बारिश ने सभी का दीवाली में निकाला दिवाला

पटाखा दुकानों में पसरा सन्नाटा, धनतेरस व दीपावली की रौनक हुई कम

सिवनी. इस वर्ष हुई बारिश ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। चंद दिनों में मौसम खुलता नजर आता है और फिर बारिश अपना रंग दिखाने लगती है। ऐन दीपावली के एक दिन पहले शनिवार को शहर समेत जिले भर में हो रही रिमझिम बारिश ने दुकानदारों, व्यापारियों, पटाखा व्यवसायियों, किसानों सभी का इस दीवाली में दिवाला निकाल दिया है।
बुधवारी बाजार में इस दिन जहां पैर रखने तक की जगह नहीं रहती थी। दुकानों में ग्राहकों की भीड़ फ्रीज, एलइडी बर्तन, कपड़े, गहने खरीदने में जुटा रहता था। कोई गले में बांस की टुकनी डालकर दीपक की रूई बेचने वाले बच्चों से बनी बनाई दिया-बाती खरीदते नजर आता था। त्योहार के एक दिन पहले आसपास के ग्राम क्षेत्रों से बड़ी संख्या ग्रामीण में मिठाई खरीदने से लेकर कपड़े, पटाखे, जेवर, बर्तन, पूजन सामग्री आदि खरीदने पहुंचते थे। सुबह से आसमान में बादलों के छाए रहने, धूप के नहीं निकलने से छाई अंधियारी के बीच रिमझिम बारिश ने दीपावली पर्व की रौनक कम कर दी है।

भींगते रहे लोग
बारिश थमने और मौसम खुलने के बाद बरसाती, छाता की साफ-सफाई कर लोगों ने सुरक्षित पेटी में रख दिया था। शनिवार को दोपहर से शुरू हुई रिमझिम बारिश के चलते लोग घरों में थे उन्होंने पुन: बरसाती, छाता बाहर निकाला जो बाहर थे वे गीले-भींगते घर पहुंचे। बस स्टैण्ड में यात्री गीले होते यहां-वहां जाते नजर आए।

पटाखा व्यवसायियों में छाई मायूसी
नागपुर रोड स्थित थोक सब्जी मंडी में सब्जी दुकानों का संचालन इस वर्ष हुआ जिसके चलते कुछ वर्षों से यहां लगने वाली पटाखा दुकानों का एक बार पुन: स्थान परिवर्तन करते हुए मठ मंदिर के समीपस्थ रिक्त मैदान में पटाखा दुकानें लगाई गई। पटाखा व्यवसायियों में गोलू चौरसिया, दीपक, राशिद, अनवर आदि ने बताया कि पटाखा दुकान के स्थानांतरण से जहां पटाखा बिक्री में कुछ फर्क पड़ा, वहीं पर्यावरण, प्रदूषण के मद्देनजर सस्ते पटाखे, सांप आदि पर प्रतिबंध लगा है। जिनके पास पिछले साल के बचे उक्त पटाखे थे वे अब बेच नहीं पा रहे हैं। साथ ही बच्चों की पसंद वाले पटाखे नहीं होने से पटाखा विक्रय में काफी कमी आई है। साथ ही जीएसटी के चलते पटाखा भी महंगे में खरीदना पड़ा। दुकानदारों ने बताया कि एक दुकान लगाने में 10 से 12 हजार रुपए का खर्च आता है। उस पर रात-दिन कर्मचारियों को रखने, खाना-खर्चा आदि का खर्च अलग से होता है। बढ़ती महंगाई के चलते ग्राहक कम रुपए का पटाखा खरीद रहे हैं। रही-सही कसर बारिश ने पूरी कर दी, जिसके चलते काफी नुकसान उठाना पड़ है।
गली मोहल्ले की दुकानों में भी सन्नाटा
महंगाई और बारिश के चलते इस बार घर-आंगन में डाली जाने वाली रंगोली कम दिख रही है। दीपावली पर्व का त्योहार जहां लोग पहले 10-15 दिन पहले से मनाने में जुट जाते थे। घर आंगन में रोज विविध प्रकार की रंगोली माताएं-बहनें डालती थी। इस बार वैसा देखने को नहीं मिल रहा है। रंगोली बेचने वालों का भी कहना है कि ग्राहकी कम है। नगर के वार्डों, कॉलोनियों में खुली किराना दुकानों व अन्य दुकानों में भी ग्राहक कम देखने को मिल रहे हैं।

किसान परेशान
मौसम पूरी तरह से साफ नहीं होने, धूप नहीं निकलने से जिन किसानों का मक्का खराब होने से बच गया था उसे किसान लागत लगाकर खेतों में तुड़वाकर, छिलवाकर घर के सामने आंगन, बाड़ी, सड़क किनारे सुखा रहे थे। बारिश के चलते किसानों का मक्का सूख नहीं रहा है। मंडियों में रखे मक्का के नहीं सूखने से व्यापारी खरीद नहीं रहे हैं। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है। धान की फसल में अब रोग लगने लगा है। किसान मूलचंद, रघुनाथ ने बताया कि धान की अच्छी फसल तो आई लेकिन अब मौसम के नहीं खुलने और बारिश होने से धान में कंडवा रोग लग रहा है।

बारिश के आसार
मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि मौसम में हो रहे बदलाव के चलते अभी एक-दो दिन और बारिश की सम्भावनाएं बनी हुई है। बारिश के बाद कड़ाके की ठंड पडऩे का अनुमान लगाया जा रहा है।

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santosh dubey
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