अथाह पानी, डगमगाती नाव में भी पढऩे का हौसला कायम

Sunil Vandewar

Updated: 31 Oct 2019, 12:27:11 PM (IST)

Seoni, Seoni, Madhya Pradesh, India

सिवनी. जिले के एक हिस्से में ऐसा भी गांव है, जहां के बच्चों को पढऩे के लिए रोजाना अथाह पानी में डगमगाती नाव पर सफर कर पढऩे के लिए पांच से सात किमी दूर जाना पड़ता है। लाख मिन्नतों के बाद भी सरकार कोई खास मदद नहीं पहुंचा पाई है।

सात किमी की दूरी नाव से पार कर पढऩे जाते हैं विद्यार्थी
ये गांव है घंसौर ब्लॉक का बीजासेन। इस गांव के हाइस्कूल के विद्यार्थी हर दिन बरगी बांध में पांच से सात किमी की दूरी नाव से पार कर पढऩे जाते हैं। सिवनी जिले के सीमावर्ती गांव बीजासेन में सरकारी मदद न के बराबर पहुंच रही है। इस डूब प्रभावित गांव के पुनर्वास की मांग के बावजूद शासन ने अब तक कोई खास पहल नहीं की है।
स्थानीय ग्रामीण भुवन बर्मन व अन्य ने बताया कि यह गांव बरगी जलाशय के पानी से घिरा हुआ है। यहां पहुंचने का नाव के अलावा कोई विकल्प नहीं हैं। ऐसे में गांव के पुनर्वास की मांग बार-बार होती रही है। लेकिन सरकारें बदलती रहीं, पर इनकी तकदीर नहीं बदल पा रही है।

अपनी जरूरतों के लिए ही करते हैं आना-जाना
बताया कि ग्रामीण तो आम तौर पर अपनी जरूरतों के लिए ही आना-जाना करते हैं, लेकिन स्कूली बच्चों को रोजाना ही नाव के सहारे सफर करना पड़ रहा है। यहां के बच्चे जलाशय को पार कर बगदरी गांव के शासकीय हाइस्कूल अथवा घंसौर पहुंचते हैं।
सौ साल में भी नहीं बदली तस्वीर -
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1913 से आज तक बीजासेन गांव के स्कूल का उन्नयन नहीं हुआ। जिससे शिक्षा का स्तर कम है। हाइस्कूल की शिक्षा लेने के लिए 5 किलोमीटर पानी से रास्ता तय करना पड़ता है। ऐसे में विवश होकर बच्चे पढ़ाई त्याग रहे हैं। ऐसे में जिन बच्चों के हाथों में किताब होना चाहिए वो बच्चे नशे के शिकार हो रहे हैं।

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