जीएसटी कर की जटिलताओं को खत्म करने भारत बंद का सिवनी में मिलाजुला असर

कैट व चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पदाधिकारी दिखे सक्रिय, दूसरे संगठनों ने दिया समर्थन

By: akhilesh thakur

Published: 27 Feb 2021, 10:01 AM IST

सिवनी. कैट (कांफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया टेडर्ज) के बैनर तले शुक्रवार को जीएसटी कर व्यवस्था के विरोध में शुक्रवार को भारत बंद के अह्वान का मिलाजुला असर सिवनी में दिखा। चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि कई व्यापारी संगठनों का भी समर्थन रहा। कैट अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने हड़ताल का सफल बताया है।
हड़ताल करने वाले कारोबारियों ने कहा कि जीएसटी को लेकर व्यापारी संगठनों की परेशानियों को दूर करने में सरकार कोई रूचि नहीं ले रही है। दिन प्रतिदिन नए-नए नियमों को लादकर कर प्रणाली को बेहद जटिल बनाते हुए संपूर्ण व्यापार को कानूनी प्रक्रिया के जाल में उलझा दिया गया है। विभिन्न स्तरों पर चर्चा के बाद भी सरकार व्यापारियों की कठिनाइयों को हल करने में अपनी कोई रूचि नहीं दिखा रही है। विवश होकर व्यापारियों की राष्ट्रीय संस्था कैट ने सरकार का ध्यान व्यापारियों की परेशानियों एवं जीएसटी से संबंधित जटिलताओं को दूर करने हेतु ध्यान आकर्षित करने के लिए भारत बंद का निर्णय लिया। इसके तहत दुकाने बंद रखा गया। जिले के कई व्यापारी संगठनों ने बंद का समर्थन किया। चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल एवं सचिव संजय मालू ने कहा कि जीएसटी कर व्यवस्था में आवश्यक सुधारों की मांग को लेकर व्यापारियों ने भारत में अपने कारोबार बंद रखने का निर्णय लिया था। इसके पूर्व भी हमारे विभिन्न संगठनों द्वारा सरकार से चर्चा की जाती रही है। इस बंद के बाद भी यदि सरकार कोई सकारात्मक पहल नहीं करती है तो हम आगे भी अपना विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे।

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बुधवारी में खुली दिखी दुकानें, बारापत्थर में आशिंक बंद
कैट के अह्वान पर बंद का असर हर जगह नहीं दिखा। बुधवारी बाजार में अधिकांश दुकाने खुली रही। बारापत्थर क्षेत्र में आशिंक बंद रहा। हालांकि सुबह के समय निर्धारित समय के बाद दुकानें खुली।

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बिना सलाह के चार साल में लाए ९५० संशोधन
जीएसटी कर को लेकर हड़ताल पर गए व्यापारियों की माने तो सरकार ने चार साल के अंदर करीब ९५० संशोधन किए हैं। कोई भी संशोधन लेने से पहले व्यापारियों से किसी प्रकार की बातचीत नहीं की और न ही जीएसटी को लेकर व्यापारियों की परेशानी जानने का प्रयास किया। इसको लेकर व्यापारियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि इसका पालन करना काफी मुश्किल हो गया है।
मांग किया है कि अपीलेट ट्रिब्यूनल गठित किया जाए। जीएसटीआर १ फाइल नहीं करने इनपुट क्रेडिट मिले। रिटर्न फाइल नहीं करने पर जबरन नोटिस नहीं दिया जाए। ई-वे बिल की वैलिडिटी प्रतिदिन २०० कमी में संशोधन, टैक्स से ज्यादा लेट फीस न लगाई जाए। गलती पर पेनाल्टी पर माल की जब्ती न की जाए।

akhilesh thakur Bureau Incharge
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