कराहते मरीज घंटों खड़े रहे ओपीडी की पर्ची लाइन में

कराहते मरीज घंटों खड़े रहे ओपीडी की पर्ची लाइन में

Santosh Dubey | Updated: 14 Jun 2019, 12:20:43 PM (IST) Seoni, Seoni, Madhya Pradesh, India

कभी हाथ से लिखी जाती है पर्ची, तो कभी काउन्टर में रहते हैं कम कर्मचारी

 

सिवनी. जिला अस्पताल के ओपीडी पर्ची काउन्टर में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। माह में लगभग सात दिन मरीजों को लिख कर पर्ची दी जाती है। शिकायत के बाद भी अब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। इस बीच गुरुवार को चार काउन्टर में केवल दो काउन्टर के चालू होने से मरीजों को लम्बी लाइन लगाकर पर्ची लेना पड़ा। गौर करने वाली बात है कि प्रतिदिन 800 से एक हजार मरीज ओपीडी की पर्ची कटाते हैं। अस्पताल प्रबंधन ने पर्ची काटने का जिम्मा एक निजी एजेंसी को दिया है। बावजूद इसकी स्थिति में सुधार न होना एजेंसी के कार्यशैली सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा है।
गौरतलब है कि जिला अस्पताल में जिले भर से पैर दर्द, बुखार, हाथ दर्द आदि मरीज के लोग आते हैं। जिसमें से कुछ मरीजों के साथ तो परिजन होते हैं वहीं कुछ मरीज स्वयं दर्द से कराहते हुए लाइन में खड़े रहते हैं। मरीज दीपक तिवारी, श्याम नारायण, अनिताबाई आदि ने बताया कि गुरुवार को सुबह हम लोग 9.30 बजे जिला अस्पताल आ गए थे। लेकिन पर्ची लेने में करीब 45 मिनट लाइन में खड़े रहना पड़ा। दीपक ने बताया कि पैर में अत्यधिक दर्द होने की वजह से लम्बे समय तक खड़े रहने से अकडऩ हो गई इसकी वजह से काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।
वहीं रानी बाई ने बताया कि उसके कमर में दर्द था वह अकेले बादरपार से आई थी लम्बे समय तक लाइन में खड़े रहने से काफी परेशानी हुई। बताया कि पर्ची लेकर डॉक्टर को ओपीडी में दिखाने जाने में दर्द की वजह से 20 मिनट लगे। डॉक्टर की ओपीडी में भी लाइन लगे होने के कारण यहां भी लगभग 20 मिनट तक खड़े होना पड़ा।
गलत पर्ची से भी परेशान मरीज
यहां अनेक मरीजों ने बताया कि पर्ची बनने के बाद उनके नाम में भी काफी गड़बड़ी हो जाती है। जब सुधार कार्य के लिए जाते हैं तो वे उल्टा चोर कोतवाल को डाटे कहावत चरितार्थ करते हुए मरीजों को ही ठीक तरीके से नाम नहीं बताने की नसीहत देने से नहीं चूकते। वहीं अनेक ऐसे मरीजों से 10 रुपए की राशि भी वसूल कर ली जाती जिनकी पर्ची फ्री बनाने का प्रावधान रहता है। इनमें से कुछ सीनियर सिटीजन की पर्ची में नि:शुल्क तो लिखा जाता है लेकिन 10 रुपए ले लिए जाने के आरोप मरीजों ने लगाए हैं।

 

इनका कहना है
पूर्व में भी शिकायतें मिल चुकी हैं। इसके चलते साल भर से पेमेंट रोका गया है। इस मामले की जांच कराई जाएगी।

वीके नावकर, सिविल सर्जन

 

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned