दीपिका ने जीती रूपवती सौभाग्यवती नारी प्रतियोगिता

लखनादौन में हरितालिका तीज पर हुआ आयोजन

By: sunil vanderwar

Published: 10 Sep 2021, 07:37 PM IST

सिवनी. जिले के लखनादौन नगर में महिला संगठन निश्छल वेलफेयर सोसायटी द्वारा दूसरे वर्ष व्रती महिलाओं के लिए ऑनलाइन प्रतियोगिता मैं रूपवती सौभाग्यवती नारी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता सौभाग्यवती महिलाओंं के महत्वपूर्ण त्योहार हरितालिका तीज के मौके पर हुई।
यह एक तात्कालिक प्रतियोगिता थी, जिसमें महिलाओं को थीम के अनुसार तैयार होने का अवसर नही मिल पाया, जो जिस रूप मे तैयार थी, कैमरे के सामने थी, निर्णायकों को भी निर्णय लेने में ज्यादा परेशान नही होना पड़ा। रूप और सौभाग्य के चिन्ह के प्रतिशत पर निर्णय लिया गया।
शाम सात बजे महिलाओं को प्रतियोगिता की सूचना दी गई। प्रतियोगिता का समय रात बारह बजे तक रखा गया। फुलेरा जो तीज का प्रतीक है और विशेष रूप से सजाया और बांधा जाता है। इसे भी प्रतियोगिता में शामिल किया गया था। महिलाओं ने उत्साह से प्रतियोगिता मे भाग लिया। प्रथम स्थान पर दीपिका शुक्ला, द्वितीय कल्पना स्थापक, तृतीय रानू तिवारी तथा नीता तिवारी ने प्राप्त किया। निर्णायक की भूमिका में संगीता यादव, शशि कुशवाहा, आशा श्रीवास्तव तथा श्वेता तिवारी, सीमा अग्रवाल रहीं।
संस्था अध्यक्ष अर्चना तिवारी ने बताया की प्राचीन समय में हरितालिका तीज पर महिलाएं सुबह सामुहिक रूप से नदी तट पर जाकर गीत-संगीत के साथ बालू लाकर शंकर-पार्वती की स्थापना बड़ी भक्ति भाव से करती थीं। साज श्रृंगार के साथ पूरी रात जागरण करती, गीत संगीत के आयोजन के बीच फुलेरा बांधा जाता। सामुहिक आयोजन में परस्पर प्रेम, सद्भाव, संस्कृति, धर्म, संस्कार सभी सुरक्षित थे। आज यह सब कहीं खो गया है, जिसे संजोये रखने की जरूरत है। सुबह भगवान को बच्चों के हाथों नदी मे विसर्जन के लिए भेज दिया जाता है।जबकी बडी भक्ति भाव से नदी तट पर दूसरे दिन पूजन अर्चन के साथ फुलेरा विसर्जन किया जाता है। यह विचारणीय है कि रात भर भक्ति के बाद ये कैसी विदाई, हमें हमारे अतीत में लौटने की जरूरत है। हमारे धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए नई पीढी को उसका महत्व बताना और दोबारा यह सब करवाना होगा। बस यही एक उद्देश्य के साथ इस प्रतियोगिता का आयोजन संस्था करती है।
महिलाएं उत्साहित होकर श्रृंगार करें, फुलेरा बांधें, पूजन विधि विधान से करें। हिन्दू धर्म के तीज त्योहार को संजोए रखने की जरूरत है। कोरोना काल और लॉकडाउन की वजह से जहां संगठित होकर ऐसे कार्यक्रम करना संभव नहीं है। यह कार्यक्रम महिलाओं में एक नया उत्साह उमंग और स्फूर्ति के संचार का माध्यम बना। इस आयोजन के विषय में कई परिवार के लोगों ने कहा कि पहली बार हमने अपने परिवार की महिलाओं को इतने मन से श्रृंगार करते और फुलेरा बांध पूजन करते देखा। आज वह एक-एक चीज पूजा थाल में बड़े ध्यान से रख रही थी। समाज मे ऐसे आयोजन होते रहें, लोग धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए कुछ अभिनव पहल करते रहें, इसके लिए संस्था ने सभी के सहयोग की अपेक्षा की है।

sunil vanderwar Reporting
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