फायनेंस वाहन को जब्त कर बिना नाम स्थानांतरण कराए बेचना पड़ा महंगा

- फायनेंस कंपनी से एआरटीओ ने मांगा जवाब, संतुष्ट नहीं होने पर पेश होकर जवाब देने का निर्देश - धारनाकला के अशरफ व हड्डी गोदाम के रियाज ने की थी शिकायत - 'पत्रिकाÓ में खबर प्रकाशित होने के बाद मची खलबली

By: akhilesh thakur

Published: 18 Feb 2020, 12:17 PM IST

सिवनी. फायनेंस कराए गए ट्रक को जब्त कर बिना नाम स्थानांतरण कराकर बेचने के मामले में एक फायनेंस कंपनी घिरती नजर आ रही है। 21 दिसंबर 2019 को 'पत्रिकाÓ में प्रकाशित खबर और पीडि़त की शिकायत को संज्ञान में लेकर एआरटीओ देवेश बाथम ने फायनेंस कंपनी को पत्र जारी कर जवाब मांगा है।

एआरटीओ के पत्र पर फायनेंस कंपनी ने जवाब प्रस्तुत कर दिया है। जवाब से एआरटीओ संतुष्ट नहीं है। उन्होंने फायनेंस कंपनी को पेश होकर अपना पक्ष रखने को कहा है। यदि फायनेंस कंपनी एआरटीओ को संतुष्ट नहीं कर पाई तो उनके खिलाफ धारा-420 के तहत प्रकरण दर्ज होगा। इसकी पुष्टि एआटीओ बाथम ने की है।


गौरतलब है कि जिले में फायनेंस पर ट्रक और डंपर लेने वालों को इन दिनों कंपनियां मानसिक रूप से प्रताडि़त कर रही है। बताया जा रहा है कि एक से दो इएमआई में विलंब हुआ तो बिना सूचना दिए वाहन जब्त कर संबंधित के नाम से अपने नाम पर बिना स्थानांतरित कराए उसे दूसरे को बेच दिया जा रहा है। धारनाकला निवासी अशरफ अली के साथ ऐसा हुआ तो उन्होंने इसकी शिकायत बरघाट पुलिस से की। इसके बाद जब पता चला कि बिना उनके नाम से स्थानांतरित कराए वाहन को दूसरे व्यक्ति को बेच दिया गया है तो उन्होंने उच्चाधिकारियों से शिकायत करना शुरू कर दिया।

खास है कि अगस्त 2016 में जब्त ट्रक के मामले में अशरफ की शिकायत को वर्ष 2019 तक एआरटीओ महकमा सहित संबंधित अधिकारी अनसुना करते रहे। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत किया। इसके बाद भी उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं था। 21 सितंबर को अशरफ की खबर 'पत्रिकाÓ में प्रकाशित किए जाने के बाद संबंधित महकमे में खलबली मच गई। अशरफ ने 'पत्रिकाÓ में प्रकाशित समाचार के साथ शिकायत किया तो एआरटीओ देवेश बाथम ने 24 दिसंबर 2019 को फायनेंस कंपनी को पत्र क्रमांक 2085/अ.क्षे.प.अ./सि./2019 जारी कर उक्त मामले में जवाब प्रस्तुत करने को कहा। पत्र में कंपनी से संबंधित वाहन को भी प्रस्तुत करने को कहा गया था। कंपनी वाहन प्रस्तुत नहीं की। इस मामले में जो जवाब प्रस्तुत किया। उससे एआरटीओ संतुष्ट नजर नहीं आए। इसके बाद उन्होंने छह फरवरी को फिर कंपनी को पत्र क्रमांक 3011/अ.क्षे.प.अ./सि./2020 जारी कर जवाब मांगा।

इस बार भी कंपनी ने जो जवाब दिया है। एआरटीओ उससे संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कंपनी को एक और मौका देते हुए उपस्थित होकर जवाब रखने की बात कही है। अब देखना यह है कि कंपनी अपना पक्ष क्या रखती है। एआरटीओ ने पत्र में ऐसे तीन वाहनों का जिक्र किया है, जिनके मालिक का नाम स्थानांतरण कराए बिना कंपनी पर जब्त कर बेचने का आरोप है।


बिना नाम स्थानांतरण कराए चोरी से जब्त कर बेच दिया डंपर
शहर के हड्डी गोदाम निवासी रियाज मोहम्मद ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2012 में डंपर खरीदा था। 1.76 लाख रुपए श्रीराम कंपनी से फायनेंस कराया। बताया कि इएमआई के कुल 27 किस्त करीब 8202 रुपए प्रतिमाह के बने थे। कुछ इएमआई विलंब करते हुए उसने मार्च 2014 तक करीब 2.26 लाख रुपए जमा किए। उनका दावा है कि उस समय लोन का शेष बायलेंस करीब 4465 रुपए थे। इसके बावजूद बिना सूचना दिए अगस्त 2016 में डंपर जब्त कर बिना नाम स्थानांतरण कराए कंपनी ने बेच दिया। कोतवाली थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। एआरटीओ के पत्र में रियाज के वाहन का भी उल्लेख है।

जवाब संतोषजनक नहीं तो होगा प्रकरण दर्ज
मैंने श्रीराम फायनेंस कंपनी को पत्र जारी कर जवाब मांगा था। उसने जवाब दे दिया है। उसका जवाब गोल-मोल हैं। मैंने कंपनी को मंगलवार को कार्यालय में उपस्थित होकर पक्ष रखने के लिए कहा है। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो उनके खिलाफ धारा-420 का प्रकरण दर्ज कराया जाएगा।
- देवेश बाथम, एआरटीओ सिवनी

एआरटीओ को लीगल सेल ने भेजा हैं जवाब
एआरटीओ का पत्र मिला था। इस संबंध में कंपनी के लीगल सेल ने जवाब प्रस्तुत कर दिया है। यदि उनको इस संबंध में और कोई जानकारी देनी होगी तो लीगल सेल देगी।
- पंकज सोनी, प्रबंधक श्रीराम फायनेंस सिवनी

akhilesh thakur Bureau Incharge
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