चिकित्सक नहीं होने से ग्रामवासियों को परेशानी

चिकित्सक नहीं होने से ग्रामवासियों को परेशानी

Mantosh Kumar Singh | Updated: 02 Aug 2019, 12:16:02 PM (IST) Seoni, Seoni, Madhya Pradesh, India

इन केन्द्रों में चिकित्सक, दवाओं की सुविधाएं तो दूर एएनएम के पद भी वर्षों से खाली पड़े हुए है।

सिवनी. शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रो में स्वास्थ्य सेवाऐं देने के नाम पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केंद्र के भवन तो बनवाए दिए गए है। इन केन्द्रों में चिकित्सक, दवाओं की सुविधाएं तो दूर एएनएम के पद भी वर्षों से खाली पड़े हुए है। शोभा की सुपारी बने इन भवनों में मरीजों का इलाज तो नहीं हो पा रहा है। इन भवनों में कहीं ग्राम पंचायतें लग रही है तो कहीं शिक्षा विभाग अतिरिक्त कक्ष के रूप में इन्हे इस्तेमाल किया जा रहा है।
लखनादौन ब्लाक के आदेगांव स्वास्थ्य केन्द्र के अंतर्गत 09 उप स्वास्थ्य केंद्र मढी, पाटन मचवाडा, रामनगरी, औझेरा, पिपरिया मेहरा, परासिया आते है। इन ग्रामों में सामान्य चिकित्सा हेतु एएनएम के पद पोस्टेड है। पर ग्राम मढी एवंं पाटन में ये पद बीते दो वर्षो से रिक्त पड़े हुए है। फरवरी 2018 से मचवाडा, रामनगरी पिपरिया, औझेरा, परासिया ग्राम में भी ये पद खाली पड़े है। चूंकि इन ग्रामों मे जनवरी 2018 तक एएनएम की देखरेख में चिकित्सा व्यवस्था थी, पर रेगुलर पोस्ट होने से अन्यत्र स्थानांतरण हो जाने के कारण यहां के पद रिक्त हो गए है। अत: वर्तमान में इन ग्रामोंं के मरीजों को दवाईयां भी नसीब नही हो पा रही है। साथ ही साथ इन ग्रामों में बच्चों के टीकाकरण एगर्भवती महिलाओं की जांच अन्य मौसमी बीमारियों की सामान्य जांच व स्वास्थ्य संबंधी शासन की विभिन्न गतिविधियां व अन्य कार्यक्रम लगातार प्रभावित हो रहे है।
आदेगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भी हालात भी ऐसे ही है। यहां पर ड्रेसर, वार्डबॉय, फार्माशिष्ट, लेव टेक्निशयन, ड्रॉपऐन्ट्री ऑपरेटर, नर्स आदि के पद भी वर्षो से रिक्त पड़े हुए है। इन रिक्तियों को भरने के लिए कई बार विभागीय तौर पर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। अभी तक उक्त पदों में से किसी भी प्रकार का पद नहीं भरा गया है। चूंकि वर्तमान में स्थानांतरण प्रक्रिया के चलते अन्य जिलों से स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक, एएनएम, नर्स स्टाफ आदि हमारे जिलेे मेें आ रहे है। उनमें से प्राथमिकता के आधार पर आदेगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मे भी नर्स स्टाफ सहित अन्य उक्त रिक्त पदो को भरा जा सकता है। यहां के स्वास्थ्य केन्द्र में भी वर्तमान में एक मात्र महिला चिकित्सक है। लखनादौन अस्पताल की महिला चिकित्सक यदि छुट्टी पर होती है तो आदेगांव में पदस्थ डॉ. स्नेहलता कौशले की ड्यूटी लंबे समय तक लखनादौन में भी लगवा दी जाती है। नर्स स्टाफ न के होने से इस अस्पताल प्रसाविकाओं को प्रसव सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। लिहाजा आसपास के ग्राम्यांचलो की प्रसाविकाओं को लगभग 50 से 60 किमी की दूरी तय कर लखनादौन या सिवनी जाना पड़ता है। कई बार वाहनों या 108 गाड़ी न मिलने से भी जच्चा-बच्चा को खतरा तो बना ही रहता है। साथ ही परिजनों को परेशानी होती है। सरकारी अस्पताल में चिकित्सक के न होने का पूरा-पूरा फायदा कंपाउन्डर या नीम हकीम उठाते है। वर्तमान में आदेगांव सहित आसपास के ग्राम्यांचलो के लगभग हर घर में स्किन फॅंगल जैसी संक्रामक बीमारियों, वायरल बुखार, सर्दी जुकाम के मरीज देखने को मिलने लगे है। पर स्वास्थ्य अमले के पास चिकित्सक विहीन इन ग्राम्यांचलो में एएनएम की व्यवस्था तक न होने के कारण मरीजो को अपनी परेशानियों से ही दो-चार होना पड़ता हैै। आदेगांव अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि खाली पोस्टेड जगहो को न भरे जाने के कारण ग्रामों में स्वास्थ्य संबंंधी समस्याएं बनी हुई है।
चिकित्सकों के आभाव में आदेगांव का यह स्वास्थ्य केंद्र रिफर सेंटर की तर्ज पर ही कार्य कर रहा है। यहां आने वाले मरीजों को सामान्य दवाइयां तो दे दी जाती है। पर ज्यादा सीरियस मरीज को लखनादौन या सिवनी अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है। उन्हें एम्बुलेंस से भेज दिया जाता है। स्वास्थ्य समस्याओ से जूझ रहे रोषित क्षेत्रीयजनो ने प्रशासन से मॉग की है कि मरीजों की परेशानी को समझते हुए शीघ्र ही आदेगांव सहित क्षेत्र के सभी उपस्वास्थ्य केंद्रों मे चिकित्सकों, एएनएम की व्यवस्था करवाई जाए।

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