प्राइवेट स्कूलों को दो साल से नहीं मिली आरटीइ की फीस, पढि़ए पूरी खबर

प्राइवेट स्कूलों को दो साल से नहीं मिली आरटीइ की फीस, पढि़ए पूरी खबर

Sunil Vandewar | Publish: Mar, 30 2018 11:15:02 AM (IST) Seoni, Madhya Pradesh, India

प्राईवेट स्कूल एसोसिएशन जिला संघ ने गिनाइ समस्या, सौंपा ज्ञापन

सिवनी. निजी स्कूल संचालकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंप स्कूल संचालन में आ रही समस्याओं को उठाया। उन्होंने बताया कि २५ प्रतिशत आरटीई के बच्चों को पढ़ाने का प्रावधान है, किंतु शासन द्वारा इन बच्चों की फीस का भुगतान पिछले दो साल से रोके हुए है।
प्राईवेट स्कूल एसोसिएशन (पीएसए) जिला संघ द्वारा नि:शुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) राशि के भुगतान में आ रही समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया गया है।
ज्ञापन सौंप पीएसए ने दो वर्ष का आरटीई भुगतान प्रदान न किए जाने का शासन पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नि:शुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पढऩे वालों विधार्थियों की दो वर्षो से 2016 एवं 2017 की राशि प्रदान नहीं की है और सत्र 2018 की आरटीई प्रवेश प्रक्रिया चालू होने वाली है।
पीएसए जिला संघ से शैलेष तिवारी ने बताया है कि ज्ञापन में जिला व मप्र स्तर की समस्याओं को ध्यान में रखकर सिवनी जिले के आठों विकासखंड के प्रतिनिधी ने यह ज्ञापन तैयार कर मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, सचिव शिक्षा विभाग, आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र, कलेक्टर, डीपीसी व डीईओ को ज्ञापन दिया है
ज्ञापन में बताया कि सत्र 2011 में पहली बार नि:शुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आरटीई में ऑफ लाइन विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया था। लगभग दो वर्ष तक इसकी प्रवेष प्रक्रिया ना स्कूल संचालक समझ पाया ना शिक्षा विभाग समझा पाया। शिक्षा विभाग का नियमित दबाव बना रहा की अपने स्कूल की 25 प्रतिशत नि:शुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आरटीई के बच्चों को सीट में प्रवेश दिया जाए। सत्र 2013 में समग्र आईडी के माध्यम से आरटीई के बच्चों को अपडेट किया गया और 2011 से प्रत्येक प्रपोजल को नोडल अधिकारी द्वारा सत्यापित किया गया है। वर्तमान सत्र में भी वही बच्चे है पर स्कूल रिकार्ड व समग्र आई डी व आधार में मैच नहीं हो रहे हैं। वर्तमान सत्र में नि:शुल्क शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आरटीई के बच्चों के प्रपोजल लॉक करने में कई समस्या आ रही है। प्रपोजल में लॉक नहीं होने पर वह बच्चा आरटीई से बाहर हो जाएगा। ऐसा यदि एक बच्चे के साथ है तो कोई बात नहीं लगभग म0प्र0 के सभी स्कूल के 90 प्रतिषत बच्चों के साथ यहीं स्थिति हैं।
ज्ञापन में कहा कि राज्य शिक्षा केन्द्र के प्रत्येक दो तीन दिन में शिक्षा विभाग पर दबाव डाला जा रहा है कि आप प्राइवेट स्कूल के प्रपोजल लॉक कराएं। शिक्षा विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है कि प्रपोजल लॉक हो जाएं पर कैसे होगा। इन समस्याओं से शिक्षा विभाग पूर्ण रुप से परिचित है पर उसके पास भी कोई हल नहीं है। वर्तमान में मार्च महीना बीत चुका है अब स्कूल की छुट्टियां लगने वाली है और गर्मी में अप्रेल में नया सत्र सम्भव ही नही हैं। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सभी प्राइवेट स्कूल संचालक व अभिभावक व बच्चे के हित में फैसला लेने के विषय में विचार करने की अपेक्षा व्यक्त की है।

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