राम कथा सारे जगत को पवित्र करने का माध्यम

मातृधाम आएंगे शंकराचार्य महाराज

By: sunil vanderwar

Published: 14 May 2019, 11:26 AM IST

सिवनी. जब परमात्मा प्रकट होते हंै तो वे वेदों के द्वारा ही जाने जाते हैं। वेद सम्मत परमात्मा जब दशरथ पुत्र राम के रूप में प्रकट हुए तो वेदों ने रामायण के रूप में अवतार लिया। उक्ताशय के उद्गार मातृधाम के निकट करहैया ग्राम में शनिवार से प्रारंभ नौ दिवसीय रामकथा के आरंभ में गीता मनीषी ब्रम्हचारी निर्विकल्प स्वरूप के मुखारबिंद से प्रकाशित हुए। रामकथा आयोजकों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार शंकराचार्य स्वामी स्वारूपानंद सरस्वती महाराज आगामी 14 मई को मातृधाम मंदिर पाटोत्सव में उपस्थिति देंगे एवं 15 एवं 16 मई को रामकथा में प्रवचन करेंगे।
रामकथा को विस्तार देते हुए महाराज ने कहा कि महर्षि बाल्यमीकि ने देववाणी संस्कृत में रामायण की रचना की है। ऐसी मान्यता है कि बाल्मीकि ने कलयुग में संत तुलसीदास के रूप में जन्म लेकर लोकभाषा में राम चरित मानस की रचना की तुलसीकृत रामायण में भगवान शंकर राम के सर्वोत्तम प्रेमी है। स्वयं माता सती ने पार्वती रूप में अपना संदेह दूर करने भगवान शंकर से रामकथा सुनी। सती द्वारा भगवान राम की परीक्षा लेने का वृतांत सुनाते हुए कहा कि कभी भी अपने से बड़ों की परीक्षा नहीं लेना चाहिए यह सती परीक्षा का संदेश है। रामकथा महामोह रूपी महिषासुर को मारने वाली है राम कथा चंद्रकिरण के समान शीतलता प्रदान करने वाली है।
भ्रम और भक्ति में संदेह दूर करने का सर्वोत्तम उपाय दीर्घकाल तक रामकथा श्रवण करना है। रामकथा जीवन मुक्त विषयी साधक और सिद्ध सभी को इच्छित फल प्रदान करती है। रामकथा यमदूतों के मुख पर कालिख पोतने वाली जीवन मुक्ति देने वाली काशी के समान है। महाराज ने रामकथा की तुलना पुण्य सलिला गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा और मंदाकनी से की गई है।
मानसमर्मज्ञ हिंगलाज सेना की राष्ट्रीय अध्यक्ष लक्ष्मीमणी शास्त्री ने रामकथा की महिमा बताते हुए कहा कि रामकथा कामधेनु है। रामकथा सुनने के अधिकारी श्रद्धालु मनुष्य ही है। रामकथा सठ, हठी, कामी, क्रोधी एवं ब्राम्हणद्रोही को नहीं सुनाना चाहिए। जब जन्म जन्मांतर के पुण्यों का उदय होता है तब रामकथा सुनाने और सुनने का संयोग बनता है। रामचरित मानस सरोबर के समान है। वेद पुराण अल्प ज्ञानियों के लिये खारे जल के समान है। साधु महात्मा इसे मीठे जल के रूप में सर्व ग्राही बना देते है। रामकथा याज्ञबल्लभ ने महर्षि भारद्वाज को सुनाया शंकरजी ने सती के साथ अगस्त मुनि राम कथा सुनी रामकथा रसिक शंकर कागभुसुंड से हंस बनकर सुनी। लक्ष्मीमणी शास्त्री ने सती प्रसंग सुनाते हुए दक्ष प्रजापति यज्ञ विध्वंश तथा सती के शरीर के इक्कावन खंडो के भारतवर्ष जगह-जगह गिरने पर शक्तिपीठो की स्थापना की जानकारी दी।
मानस प्रभा नीलमणी शास्त्री ने भी मंत्रमुग्ध शैली में रामकथा महिमा का वर्णन किया। इस अवसर पर कथा श्रोत्राओं में जिला ब्राम्हण समाज के अध्यक्ष ओमप्रकाश तिवारी, गुरू परिवार के वरिष्ठ सदस्य करतार सिंह बघेल, हिंगलाज सेना जिलाध्यक्ष श्रीराम बघेल, गीता पराभक्ति मंडल प्रमुख ममता बघेल, गणेश वर्मा, परसराम सनोडिया, धर्मेन्द्र सिंह बघेल आदि सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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sunil vanderwar Reporting
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