ऑनलाइन किसान-मजदूर महापंचायत में तय हुए मुद्दे

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा गांवों में कोरोना संक्रमण जांच की नहीं व्यवस्था

By: sunil vanderwar

Published: 04 May 2021, 08:42 PM IST


सिवनी. संयुक्त किसान मोर्चा मध्य प्रदेश की ऑनलाइन किसान मजदूर महापंचायत आयोजित हुई। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा मई दिवस को किसान मजदूर एकता दिवस के तौर पर मनाया। ऑनलाइन किसान मजदूर महापंचायत करने का मकसद तीनों किसान कानूनों को रद्द कराने, बिजली संशोधन बिल 2020 वापस कराने तथा श्रमिकों के 44 श्रम कानूनों को खत्म कर 4 लेबर कोड लागू करने के खिलाफ देश भर में चल रहे किसान और मजदूरों के आंदोलन की जानकारी अधिक से अधिक किसानों, मजदूरों एवं आम नागरिकों तक पहुंचाना है।
महापंचायत का संचालन किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने किया। संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े प्रदेश के विभिन्न किसान मजदूर संगठनों से जुड़े नेताओं के अपने विचार रखे। ऑनलाइन किसान महापंचायत को बड़वानी से नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर, ग्वालियर से ऑल इंडिया किसान सभा के बादल सरोज, छिंदवाड़ा से किसान संघर्ष समिति की उपाध्यक्ष एड. आराधना भार्गव, भोपाल से अखिल भारतीय किसान सभा के प्रहलाद दास बैरागी, भोपाल से किसान जागृति संगठन के इरफान जाफरी, भोपाल से क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के बाबू सिंह राजपूत, रीवा से शहीद राघवेंद्र सिंह किसान संघर्ष समिति के इंद्रजीतसिंह, झाबुआ से जागृत आदिवासी दलित संगठन की माधुरी, खरगौन से श्रमिक जनता संघ के संजय चौहान, सागर से भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति युनियन संदीप ठाकुर, मंडला से अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के विजय कुमार, जबलपुर से बरगी बांध विस्थापित संघ के राजकुमार सिन्हा, नरसिंहपुर से भारतीय किसान युनियन के बाबूलाल पटेल, इंदौर से भारतीय किसान एवं मजदूर सेना के बबलू जाधव, छतरपुर से किसान क्रांति के दिलीप शर्मा, बालाघाट से किसान गर्जना के अरविंद चौधरी, अलिराजपुर से एनएपीएम के कृपाल सिंह मंडलोई, सिवनी से किसान नेता राजेश पटेल, मुलताई से भागवत परिहार आदि किसान नेताओं ने संबोधित किया। उत्तराखंड से किसंस के जबरसिंह वर्मा, पूणे से लता प्रतिभा मधुकर ने भी किसान मजदूर महापंचायत को संबोधित किया।
संयुक्त किसान मोर्चा सिवनी की ओर से आंदोलन के मीडिया सह प्रभारी मोनू राय ने बताया कि सिवनी जिले सहित मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में किसानों को गेहूं उपार्जन में आ रही परेशानियों को लेकर किसान संघर्ष समिति की उपाध्यक्ष अधिवक्ता आराधना भार्गव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते कहा कि सरकार उपार्जन के बहाने तत्कालीन कांग्रेस सरकार की किसान कर्ज माफी योजना के कारण डिफाल्टर हुए किसानों से चक्र वृद्धि ब्याज के साथ वसूली कर रही है, जिसके कारण किसान सहमा हुआ है। सरकार को तत्काल कर्ज वसूली रोक उपज के दाम पूरे खाते में डालना चाहिए। वहीं सिवनी से किसान नेता राजेश पटेल ने उपार्जन के लिए छोड़े जा रहे मैसेज की एक सप्ताह की वैधता का विरोध किया है। बताया कि किसान अपनी उपज लेकर ट्राली में पहुंच रहा जहां अधिक मात्रा में मैसेज किसानों को पहुंच जाने से ट्रैक्टर ट्रालियों की संख्या 1000 तक हो जा रही है, एक सप्ताह में किसान एक ट्राली गेहूं तुलाई कर वापस अपने घर पहुंच रहा है, उपार्जन केंद्र में कोविड का पालन नही हो रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
महापंचायत में पारित हुए प्रस्ताव
आंदोलन के मीडिया प्रभारी ने बताया कि ऑनलाइन महापंचायत में पारित प्रस्ताव के मुताबिक प्रमुख मांग में श्रमिक विरोधी 4 लेबर कोड रद्द किये जाए। काम का समय 8 घंटे किया जाए। मजदूरों का न्यूनतम वेतन बढ़ाया जाए। असंगठित श्रमिकों का पंचायत स्तर पर पंजीयन का कार्य ऑनलाइन या ऑफलाइन कराया जाना चाहिए। लॉकडाउन के समय श्रमिकों को दस हजार रूपए प्रति माह आर्थिक मदद दी जाए। अस्पतालों में ऑक्सीजन, दवाई, वेंटिलेटर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाए। निजी ऑक्सीजन निर्माता कंपनियों का अधिग्रहण कर सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति कराई जाए। ऑक्सीजन तथा दवाइयों की कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। लॉकडाउन में मंडियां बंद होने से किसान अपनी उपज बेच नहीं पा रहे हैं। महामारी से पीडि़त किसान पैसे के अभाव में इलाज तक नहीं करा पा रहे है। कोरोना संक्रमण गांव-गांव पंहुच गया है। गांवों में कोविड की जांच और उपचार कराने के कोई संसाधन नहीं है। जिससे संक्रमण तेजी से फैल रहा है। गांव स्तर पर तत्काल इलाज की व्यवस्था की जाए। मजदूरों के पलायन रोकने के लिए मनरेगा के कार्यदिवस 200 दिन किए जाए तथा मनरेगा के तहत किसान के खेत मे पौधारोपण किया जाए। मुख्यमंत्री कल्याण योजना की राशि तत्काल किसानों के खाते में डाली जाएं। प्रति पांच किलोमीटर पर शासकीय कृषि उपज मंडी खोली जाए। उड़ीसा, छत्तीसगढ़ की तरह वनोपज की एमएसपी पर खरीद की जाए। लॉकडाउन के कारण किसानों के फल, दूध तथा सब्जियों की खरीद बंद होने से हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए। कोरोना संक्रमण से हुई मौत पर उनके परिजनों को पच्चीस लाख रूपए मुआवजा दिया जाए। फसल उपार्जन के पंजीकृत किसानों की मृत्यु पर उसके परिजन से खरीद नही की जाती है। कृषक की मृत्यु के उपरांत परिजनों से फसल खरीद की जाएं।

sunil vanderwar Reporting
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