सार्वजनिक जगह के सर्वेक्षण से तय होगी ग्रामीण क्षेत्र की रैंकिंग

सार्वजनिक जगह के सर्वेक्षण से तय होगी ग्रामीण क्षेत्र की रैंकिंग

Sunil Vandewar | Publish: Jul, 22 2018 11:44:43 AM (IST) Seoni, Madhya Pradesh, India

ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छ सर्वेक्षण एक अगस्त से

सिवनी. स्वच्छ भारत मिशन में शहरी क्षेत्र की तर्ज पर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 करवाया जाएगा। यह सर्वेक्षण एक से 31 अगस्त के मध्य होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्रामीणों से सर्वेक्षण में बढ़-चढ़कर भागीदारी दर्ज कराने को कहा गया है।
विभाग द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि सर्वेक्षण की तिथियों का ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा जिले के चुनिंदा ग्रामों का रेण्डमली चयन कर, यह सर्वेक्षण करवाया जाएगा।
इसमें भारत सरकार द्वारा निर्धारित एजेंसी द्वारा चयनित ग्रामों में स्वच्छता अभियान में करवाए गए कार्यों की गुणात्मकता और संख्यात्मकता का परीक्षण किया जाएगा। स्वच्छ सर्वेक्षण तीन तरह से किया जाएगा। इसमें 35 प्रतिशत अंक सिटीजन फीडबैक से, 35 प्रतिशत अंक सर्विस लेवल प्रोग्रेस तथा 30 प्रतिशत अंक सर्वेक्षण एजेंसी द्वारा मूल्यांकित किया जाएगा।
मूल्यांकन के लिए एजेंसी गांव के सार्वजनिक स्थान स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केन्द्र, हाट-बाजार, धार्मिक स्थल पर साफ.-सफाई की स्थिति और व्यवस्था का जायजा लेगी। इसमें ग्राम के महत्वपूर्ण व्यक्तियों से भी राय ली जाएगी। इस सर्वेक्षण में प्राप्त अंकों के आधार पर देश और प्रदेश की रैंकिंग निर्धारित की जाएगी। टॉप के जिलों को भारत सरकार द्वारा 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। सर्वेक्षण के प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन के लिये तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं।


जुलाई अंत तक घर-घर चलेगा दस्तक अभियान

बाल मृत्यु दर के प्रमुख कारणों को दृष्टिगत रखते हुए स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं के सामुदायिक विस्तार के लिए दस्तक अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के सहयोग से जिले में चलाया जा रहा है। इसमें पांच वर्ष से छोटे बच्चों वाले परिवारों के घर पर आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के संयुक्त दल द्वारा 31 जुलाई तक दस्तक दी जाएगी।
दस्तक अभियान का उद्देश्य पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में प्रमुख बाल्यकालीन बीमारियों की सामुदायिक स्तर पर सक्रिय पहचान द्वारा त्वरित प्रबंधन किया जाना है, जिससे बाल मृत्यु दर में वांछित कमी लाई जा सके। शासन द्वारा स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं के विस्तार के लिए साक्ष्य आधारित रणनीति पर विशेष बल दिया गया है।

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