जोखिम में मुसाफिरों की जान...

जोखिम में मुसाफिरों की जान...

Sunil Vandewar | Publish: Apr, 27 2018 11:31:21 AM (IST) Seoni, Madhya Pradesh, India

परिवहन, पुलिस, यातायात विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई

सिवनी. जिले में इन दिनों ग्रीष्मावकाश, शादी का सीजन होने से बड़ी तादाद में लोग बसों से सफर कर रहे हैं। इस स्थिति में बस संचालक, चालक-परिचालक लोगों की सुविधा और जिंदगी की परवाह किए बिना क्षमता से दोगुनी सवारी भरकर, बाहर तक लटकाकर बसों को गंतव्य तक लेकर जा रहे हैं।
खैरापलारी से प्रतिदिन 20 से 30 यात्री वाहनों का आवागमन होता है ऐसे में वाहन मालिक बस में निर्धारित क्षमता से दोगुनी सवार भर रहे हैं। बस की सीट में बैठे लोगों के अलावा इतनी ही तादाद में यात्रियों को खड़े-खड़े ठसाठस भीड़ के बीच सफर करना पड़ता है। लोग भी जल्दी पहुंचने के लिए बसों में लटककर जाने से भी परहेज नहीं करते। यदि कोई हादसा होता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।
इन दिनों में बस संचालकों की मनमानी यात्रियों पर भारी पड़ रही है। बड़ी संख्या में बसों में लोग सफर कर रहे हैं, ऐसे में बस संचालक परिवहन नियमों को ताक पर रखकर कमाई कर रहे हैं। जिले भर में चल रही यात्री बसों में जांच की जाए तो पता चलेगा कि कई में आपातकालीन द्वार और महिलाओं के लिए, विकलांगों के लिए आरक्षित सीट के नियम का भी पालन नहीं हो रहा है।
यात्रियों का कहना है कि बस संचालकों की मनमानी का आलम ये है कि ज्यादातर बसों से किराया सूची, प्राथमिक उपचार की सुविधा गायब है। बसों में बढ़ी भीड़ का सबसे अधिक खामियाजा महिला यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। किराया सूची चस्पा न कर कुछ बस संचालक यात्रियों से मनमाना किराया की वसूली भी कर रहे हैं। बसों में भीड़ के हालात हैं, इसके बावजूद भी अब तक परिवहन विभाग, पुलिस, यातायात का अमला गंभीर नहीं हुआ है। इससे यात्रियों की मुसीबत थमने का नाम नहीं ले रही है।


रोक के बाद भी नरवाई जला रहे किसान

खैरापलारी क्षेत्र के आसपास गेहूं की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है। ऐसी स्थिति में क्षेत्र के किसानों द्वारा नरवाई में आग लगा देने से जहां आगजनी की घटनाएं हो रही हैं।
शासन के सख्त आदेश के बाद भी किसान अपने खेतों में नरवाई में आग लगा रहे हैं। इससे घटनाएं घटित होने की आशंका बनी रहती है। कलेक्टर गोपालचंद्र डाड ने किसानों को नरवाई में आग ना लगाने की सलाह दी है। इसके बावजूद भी किसान नरवाई में आग लगाने से नहीं चूक रहे हैं। क्षेत्र के जागरूक किसानों ने आग ना लगाने की अपील क्षेत्रीय किसानों से किया है।


आदिवासी अंचल में पानी के लिए परेशानी

जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, धरती से जल स्तर घट रहा है। ऐसे में जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में भीषण जल संकट के हालात बन रहे हैं। कलकुही, रजोला, सुरजपुरा, महरतला, तुनिया, दिवारी, दिवारा, जम्होड़ी, पनारझिर जैसे गांव में लोगों को लंबा सफर करने के बाद बमुश्किल पीने का पानी मिल पा रहा है। यहां लोग परेशानी का सामना कर रहे हैं। समय रहते शासन ने इस ओर ध्यान दिया होता, तो पथरीले इलाके में कुछ राहत मिल गई होती।

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