मध्यप्रदेश में संस्कृति और संस्कार दिखते है :नीतू

विधि महाविद्यालय में हुआ व्याख्यान

सिवनी. भारत को आजादी के बाद एकजुट में करने के लिए अनेक राज्यों की स्थापना हुई। इसी कड़ी में भारत का हृदय का दर्जा मध्यप्रदेश को दिया गया। उस दौरान मप्र में 48 जिले थे और मप्र-छत्तीसगढ़ को मिलाकर मप्र का निर्माण किया गया था। बाद में छत्तीसगढ़ अलग हुआ। प्रदेश में अनेक प्रकार की संस्कृति और संस्कार का उदाहरण देखने को मिलते है। उक्त उद्गार डीपीसी विधी महाविद्यालय की छात्रा नीतू चौधरी ने मप्र के स्थापना दिवस के अवसर पर व्यक्त किए।
इस अवसर पर मधुबाला परिहार ने प्रदेश के पुरातत्व एवं पर्यटन स्थल को लेकर अपनी बात रखी। श्वेता नामदेव ने कहा यहां पर अनेक प्रकार की बोलियां बोली जाती है। कल्पना यादव ने बताया कि साड़ी के क्षेत्र में प्रदेश के चंदेरी एवं महेश्वरी का नाम प्रसिद्ध है। गजेन्द्र धुर्वे ने कहा कि यहां पर अनेक नेताओं ने आजादी में अपना योगदान दिया। सतीश मालवीय ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में प्रदेश अग्रणी पंक्ति में रहा है। नीलम पटेल ने कहा कि जंगलों एवं ग्रामीण संस्कृति के दिग्धदर्शन यहां पर हाते हैं। राजेन्द्र डहेरिया ने कहा कि ग्रामीण अंचलों में होने वाले उत्सव और यहां के संस्कार, व्यवहार पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। नवनीत गोखले ने कहा अनेकता में एकता का उदाहरण प्रदेश में देखने को मिलता है। ऋषी कुशवाहा ने कहा अखण्ड राज्य की कल्पना प्रदेश को देखकर की जा सकती है। निखलेश कुल्हाड़े ने कहा यहां पर आज भी लोग आपसी रिश्तों को महत्व देते है। वासु पुष्पराज बघेल ने कहा कि धार्मिक, एकता का भी यहां पर विशेष महत्व है। विवेक सिंह ठाकुर ने कहा सभी धर्मों का यहां पर सम्मान किया जाता है। देवीसिंह निर्मलकर ने कहा कि भारत की संस्कृति, विरासत अगर देखना है तो मध्यप्रदेश को देखा जा सकता है।
कार्यक्रम के अवसर पर विधि विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार चतुर्वेदी ने कहा सिवनी में जो भाषा का उपयोग किया जाता है वही भाषा फिल्म उद्योग में भी की जाती है। यह यहां की सबसे बड़ी विशेषता है। एडव्होकेट अखिलेश यादव ने कहा कि विधी के क्षेत्र में आज भी पंच-पंचायत एवं गांव का मुखिया, सरपंच की परंपरा मध्यप्रदेश में देखने को मिलती है। डॉ. महेन्द्र नायक ने कहा कि अनेक रियासतों को लेकर भारत का निर्माण हुआ इसी तरह वर्तमान में 52 जिले प्रदेश में शामिल है। यहां की आबादी साढ़े सात करोड़ है जो निश्चित ही प्रदेश के लिए गर्व की बात है। अन्नपूर्णा मिश्रा ने कहा कि धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक विरासत हमें यहां देखने को मिलती है। यह सभी धर्मों एवं सभी समाज को एक सूत्र में पिरोती है। संजय जैन ने कहा कि सिवनी जिले में अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जेल में रहे महात्मा गांधी ने भी सिवनी में आकर लोगों को आजादी से जोड़ा। इसलिए पूरे भारत में आजादी के आंदोलन से सिवनी को अलग नही किया जा सकता।

Show More
santosh dubey
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned