मरीज के जख्म पर गिर रहा बारिश का पानी

छाता लगाकर मरीज और बिस्तर को भीगने से बचा रहे तिमारदार, सूबे के स्वास्थ्य राज्यमंत्री के प्रभार वाले जिले के जिला अस्पताल का हॉल

By: santosh dubey

Published: 24 Jul 2018, 01:33 PM IST

सिवनी. चार सौ बिस्तर वाले इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय में पिछले वर्ष 17 जुलाई 2017 को ऊपर के वार्डों में भर्ती मरीज छतों से बारिश के टपकने से बचने के लिए छाता लगाकर उपचार कराने मजबूर थे। पत्रिका की इस खबर के बाद पीडब्ल्यूडी विभाग से अस्पताल की छत मरम्मत कार्य किए जाने के लिए 44 लाख 95 हजार रुपए स्वीकृत हुए और मरम्मत कार्य भी हुआ लेकिन एक साल बीतने के बाद भी वार्ड की तस्वीर जस की तस बनी है।
रविवार-सोमवार को शहर में हो रही रिमझिम बारिश के चलते जिला अस्पताल के मेल सर्जिकल वार्ड की छत से पुन: बारिश का पानी लगातार टपक रहा है। वार्ड के पलंग नम्बर 11 और 10 में भर्ती मरीजों के जख्म में छत से पानी टपने और बिस्तर गीले होने से मरीज का मर्ज जहां बढ़ रहा है वहीं उनके परिजन छत से लगातार टपक रही पानी की बूंदों से मरीज और बिस्तर को बचाने के लिए वार्ड के अंदर छाता लगाकर खड़े नजर आए।
मेल सर्जिकल वार्ड के पलंग नम्बर 11 में भर्ती ग्राम सालीवाड़ा निवासी मरीज अमान सिंह धुर्वे आग से झुलस जाने पर उपचारार्थ भर्ती किया गया है। मरीज के पंलग के ठीक ऊपर की छत से बारिश के पानी की बूंदें लगातार टपक रही हैं। मरीज के परिजनों में अघनवती बाई, विद्याबाई परते, गनेशी बाई, दुलीराम धुर्वे ने बताया कि मरीज सात दिन से भर्ती है। दो दिन पहले भी छत से पानी टपक रहा था। मरीज की जांच करने आए डॉक्टर और स्टाफ नर्सों ने भी टपकते पानी को देखा। इस मामले की शिकायत किए जाने के बाद न तो पलंग वहां से हटाया गया और न ही टपकते पानी को रोकने के लिए पॉलीथिन आदि की कोई व्यवस्था की गई।
कुरई विकासखण्ड के ग्राम मोहगांव निवासी प्रियतमा कोचरे ने बताया कि उनके मरीज विजय कोचरे आग से झुलस गए हैं। 20 जुलाई को वार्ड के पलंग नम्बर 10 और 11 के बीच जमीन में गद्दा बिछाकर उपचार चल रहा था। लेकिन दो दिन पहले छत से बारिश के पानी की बूंदे टपकने पर रविवार को स्वास्थ्य कर्मी ने उस स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर जगह दी गई है।
इनका कहना है
मै स्वयं गया था। सीएस से चर्चा की गई थी कि पांच-पांच कमरे खाली करके दें। जिससे कुछ काम तो किया गया है लेकिन उक्त हेड में राशि ही नहीं दी गई है। ठेकेदार का भुगतान रुका है। जिससे 50 प्रतिशत ही कार्य हुआ है।
केपी लखेरा, कार्यपालन यंत्री
पीडब्ल्यूडी, सिवनी।

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santosh dubey Reporting
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