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सिवनी

वर्ष 2023-24 में आकाशीय बिजली से 122 व सर्पदंश से आधा सैकड़ा ने गंवाई जान

– आगजनी, अतिवृष्टि व ओलावृष्टि ने भी मचाई तबाही, पीडि़तों को मिले 44.1 करोड़ रुपए

सिवनीJun 28, 2024 / 05:47 pm

akhilesh thakur

अतिवर्षा

अतिवर्षा

सिवनी. जिले के आपादा पीडि़तों में शासन ने 44 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का वितरण किया है। यह राशि उनकी क्षति के एवज में राहत पहुुंचाने के लिए दिया गया है। आपदा पीडि़तों पर गौर करें तो 122 की मौत आकाशीय बिजली की चपेट में आने से हुई है। सर्पदंश से मरने वालों की संख्या 57 है। ओलावृष्टि व अतिवृष्टि (अतिवर्षा) से नुकसान के प्रकरण छह हजार से अधिक जिलेभर में बने हैं।

शासन की माने तो आपदा की चपेट में आकर जिले के 23 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में लगी फसल बर्बाद हो चुकी है। जिले के करीब 20 हजार किसान प्रभावित हुए है। इसमें सिवनी, छपारा, धनौरा, केवलारी विकासखंड क्षेत्र के ग्रामों के किसानों की संख्या अधिक है। आकड़ों पर गौर करें तो इन क्षेत्र के किसानों के खेत में लगी फसल का 50 फीसदी से अधिक नुकसान हुआ है। शासन ने सभी किसानों को मुआवजा की राशि प्रदान कर दी है। अतिवृष्टि की चपेट में आकर जिले में एक हजार से अधिक मकान क्षतिग्रस्त होने के मामले सामने आए है। आगजनी के मामले भी तीन सौ से अधिक के है। इनको भी राहत राशि दी गई है।
राहत राशि ऊंट के मुंह में जीरा-
किसानों की माने तो शासन से जो मुआवजा (राहत राशि) मिलता है। वह ऊंट के मुंह में जीरा के सामान है। असिंचित (वर्षा से निर्भर) खेतों में सौ प्रतिशत फसल नुकसानी पर केवल 16 हजार रुपए का मुआवजा मिलता है। नुकसानी यदि 33 से 50 प्रतिशत तक हुआ तो यह राशि घटकर आठ हजार रुपए हो जाती है। किसानों ने बताया कि सिंचित क्षेत्र की बात की जाए तो वहां पर यह राशि दोगुना हो जाती है। किसानों ने बताया कि प्राकृतिक आपदा से जो क्षति होती है वह मिलने वाली राहत राशि से तीन गुना अधिक होती है। इससे किसानों को आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ता है। भू-अभिलेख के आकड़ों पर गौर करें तो जिले में चार वर्षों से लगातार अतिवर्षा व ओलावृष्टि हो रही है। इसकी चपेट में आकर फसल बर्बाद हो रहे हैं। आपदा के दौरान कच्चे घरों के अलावा पशु हानि सहित दूसरी क्षति की भरपाई करना भी मुश्किल होता है। आगजनी भी बहुत तबाही मचा रही है।
एक्सपर्ट व्यू
आपदा पीडि़तों को जो राहत राशि मिलती है। उस पर शासन को संज्ञान लेना चाहिए। मकान की क्षति, आगजनी, बड़े स्तर पर अतिवृष्टि और ओलावृष्टि पर पीडि़तों को इतना मुआवजा मिलना चाहिए, जिससे उनको जीविकापार्जन की समस्या न आए। अपना जिला कृषि प्रधान है। यहां की 80 फीसदी से अधिक आबादी खेती पर निर्भर है। इसमें खेतीहर मजदूर भी शामिल है। फसल बर्बाद होने से उनको भी नुकसान होता है।
  • उदयभान सिंह ठाकुर, किसान
वर्जन –
राजस्व विभाग के आरबीसी 6-4 नियम के अनुसार प्राकृतिक आपदा का मुआवजा संबंधितों को वितरित किया जाता है। फसल सहित दूसरी क्षति के मामले में मुआवजा राशि का वितरण लगातार किया जा रहा है। प्राकृतिक आपदा से हुई नुकसानी के अधिकांश प्रकरण में संबंधितों को राहत शाखा से भुगतान किया जा चुका है।
  • एसएस परतेती, अधीक्षक भू-अभिलेख शाखा सिवनी

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