शिक्षा के हॉल बेहॉल : जिले के स्कूलों में बाधा बन रही शिक्षक व कक्ष की कमी

कहीं अधूरे पड़े स्कूलों के निर्माण तो कहीं जर्जर है भवन

By: akhilesh thakur

Published: 22 Sep 2021, 11:58 AM IST

सिवनी. शासन के निर्देश पर जिले के स्कूल खुल चुके हैं। पठन-पाठन का कार्य शुरू हो गया है। स्कूलों में शिक्षक कक्षाओं में फिर एक बार देश के सुनहरे भविष्य को गढऩा शुरू कर दिए हैं। इन सबके बीच कुछ स्कूलों में शिक्षक और कक्ष के अभाव में पढ़ाई में बाधा बन रही है। छुई, धनौरा व भीमगढ़ के स्कूल इसकी बानगी है।


एक करोड़ के स्कूल भवन में केवल एक नियमित शिक्षक, जिनके पास प्राचार्य का भी प्रभार
भीमगढ़. छपारा विकासखंड के ग्राम अंजनिया में करीब एक करोड़ रुपए की लागत से निर्मित हाइस्कूल की बिल्डिंग में एक नियमित शिक्षक है, जिनके पास प्राचार्य का भी प्रभार है। यहां ९वीं व १०वीं में 187 छात्र-छात्राएं अध्यनरत है। इस बिल्डिंग में प्राचार्य के लिए एक कुर्सी, टेबल और एक आलमारी है। अन्य कक्षाओं में शिक्षक को बैठने के लिए प्लास्टिक की कुर्सियां हैं। उनको सामग्री रखने के लिए अलमारी तक नहीं है। प्राचार्य एसके बघेल ने प्रयास करके नलकूप खनन करवाया है, जिससे पानी की समस्या का समाधान हो गया है। लेकिन छात्र-छात्राओं को बैठने के लिए टाट-पट्टी की व्यवस्था नहीं है।
प्रभारी प्राचार्य बघेल का कहना है कि मेरे पास इतनी राशि नहीं है कि जिससे मैं बच्चों के लिए डेक्स और बेंच की व्यवस्था कर सकें। बताया कि स्कूल में एक भी रेग्युलर शिक्षक नहीं है। मैं अकेला ही शिक्षक हूं। मेरे द्वारा अन्य अतिथि शिक्षकों को यहां पर शिक्षा कार्य के लिए रखा गया है। कार्यालय का पूरा कार्य मुझे ही करना पड़ता है। पूरे मामले से जिला शिक्षा अधिकारी और सहायक आयुक्त को अवगत कराया दिया गया है, लेकिन कोई भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।


छात्रों को पढऩे नहीं हैं कक्ष, स्वीकृत के बाद भी नहीं बन पाया स्कूल भवन
भीमगढ़. छपारा विकासखंड के ग्राम भीमगढ़ में प्राथमिक कन्या शाला भवन जर्जर हो गया था, जिससे तीन-चार वर्षों से स्कूल बालक शाला परिसर में ही लग रही थी। शिक्षा समिति द्वारा मांग करने पर 26 दिसंबर 2020 को आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा जारी पत्र में सर्वशिक्षा अभियान मद की प्रशासकीय स्वीकृति आदेश प्रदान किया गया था। प्राथमिक कन्या शाला भीमगढ़ डाईस कोड 23440508103 के लिए अतिरिक्त कक्ष निर्माण हेतु चार लाख ४१ हजार रुपए की स्वीकृत हुई थी, जिसमें अप्रैल माह में प्रथम किश्त दो लाख २० हजार पांच सौ रुपए की स्वीकृत कर स्कूल के खाते में जमा करा दी गई। स्कूल की प्रधानपाठिका शीला चौहान द्वारा बताया गया कि अप्रैल माह के बाद जल्द ही हमने कार्य प्रारंभ कर स्लेब लेबल तक पहुंचा दिया। लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी अब तक तक राशि जारी नहीं हुई है। कक्ष में दरवाजा, खिडकियां लग चुकी है, जो चार माह की बारिश के दौरान उनमें जंग लग गया है और सामग्री खराब हो रही है।
राशि के अभाव में कार्य नहीं हो रहे है। स्लैब स्तर तक सारा कार्य पूर्ण हो चुका है। संबंधित विभाग को सारी जानकारी होने के बाद भी दस्तावेजी कार्रवाई होने के बाद राशि जारी नहीं की जा रही है। अगर राशि जल्द जारी नहीं की गई और कक्ष में लगी सामग्री खराब होती है तो संबंधित विभाग इसका जवाबदार रहेगा। वैसे भी बच्चे चार वर्षों से भवन नहीं होने के कारण परेशान है, जिससे पढ़ाई में बाधा उत्पन्न हो रही है। बीआरसी छपारा गोविंद प्रसाद उइके का कहना है हमारे द्वारा सारी कार्रवाई करके दस्तावेज सिवनी जिला कार्यालय पहुंचा दिया गया है राशि जिला से जारी होती है।


1995 में बनी स्कूल की बिल्डिंग टपकती है बारिश में
धनौरा. शासकीय उत्कृष्ट उमावि धनौरा के स्कूल भवन का निर्माण वर्ष 1995 में हुआ था। यह बिल्डिंग अब बारिश होते ही टपकने लगती है। प्राचार्य अविनाश अनवेकर ने खुद के प्रयास से छत की मरम्मत कराया, लेकिन वह कारगर नहीं हो पाया है। बताया कि दो वर्षों से वह मरम्मत के लिए पत्राचार कर रहे हैं, लेकिन बात नहीं बन पा रही है। इसकी वजह से परेशानी हो रही है। बताया कि स्कूल में विद्यार्थी है, लेकिन स्टॉप की समस्या है। २२ शिक्षकों की जरुरत है, लेकिन केवल आठ लोग है। इनके अलावा सात गेस्ट हैं।

akhilesh thakur Bureau Incharge
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