देखिए अपनी मांगों को लेकर एकजुट हो रहे किसान

Sunil Vandewar

Updated: 30 Jan 2019, 12:58:05 PM (IST)

Seoni, Seoni, Madhya Pradesh, India

सिवनी. तहसील घंसौर के तीन ग्राम बरेला, गोरखपुर और बिनैकी की राजस्व सीमा में स्थापित पॉवर प्लांट में अपनी जमीन खो चुके किसानों के पारिवारिक सदस्यों को नौकरी देने, पीएफ फंड का भुगतान करने सहित अन्य मुद्दों को लेकर किसान शक्ति सिंह के नेतृत्व में लामबंद होते नजर आ रहे हैं। सोमवार को एक बार फिर बड़ी संख्या में तीनों ही ग्रामों के किसान और ग्रामीण बड़ी संख्या में पॉवर प्लांट पहुंचे।
प्लांट के मुख्य कार्यालय के सामने पुन: प्लांट प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के बीच मुद्दों को लेकर संवाद किया गया। इससे पहले विगत दिनों 24 जनवरी को इसी तरह किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पॉवर प्लांट पहुंचे थे, जहां प्लांट प्रबंधन ने समस्याओं के निराकरण के लिए कुछ समय मांगा था जबकि किसानों की ओर से शक्ति सिंह ने 28 जनवरी दिन सोमवार तक वस्तुस्थिति से किसानों के समक्ष अवगत कराने के लिए कहा था। ऐसा ना हो पाने की स्थिति में 28 जनवरी को पुन: ग्रामीणों व किसानों के साथ पॉवर प्लांट से मुद्दों की जानकारी लेने पहुंचने की हिदायत दी गई थी, समयावधि के भीतर पावर प्लांट प्रबंधन द्वारा कोई सार्थक जबाव नहीं दिए जाने के चलते सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे।
जानकारी के अनुसार प्लांट प्रबंधन ने आधा दर्जन से अधिक मुद्दों में से कुछ मुद्दों को शीघ्र हल करने का आश्वासन दिया है। वहीं कुंवर शक्ति सिंह ने एक बार फिर 6 फरवरी तक किसानों की समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक विचार कर लेने की हिदायत दी है। पॉवर प्लांट प्रबंधन को लगातार ग्रामीणों और किसानों की समस्याओं से अवगत कराए जाने के बाद प्रबंधन सकते में आ चुका है, बल्कि प्रशासन भी पॉवर प्लांट और किसानों के बीच कई मुद्दों पर चल रही चर्चा एवं वाद-विवाद पर लगातार नजर रखे हुए है। प्लांट प्रबंधन लोगों की समस्याओं से भलीभांति अवगत है, किंतु निराकरण में देरी से लोगों का सब्र टूटने लगा है। ग्रामीणों का सवाल यह है कि क्या प्लांट प्रबंधन ग्रामीणों के मुद्दे सुलझायेगा या फिर इसी तरह संघर्ष करना पड़ेगा।
किसानों की मांग पर झाबुआ पावर प्लान्ट प्रंबधन के मुकुन्द सिंह ने बताया कि लगभग 180 किसानों की भूमि प्लान्ट ने अधिग्रहण कि है जिसमें लगभग 120 किसानों को यथा योग्य काम पर लिया गया है, वहीं प्लांट परिसर में काम कर रही विभिन्न कंपनियों में भी आसपास क्षेत्र के बहुत अधिक संख्या में ग्रामीणों को संविदा कार्य में रोजगार उपलब्ध कराया गया है। पीएफ की सारी प्रक्रिया केन्द्र सरकार द्वारा दी जाती है। इसमें कागजी खानापूर्ति में एक रुपता ना होने के कारण बिलम्ब हो रहा है, जिनकी कागजी कार्यवाही पूर्ण हो गयी है, उनके खाते पर पीएफ का भुगतान हो गया है, कम्पनी इस कार्य में प्रभावित मजदूरों के साथ है।

 

 

 

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