अमानक स्तर के चार उर्वरक का लॉट प्रतिबंधित, जानिए क्या है मामला

akhilesh thakur

Publish: Oct, 12 2017 04:13:31 (IST)

Seoni, Madhya Pradesh, India
अमानक स्तर के चार उर्वरक का लॉट प्रतिबंधित, जानिए क्या है मामला

उर्वरक गुण नियंत्रण प्रयोगशाला इंदौर की जांच रिपोर्ट, अल्पवर्र्षा से पीडि़त किसानों को दोहरी मार

सिवनी. अल्पवर्षा की मार झेल रहे किसानों के लिए अच्छी खबर नहीं है। उन लोगों ने अपने खेतों में जिस उर्वरक का प्रयोग किया है। वह अमानक स्तर का है। उर्वरक गुण नियंत्रण प्रयोगशाला इंदौर को भेजे गए सैम्पल गुणवत्ता विहीन आने के बाद ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है। प्राधिकृत अधिकारी ने तत्काल उन समितियों में भण्डारण किए गए लॉट के विक्रय पर रोक लगाई है।
प्राधिकृत अधिकारी (उर्वरक) ने बताया कि अमानक स्तर के चार उर्वरक लॉट को प्रतिबंधित किया गया है। इसमें आ.जा. (आदिम जाति) सेवा सहकारी समिति लखनादौन की ब्लू फास्फेट निर्माता कंपनी के सुपर फास्फेट। आ.जा. सेवा सहकारी समिति मोहगांव के विजय ज्योति केमिकल लिमिटेड के लॉट नंबर 23, 24 तथा निर्माता कंपनी एग्रो फास इंडिया लिमिटेड के सुपर फास्फेट लाट सहकारी प्रक्रिया एवं विपणन संस्था सिवनी के निर्माता कंपनी इफ्को के उर्वरक 18:18:18 के लॉट नंबर ०1, 16 की शिकायत पर उर्वरक का नमूना लिया गया था। बताया कि उर्वरक को गुण नियंत्रण प्रयोगशाला इंदौर भेजा गया था। प्रयोगशाला में उर्वरक को जांच के बाद अमानक स्तर का घोषित किया गया है। अमानक उर्वरक भंडारण/विक्रय कर उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के खंड 19 (ए) (बी) का उल्लंघन पाया गया। उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के खंड 26 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अनामक उर्वरक के क्रय-विक्रय एवं भंडारण को प्रतिबंधित कर दिया है।

उधर किसानों का कहना है कि सैम्पल भेजने के पूर्व किसानों ने यहां से खाद लेकर खेतों में छिड़काव किया है। उससे फसल को नहीं मिलने वाले लाभ को लेकर कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल रहा है। उर्वरक सही नहीं होने से फसल को नुकसान हुआ है।

किसानों की सुनने वाला कोई नहीं
किसानों ने पिछले साल इसकी शिकायत की थी। इस साल करीब तीन माह पूर्व खेत में डाले गए खाद (उर्वरक) अभी तक घुले नहीं है। इसको लेकर किसान परेशान है। लेकिन उनकी सुनने वाला कोर्ई नहीं है। जांच के लिए भेजे जाने वाले सैम्पल की रिपोर्ट बहुत विलम्ब से आती है तब तक किसान उर्वरक का उपयोग कर चुके होते हैं। -हुकूमचंद सनोडिय़ा, किसान नेता सिमरिया.

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