पत्रिका टॉक शो - जनता, पत्रिका और पत्रकारिता की हुइ जीत

पत्रिका टॉक शो - जनता, पत्रिका और पत्रकारिता की हुइ जीत

Sunil Vandewar | Updated: 29 Mar 2018, 11:32:42 AM (IST) Seoni, Madhya Pradesh, India

पत्रिका टॉक शो में बोले पीजी कॉलेज के प्रोफेसर

सिवनी. राजस्थान के काले कानून के बाद मध्यप्रदेश में भी सरकार द्वारा काला कानून ला कर विधायकों के सवाल पूछने के अधिकार को नियंत्रित किया जा रहा था। लेकिन पत्रिका की इस मुद्दे पर मुहिम और लगातार खबरों के कारण सरकार को अपने पैर वापस खींचने पड़े और नियंत्रण हटा दिया गया। मप्र में अब यह काला कानून लागू नहीं होगा।
पत्रिका की इस बड़ी जीत पर सिवनी के अग्रणी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित टॉक शो में भी प्रबुद्धजनों ने अपनी बात कही और माना कि पत्रिका की ताकत से ही मध्यप्रदेश में लागू होने वाला यह काला कानून रूक गया। टॉक शो में शामिल प्राचार्य व वरिष्ठ प्राध्यापकों ने पत्रिका को इस कार्य के लिए बधाई देते हुए कहा कि पत्रिका ऐसे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने वाले कार्यों को प्राथमिकता से करते हुए देश के दूसरे अखबारों से अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। पत्रिका ऐसा ही है, जो जनहित के मुद्दों और जमीन से जुड़ी खबरों को मुहिम बनाकर संघर्ष करता है और जीत भी हासिल करता है। पत्रिका एकमात्र ऐसा अखबार है जो जनता से जुड़े मुद्दों को न सिर्फ प्रमुखता से उठाया है, बल्कि उन्हें मुकाम तक पहुंचाता है। प्रबुद्धजनों ने पत्रिका से जनहित के मुद्दों पर इसी तरह से पत्रकारिता करते रहने की उम्मीद भी जताई।
पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल एसके चिले ने कहा कि विधानसभा में जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधि पहुंचते हैं। यदि सदन में समिति के सामने कोई प्रस्ताव आता है तो उस पर चर्चा कर और बेहतर कार्य किए जा सकते हैं। इसलिए खुले मंच पर चर्चा होनी चाहिए, इसमें जन मत भी लिया जाए तो बेहतर है। इसके परिणाम सार्थक होंगे। कोई भी निर्णय एक पक्षीय नहीं होना चाहिए, पत्रिका ने इस मुहिम को चलाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती दी है।
कॉलेज में कानून की शिक्षा दे रहे प्रोफेसर निशांत दुबे ने कहा लोकतंत्र में पक्ष-विपक्ष होना अनिवार्य है। सदन में दोनों ही एक छत के नीचे बैठकर विकास के विषयों पर चर्चा कर आपसी सहमति बनाते हैं। इसलिए कह सकते हैं कि सरकार चलाने में विपक्ष भी महत्वपूर्ण है। सत्ता पक्ष जब बहुमत से लगातार जीतता जाता है, तो विपक्ष को छोटा आंका जाने लगता है, यहीं से समस्या शुरु होती है। ये प्रवृति संघर्ष का स्वरूप लेती है। इसका एक उदाहरण राजस्थान है। वहां ऐसा ही हुआ। पत्रिका ने वहां लोकतंत्र की रक्षा का बड़ा प्रयास किया। पत्रिका ने वहां की सरकार की कुत्सिक मानसिकता का खुला विरोध किया। इस तरह पत्रिका को एक नया आयाम मिला। मप्र में भी विधायकों के अधिकारों पर पाबंदी के कानून का विरोध कर पत्रिका ने यहां भी काले कानून का खुला विरोध कर सफलता पाइ। इस तरह पत्रिका ने दूसरे मीडिया संस्थानों से अलग अपनी पहचान जनहित के कार्यों, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करते हुए बनाइ है।

सीनियर प्रोफेसर एमसी सनोडिया ने कहा प्रजातांत्रिक व्यवस्था में सभी को अपने विचार रखने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। कोई अति गोपनीय विषय हो तो गोपनीयता जरूरी है, अन्यथा अन्य विषय को विधान मंडल में विचार के लिए लाकर उचित समाधान पाया जा सकता है।
प्रोफेसर डीआर डहेरिया ने कहा कि विधानसभा में जो काला कानून स्थगित किया गया है व उचित निर्णय है। प्रजातंत्र में सबका मत महत्वपूर्ण होता है। विधायक क्षेत्रीय जनता का प्रतिनिधित्व करता है, उनका मत नहीं लिए जाने का कानून अनुचित था, इस पर नियंत्रण लगाने का जो प्रयास पत्रिका ने किया और सफलता प्राप्त की, वह प्रशंसनीय है।
प्रोफेसर एसके कौशल ने कहा कि सार्वजनिक हित के लिए खुले मंच पर चर्चा होनी चाहिए। किसी एक पक्ष का निर्णय उचित नहीं हो सकता। दूसरे पक्ष से चर्चा कर सहमति बनाकर ही विकास को गति दी जा सकता है।
डीपी ग्वालबंशी ने कहा भारत एक प्रजातांत्रिक राष्ट्र है, यहां सबकी बात का ध्यान रखना चाहिए। प्रजातंत्र में पक्ष और विपक्ष दोनों महत्वपूर्ण हैं। एक पक्ष को चुप करने का प्रयास प्रजातंत्र में उचित नहीं है।
प्रोफेसर आशुतोष सिंह गौर ने कहा जो मामला सदन में समिति के पास है, उसे खुले मंच पर रखना ही चाहिए। अपने-अपने क्षेत्रवासियों की मांग, समस्या, मुद्दों को विधायक बेहतर ढंग से रखते है, उनकी बात सुनना जरूरी है, उसे सदन में बात रखने का अधिकार छीनने का प्रयास नहीं होना चाहिए। पत्रिका ने प्रजातंत्र की रक्षा में अहम भूमिका निभाइ है।
सीएल डहरवाल ने कहा भारत में प्रजातांत्रिक व्यवस्था है, यहां हर व्यक्ति को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है। जो लोग दूसरों की आवाज दबाने का प्रयास करते हैं, वह अनुचित है। ऐसी कुत्सिक मानसिकता वालों का खुला विरोध करने का साहस पत्रिका ने दिखाया है, इसकी प्रशंसा होनी चाहिए।
केसी बापू राउर ने कहा काला कानून प्रजातंत्र को आहत करता है। ऐसे कानून को अमली जामा पहनाना अनुचित है। विधायक जाति, समाज, क्षेत्र की संस्कृति के विकास और समस्या को विधानसभा में उठाते हैं। इससे विकास की ओर राज्य बढ़ता है। वर्तमान परिस्थितियों में को देखें तो हमारा प्रदेश पिछड़ा हुआ है। ऐसे में विधायकों को चुप करने का प्रयास काला कानून लाना सर्वथा अनुचित है। इस काले कानून के विरोध में मुखरता से पत्रिका का सामने आना प्रशंसनीय है।
डॉ आशीष गुप्ता ने कहा भारत संघीय देश है। यहां लोकतंत्र की रक्षा के लिए न्यायपालिका, कार्यपालिका और व्यवस्थापिका कार्य करती है। मप्र में विधायकों के प्रश्न पूछने पर पाबंदी के कानून को लाने का प्रयास विपक्ष पर नियंत्रण करना है। ऐसे में उन मुद्दों पर सही काम ? नहीं होगा जो जनता से जुड़े हैं।
हिन्दी के प्रोफेसर सतेन्द्र शेण्डे ने कहा पत्रिका की मुहिम जनजागृति की मुहिम है। ८ मार्च को मप्र की विधानसभा में संकल्प पारित किया गया। ७ दिन तक चर्चा की गई और १५ मार्च को चुपके से विधायकों के प्रश्न पूछने के प्रस्ताव को पारित कर दिया गया। तब कोइ भी विधायक इस पर गंभीर नहीं हुआ। इस मुद्दे को पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने उठाया और अपनी लेखनी इस बात का खुलासा किया कि काले कानून के क्या परिणाम हो सकते हैं। पत्रिका ने काले कानून के विरुद्ध प्रयास शुरु किया और ४ दिन में ही सरकार ने पारित प्रस्ताव को स्थगित करने का निर्णय लिया। विधायकों के प्रश्न पूछने के अधिकार के छिन जाने की समझ और असर को जब जनप्रतिनिधियों ने समझा तो वे पत्रिका से जुड़े और काले कानून का पुरजोर विरोध किया। इस तरह पत्रिका ने सत्ता के गलियारे के षणयंत्र को गांव की गलियों तक लाया और खुलासा किया, इस काले कानून को रोका। हम लोकतंत्र के नागरिक हैं। इससे विधायकों को भी सीख लेना चाहिए। अनावश्यक प्रश्न विधानसभा में नहीं उठाने चाहिए। पत्रिका के प्रयास से राजस्थान के बाद मप्र में काले कानून का स्थगित किया जाना लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ की जीत है।

 

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned