कोचिंग का विकल्प तैयार, अब लगेगी रेमेडियल क्लास

कोचिंग का विकल्प तैयार, अब लगेगी रेमेडियल क्लास

Sunil Vandewar | Publish: Oct, 25 2018 11:32:08 AM (IST) Seoni, Madhya Pradesh, India

बिना कोई फीस दिए विषय सम्बंधी समाधान पा सकेंगे विद्यार्थी

सिवनी. जिन स्कूली विद्यार्थियों को स्कूली पढ़ाई में गणित, बहीखाता, अंग्रेजी या अन्य विषय सम्बंधी समस्या आने पर मोटी फीस चुकाकर कोचिंग (ट्यूशन) लगाना पड़ता है। उनके लिए अब शासन ने बिना किसी खर्च के विषय सम्बंधी समस्या का समाधान पाने रेमेडियल क्लास शुरु की है। इसके तहत विद्यार्थी किसी भी विषय से सम्बंधित समस्या का समाधान पा सकेंगे। इसी सम्बंध में गुरुवार सुबह साढे ग्यारह बजे जनपद पंचायत सिवनी के सभाकक्ष में एडीपीसी द्वारा सभी हाइस्कूल व हायर सेकेण्डरी स्कूल प्राचार्यों की बैठक ली जाकर निर्देशित किया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी सह जिला परियोजना समन्वयक (आरएमएसए) महेश गौतम ने बताया कि रेमिडियल टीचिंग अर्थात निदानात्मक शिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों के कठिनाई के क्षेत्रों का निदान करना, उनकी कठिनाईयों, समस्याओं को दूर करने में सहायता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना है, ताकि विद्यार्थी अगली कक्षा में जाने के लिए तैयार हो सकें।
इस तरह होगी कार्रवाई -
त्रैमासिक परीक्षाओं के परिणाम के आधार पर कक्षा ९ तथा कक्षा १०वीं में ५० प्रतिशत विद्याथी्र डी एवं ई ग्रेड में है। कक्षा ११ एवं १२वीं में भी करीब ३० से ३५ प्रतिशत विद्यार्थी डी एवं ई ग्रेड में हैं। इसलिए सभी कक्षाओं के लिए रेमेडियल कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। कक्षा ९वीं में तीसरा एवं चौथा पीरीयड ८० मिनट तथा कक्षा १०वीं में दूसरा एवं तीसरा पीरीयड ८० मिनट रेमेडियकल कक्षाओं के लिए होगा। कक्षा ११ एवं १२ के लिए शैक्षणिक कैलेण्डर अनुसार रेमेडियल कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। रेमेडियल क्लास के प्रत्येक विद्यार्थी का प्रति सप्ताह टेस्ट लिया जाएगा तथा उसका रिकार्ड रखा जाएगा। सभी विद्यार्थियों की काउंसलिंग होगी। प्राचार्य हर सप्ताह बैठक लेकर शिक्षकवार, विषयवार, विद्यार्थीवार समीक्षा कर कठिनाईयों पर चर्चा करेंगे।
जिले की टीम करेगी आकस्मिक निरीक्षण -
जिला स्तर से अकादमिक दल के अतिरिक्त नियमित रेमेडियल कक्षाओं के संचालन की व्यवस्था की मॉनिटरिंग के लिए टीम गठित की जाएगी। यह टीम आकस्मिक रूप से शालाओं का निरीक्षण कर यह सत्यापित करेंगी कि प्रत्येक शाला में रेमेडियल क्लास चल रही है या नहीं। इस पूरी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी एवं अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक तथा ज्ञान पुंज के सदस्यों की होगी। यह आदेश राज्य परियोजना संचालक जयश्री कियावत के जारी पत्र के अनुसार दिया गया है।
ऐसे भी होगा समस्या का समाधान -
एक परिसर एक शाला वाले स्कूलों की प्राथमिक, माध्यमिक शालाओं के स्नातक/ स्नातकोत्त्र उपाधि धारी शिक्षकों का उपयोग हाइस्कूल, हायर सेकेण्डरी के विषय अध्यापन के लिए अनिवार्यत: किया जाएगा। ऐसे शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां स्कूलों की आपस में साझेदारी हो सकती है। उदाहरण के लिए यदि एक स्कूल में अंग्रेजी के शिक्षक उपलब्ध है, किंतु गणित के नहीं, ऐसी स्थिति में दोनों स्कूलों की विषय शिक्षकों की सेवाएं साझा कर ली जाएगी। विषय शिक्षण की इस साझेदारी व्यवस्था को कराने को प्राथमिकता दी जाएगी। जहां साझेदारी न हो सके, वहां भी शिक्षक व्यवस्था अन्य विद्यालयों से विषयमान से पूर्ण की जा सकेगी। इस व्यवस्था में शिक्षकों को सप्ताह में ०३ दिवस अपने विद्यालय में तथा ०३ दिवस निकट के विषय शिक्षक विहीन विद्यालय में सेवाएं देनी होगी। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इस सम्बंध में आदेश जारी किए जाएंगे। इन शिक्षकों की उपस्थिति की जानकारी दोनों स्कूलों से ली जाएगी तथा निर्देश का पालन न करने वाले शिक्षकों के विरूद्ध सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। इस प्रकार की गई व्यवस्था में प्रयुक्त शिक्षक को नियम अनुसार माह में न्यूनतम १० दिवस की अन्य शाला में उपस्थिति के लिए आवागमन व्यय रेमेडियल टीचिंग मद से १५०० रुपए प्रतिमाह दिया जाएगा।
विकल्प बनेगी रेमेडियल क्लास -
रेमेडियल क्लास स्कूल शिक्षा विभाग का अच्छा प्रयास है, इससे विद्यार्थी की कमजोरी सामने आएगी और उनके निदान के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। यह कोचिंग का एक विकल्प भी माना जा सकता है। इसमें विद्यार्थी को कोई खर्च भी नहीं करना पड़ेगा।
महेश गौतम, एडीपीसी, आरएमएसए सिवनी

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