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टूटी-टपकती छत के नीचे रहकर दिव्यांग बेटे को बनाया काबिल

-बेटे ने चाय बेचने वाले पिता को दिया आलीशान घर-गाड़ी का उपहार

सिवनीJun 16, 2024 / 06:44 pm

sunil vanderwar

बेटे के साथ सुक्खूलाल।

बेटे के साथ सुक्खूलाल।

सिवनी. परिस्थितियां चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हो, यदि कर्म की शाखा को पूरे मनोयोग से हिलाया जाय तो सफलता के फूल अवश्य झरते हैं। यह बात हौसलों के दम पर सिद्ध कर दिखाया है सुक्खूलाल यादव ने। टूटी-टपकती मकान की छत और हर विपरीत परिस्थिति के बावजूद अपने दिव्यांग बेटे को पढ़ाया और इस काबिल बनाया कि आज बेटा अपने पिता के सपनों को हकीकत में तब्दील कर रहा है।

विजय के पिता सुक्खूलाल यादव सिवनी में कृषि उपज मंडी के समीप एक छोटी सी चाय की दुकान चलाकर अपने 9 सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण करते रहे हैं। हर पिता की तरह सुक्खूलाल भी अपनी पूरी क्षमता से बच्चों के पालन-पोषण के लिए करते रहे। पिता को सबसे अधिक चिंता अपने कमजोर बच्चे की होती है। इसी तरह सुक्खूलाल अपने छोटे बेटे विजय के लिए विशेष चिंतित रहते, क्योंकि विजय बचपन से पोलियोग्रस्त रहे। विजय ने जब बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर लिया, तब उसकी तकनीकी कामों में रुचि को देखते हुए सुक्खूलाल ने उसे आईटीआई में प्रवेश दिलवाने का निर्णय लिया।

विजय के दिव्यांग होने के कारण रिश्तेदारों-परिचितों ने विजय के पिता को कहा कि इतना खर्च कैसे उठाओगे, तब सुक्खूलाल ने कहा कि चाहे जो हो जाए, बेटा जो पढना चाहता है, पढ़ाऊंगा। उसके लिए चाहे कर्ज लेना पड़े, उसके सपनों को नहीं तोडूंगा। जिन्हें कुछ कर दिखाने का जुनून होता है वे प्रचलित मान्यताओं से ऊपर उठकर निर्णय लेते हैं। पिता के निर्णय को बेटे विजय ने सार्थक करते हुए तकनीकी ज्ञान में महारत हासिल किया। आईटीआई की परीक्षा में सफल होकर विजय ने आईटीआई में अतिथि विद्वान के रूप सेवाएं देकर अपने कौशल को निखारा। इसी दौरान आवश्यक दस्तावेज गुम हो जाने से विजय प्रशिक्षण अधिकारी की परीक्षा में शामिल न हो सके।
विजय बताते हैं कि निराशा के इस क्षणों में छपारा आईटीआई के प्राचार्य नलिन तिवारी सर ने मेरा मनोबल में बढ़ाया और कैरियर के विषय मे मार्गदर्शन किया। विजय निरन्तर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहे, उनके सतत प्रयासों का सुखद परिणाम आया। भारत सरकार कोयला मंत्रालय के अंतर्गत महारत्न कम्पनी एनसीएल में विजय का चयन हो गया। चार वर्ष से इस कम्पनी में कार्य करते हुए विजय मैकेनिक फिटर ग्रेड-6 के पद पर कार्यरत हैं और उनका वेतन 1.10 लाख रुपए प्रति माह है।

पिता ने कहा मुझे सबकुछ मिल गया-
विजय ने चार वर्ष में कार्य करने हुए अपने पिता के लिए इतना कुछ जुटा लिया है, कि पिता भी कह रहे हैं, कि मेरा तो सपना पूरा हो गया। विजय ने कच्चे घर को पक्का करा लिया और कार भी खरीद ली है। साथ ही भाई बहनों की संतानों को उचित शिक्षा दिलाने में सहायक बन रहे हैं। विजय अपने पिता को सभी सुख सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उत्साहित हंै। विजय के पिता कहते हैं कि मैं जिस बेटे की दिव्यांग अवस्था को देखकर चिंता करता था, उसी बेटे ने पूरे परिवार की ङ्क्षचता दूर कर दी है।

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