजदूर व हार्वेस्टर ढूढ रहा था। लेकिन मजदूर मिले नहीं, जिसके यहां हार्वेस्टर था, वह अपने घर एक दिन पूर्व बीते शादी के बाद बुधवार को काटने के लिए समय दिया था। इसबीच मौसम ने ऐसी करवट बदली की सालिक की तैयार फसल खेत में ही रह गई। ऐरमा निवासी ४९ एकड़ का किसान भूप सिंह वर्मा ने बताया कि खेत में लगी चने की फसल के अंदर के दाने पर ओले की चोट पड़ी है।
मोहगांव सड़क निवासी डोमन राय ने बताया कि मेरी फसल ऐसी थी कि सड़क से गुजरने वाला एक बार रूक कर देखता था। फसल को देखकर मैंने तीन संतान में सबसे बड़ी बेटी के लिए जबलपुर में रिश्ते की बात शुरू कर दिया था, लेकिन इसबीच गिरे ओले ने इस पर रूकावट डाल दिया है। इतनी बात कहने साथ ही जब डोमन में खेत में सिर पर हाथ रखकर बैठ गया तो उसके साथ खेत गए बेटे अंकित ने उसे ढांढस बधाया। अंकित ने बताया कि इस साल चार एकड़ खुद की खेत के अलावा ३९ हजार में पांच एकड़, ११ हजार में छह एकड़, १८ हजार में पौने तीन एकड़ खेत ठेके पर लेकर बोया था, ताकि अधिक पैसे बचा सके, लेकिन मौसम ने जमा पैसे से की गई खेती को भी बर्बाद कर दिया।

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