सूरज निकलने से लेकर शाम ढलने तक अहीरी नृत्य ने बांधी शमा, शहर से गांव तक गुलजार

कोरोना संक्रमण के प्रभाव के बीच लंबे समय बाद शहर से गांव तक दिखी खुशियों की ढेर

By: akhilesh thakur

Published: 17 Nov 2020, 12:45 PM IST

सिवनी. कोरोना काल के दौरान लंबे समय तक रहे लॉकडाउन के बाद बेपटरी हुई बाजार और लोगों के चेहरें की मुस्कान लंबे समय बाद दीपावली पर्व के साथ लौटी हैं। दीपावली पर्व पर जहां लोगों ने दीपक जलाए, आतिशबाजी की। दूसरे दिन गोवर्धन पूजा उत्साह के साथ मनाया। तीसरे दिन सोमवार को भैया दूज और ग्वालवंशियों की गायों की ऐतिहासिक पूजा ने गांवों में खुशियों की ढेर ला दी है।

अहीरी नृत्य पर एक ओर लग रहे ठुमके जहां आकर्षित कर रहे, वहीं संगीत व ढोल मजीरे की थाप से क्षेत्र गुंजयमान हो रहा है। लंबे समय से चली आ रही परंपरा कोरोना संक्रमण की वजह से इस वर्ष होगी या नहीं इसको लेकर संशय बना हुआ था, लेकिन सोमवार को सूरज की किरणों के साथ दिन चढऩे और शाम ढलने तक शहर से गांव तक अहीरी नृत्य ने शमा बांधी।

मड़ई मेला का दौर शुरू, यादव समाज के लोगों ने की पारंपरिक अहीरी नृत्य
छपारा. दीपावली पर्व के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में भाइदूज के दिन से मड़ई मेला शुरू हुआ। छपारा क्षेत्र की पहली मड़ई मेला की शुरुआत नगर के तकिया वार्ड से हुई। मड़ई मेला में कोरोना के बावजूद लोग पहुंचे और आनंद लिया। शासन की गाइड लाइन का पालन करते हुए दुकानदारों ने दुकानें लगाई। मेले में गन्ने, मिठाई, सिंघाड़े पीढ़ी, गुब्बारे, पान के ठेले, झूला आदि आकर्षण का केन्द्र रहे। हालांकि पूर्व की भांति इनकी संख्या कम रही। पारंपरिक यादव समाज का अहीरी नृत्य लोगों में आकर्षण का केंद्र रहा। उनके विशेष वाद्य यंत्र व पहनावे ने लोगों का मनमोह लिया। बताया जाता है कि यह ग्राम के लोगों के मनोरंजन के साथ सुख-समृद्धि के लिए यह आयोजन प्रतिवर्ष होता है। यह जनवरी माह तक अलग-अलग गांवों में होता है।

प्रसन्न दिखे मड़ई मेला में आए ग्रामीण
खैरापलारी. दीपावली के दूसरे दिन भरने वाली मड़ई मेला सोमवार को ग्राम लोपा में भरा। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचलों के लोग पहुंचे। लोगों ने मड़ई मेला का आनंद उठाया। गुब्बारे, पान, फल, मिइाई आदि की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ दिखी। मड़ई मेला भरने से ग्रामीण प्रसन्न दिखे।

सैकड़ों ग्वालवंशियों ने चौक गौठान पर की विधि-विधान से पूजा
धारनाकलां. धारनाकला के हनुमान मंदिर चौक पर ग्वालवंशियों ने परंपरा अनुसार गोवर्धन पूजा किया। बड़ी संख्या में सुबह से ही ग्वालवंशी पशुओं को लेकर पहुंचने लगे थे। ग्वालवंशी दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। दीपावली के तीसरे दिन बरघाट क्षेत्र के अलग-अलग के ग्राम से धारनाकला के हनुमान मंदिर चौक पर ग्वालवंशी व यादव समाज के लोग पशुओं के साथ इकट्ठा हुए। विधि-विधान से गोवर्धन पूजा की। ग्रामीण पशुओं को नहला धुलाकर कलर से सजाकर हनुमान चौक गौठान लेकर पहुंचे। लंबे समय से चली आ रही परंपरा अनुसार गाय को खिलाया गया। ढोल-थापे के बीच अहीरी नृत्य ग्वालवंशी ग्रामीणों ने प्रस्तुत की, जिसे खूब सराहा गया।

akhilesh thakur Bureau Incharge
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