पहले पिता फिर मां का सिर से उठा सायां, तीन अनाथ बच्चों को पाल रहे नाना-नानी पर हमला

मृतक की किराना दुकान की लालच में अलग रहने वाले भाई और पिता ने किया विवाद

By: akhilesh thakur

Published: 07 Jun 2021, 08:08 AM IST

सिवनी/छपारा. तीन मासूम के सिर से मां-बाप का सायां उठा तो उसके अपने ही पिता की किराना दुकान पर हक जताने लगे। मासूम की परविश कर रहे नाना-नानी ने उनके हक के लिए छपारा थाना में फरियाद लगाई है। आरोप है कि मासूम के मृत पिता के भाई और परिजनों ने उसकी किराना दुकान पर हक जताने के लिए दुकान पहुंचे नाना-नानी पर हमला किया। महिला बाल कल्याण विभाग की काउंसलिंग में बच्चों ने नाना-नानी के साथ रहने की बात कही है। पुलिस मामले की जांच शुरू कर दी है।
शहर के १० वर्ष, छह वर्ष व तीन वर्ष के तीन मासूस खुशी, मुस्कान व शिवाय के पिता हनुमान साहू की मौत वर्ष २०१९ में हो गई। उनकी मौत के बाद उक्त मासूम का पालन-पोषण उनकी मां रक्षा साहू ने करना शुरू कर दिया। रक्षा अपने पति हनुमान की किराना दुकान का संचालन कर बच्चों की परवरिश कर रही थी। रक्षा की देखभाल के लिए उसके माता-पिता अन्नू बाई व भागचंद साहू उसके साथ संजय कालोनी स्थित मकान पर रहने लगे। उस समय मृतक पति व के भाई, पिता व परिजनों ने उनकी कोई खबर नहीं ली। सबकुछ जैसे-तैसे चल रहा था। इसबीच रक्षा साहू अप्रैल माह में कोरोना संक्रमित हो गई। उसके माता-पिता ने उसके उपचार में कोई कमी नहीं रखी, लेकिन इश्वर को कुछ और ही मंजूर था। १४ अप्रैल को मासूमों की मां की मौत हो गई। इसके बाद उनका पालन-पोषण नाना-नानी ने शुरू कर दिया। मासूम की परवरिश में कोई कमी न रहे इसके लिए नाना-नानी ने उनके मां-बाप की दुकान का संचालन भी शुरू कर दिया। एक मई को जब नाना-नानी मासूम के पिता की किराना दुकान खोलने पहुंचे तो मृतक पिता के भाई और पिता आए और दुकान पर हक जताते हुए नाना-नानी पर हमला कर दिया। इसकी शिकायत दोनों ने छपारा थाना में की है। पुलिस मामले की जांच शुरू कर दी है। उधर महिला बाल कल्याण विभाग ने जब बच्चों की काउंसलिंग की तो तीनों ने नाना-नानी के साथ रहने की बात कही है। उधर तीनों मासूम को मुख्यमंत्री कोविड योजना के तहत लाभ दिलाने के लिए उक्त विभाग की ओर से केस लगाया गया है।

बेटी रक्षा बच्चों को पढ़ाकर बनाना चाहती थी काबिल, अब करेंगे उसे पूरा
नाना-नानी ने बताया कि पुत्री रक्षा अपने पति की मौत के बाद अंदर से टूट गई थी। उसके जीने का सहारा उसके तीन मासूम बच्चे थे। वे उनको अपने जीते जी पढ़ा लिखाकर काबिल बनाना चाहती थी, लेकिन इश्वर ने उसके अरमानों पर पानी फेर दिया। उसकी मौत के बाद अब हम दोनों पति-पत्नी अपनी पुत्री रक्षा के अरमानों को पूरा करना चाहते हैं। हम चाहते है कि अपने जीते ती बेटी के तीनों पुत्र-पुत्रियों को पढ़ा लिखाकर काबिल बना दे ताकि उसकी आत्मा को शांति मिल सकें। बताया कि पुत्री और दामाद के जीते जी उनकी कोई खबर नहीं रखने वाले उसके परिजन अब दुकान की लालच में आगे आकर बच्चों को पालने की बात कह रहे हैं, जिस पर पर विश्वास किया जाना ही संभव नहीं है। दोनों ने शासन-प्रशासन से न्याय की मांग की है। ताकि बच्चों का भविष्य बनाया जा सकें।

akhilesh thakur Bureau Incharge
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