शहर के बीच खतरे के साये में पढ़ रहा बचपन

शहर के बीच खतरे के साये में पढ़ रहा बचपन

Sunil Vandewar | Updated: 26 Jun 2019, 11:03:00 AM (IST) Seoni, Seoni, Madhya Pradesh, India

कस्तूरबा शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक शाला का मामला

सिवनी. शहर के बीच एक स्कूल ऐसा भी है, जिसकी छत के नीचे बच्चों को पढ़ाने में शिक्षक, प्रधानपाठक, बीआरसीसी तक खतरा महसूस कर रहे हैं, बावजूद इसके प्रशासन इस भवन को तोडऩा तो दूर मरम्मत कराने में भी गंभीरता नहीं दिखा रहा है। इन सब हालात से बेफिक्र नौनिहाल नए शिक्षण सत्र में भी धसकते फर्श, दरकती दीवारों और गिर रही छत के नीचे शिक्षा का ककहरा सीखने पहुंच रहे हैं। ये हालात मंगलीपेठ क्षेत्र के कस्तूरबा शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक शाला में देखने को मिल रहे हैं। वर्तमान में यहां प्राथमिक शाला के ३९ एवं माध्यमिक के १९ बच्चे अध्ययनरत हैं।
शिक्षकों को सता रहा हादसे का डर -
संकुल प्राचार्य तिलक हाइस्कूल सिवनी से लेकर बीआरसीसी, डीइओ तक को प्रधानपाठक, शिक्षक-शिक्षिकाओं ने आवेदन-निवेदन कर इस शाला भवन की जोखिम भरी स्थिति से अवगत करा चुके हैं। सभी ने आश्वासन तो दिया, लेकिन अब तक समाधान कुछ नहीं मिला है। प्रधानपाठक एमएल बघेल ने लगातार अधिकारियों को लिखे जा रहे पत्रों की छायाप्रति दिखाते हुए बताया कि यहां भवन जीर्ण-शीर्ण हो चुका है। इसके तीन कक्ष में पहली से आठवीं तक की कक्षाएं लगाई जा रही हैं। कई जगह से दीवार फट चुकी हैं, फर्श धंस चुका है। कक्षाएं संचालित करना जोखिम पूर्ण है। इन स्थितियों से सभी विभागीय अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद भी मरम्मत तक से यह शाला मोहताज है।
ऐसे हालात, कैसे स्कूल चलें हम -
साल २००६-०७ से इस भवन में कक्षाएं लग रही हैं। भवन में अब तक कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं बन पाई है। झुग्गी-झोपड़ी इलाके के बीच बिना सुरक्षा दीवार (बाउंड्री वॉल) के स्कूल परिसर में गंदगी फैली व सूकरों का डेरा रहता है। आसपास रहने वाले लोगों ने स्कूल के शौचालय का ताला तोड़कर खुद ही उपयोग कर रहे हैं, जिससे उठ रही बदबू वातावरण को दूषित कर रही है। नजदीक ही नाला है, जिसके जल भराव के कारण स्कूल भवन की नींव तक क्षतिग्रस्त हो गई है, दीवार के नीचे की मिट्टी बह चुकी है। स्कूल में बच्चों के लिए पीने के पानी का उचित इंतजाम नहीं है। एक नल है, जो सुबह चलता है, लेकिन कोई मौजूद नहीं रहने से पानी नहीं मिल पाता। रोजाना ही मध्यान्ह भोजन लाने वाली गाड़ी में एक केन पानी बुलवाते हैं, जिसको ही बच्चे व शिक्षक-शिक्षिका पीते हैं। कभी-कभी यहां से भी पानी नहीं मिल पाता है।
एसडीओ ने देखे हाल, फिर भी नहीं सुधार -
बीआरसीसी राहुल प्रताप सिंह ने पूर्व में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को उक्त जर्जर भवन की स्थिति से वाकिफ कराया था, जिस पर एसडीओ ने निरीक्षण किया। उन्होंने विभागीय कार्यपालन यंत्री संभाग क्रमांक-१ को निरीक्षण प्रतिवेदन में बताया था कि इस १२ वर्ष पुराने भवन के पिछले हिस्से में फाउंडेशन प्रोटेक्शन नहीं होने के कारण भवन की फ्लोरिंग धसक रही है। कुछ दीवारों में क्रेक है, स्लैब की सीलिंग का प्लास्टर भी टूटकर गिर रहा है। इन सभी कार्यों को मरम्मत द्वारा ठीक किए जाने की बात कही गई थी। लेकिन इस ओर स्कूल खुलने के पूर्व कुछ हुआ नहीं।

इनका कहना है -
यह सही है कि कस्तूरबा प्राथमिक, माध्यमिक शाला भवन क्षतिग्रस्त है, वहां शाला संचालन में भविष्य में हादसे की संभावना है। इस सम्बंध में पुन: अधिकारी से चर्चा की जाएगी। नए भवन के निर्माण की लम्बी प्रक्रिया है। समाधान के हरसंभव प्रयास होंगे।
राहुल प्रताप सिंह, बीआरसीसी सिवनी

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