आस्था का उमड़ा सैलाब, नंगे पग चले श्रद्धालु....

Sunil Vandewar

Publish: Feb, 27 2019 09:29:25 PM (IST)

Seoni, Seoni, Madhya Pradesh, India

सिवनी. मित्रता का अर्थ होता है समानता। जहां विचारों की समानता तथा संकट में सहयोग देने का भाव होता है, वहां सच्ची मित्रता होती है। भगवान श्रीकृष्ण तथा सुदामा की मित्रता संसार की सर्वश्रेष्ठ मित्रताओं में से एक कही जाती है। भगवान कृष्ण मित्रता का निर्वाह करते हैं जो मानव मात्र के लिए प्रेरणास्रोत है। यह बातें नगर में कथा के प्रथम दिवस पंडित इन्द्रकुमार शास्त्री के द्वारा नर्मदा पुराण के अंतिम दिन कही गई। इससे पूर्व कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु नंगे पग तीखी धूप में चले।
उपस्थित जनों को सम्बोधित करते उन्होने कहा कि जीव अज्ञान के कारण बंधन का अनुभव करता है। वस्तुत: उन्हें किसी ने बांधा है ही नहीं। विवेक तत्व ज्ञान और बैराग्य से मोह को नष्ट किया जाए तो मुक्ति ही है। जिसका बैराग्य दृढ़ हुआ हो उसे ही मुक्ति मिलती है। मन को समझाओ कि सुख का धन संपत्ति का भोग का चिंतन विस्मय है। इससे कभी तृप्ति और शांति का अनुभव नहीं हो पाता।
ईश्वर के चिंतन के बिना, पवित्र विचार, आचार के बिना बैराग्य नहीं आ पाता। जब तक संसार के विषय के प्रति बैराग्य न आए शुद्ध भक्ति का आरंभ नहीं हो पाता। सद-असद का विचार करने से विवेक उत्पन्न होगा और बैराग्य भी। संसार के सभी जड़ पदार्थ दुख रूप और असत है। मात्र चेतन परमात्मा ही आनंद रूप और सत है।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned