देखिए ऐसे भी विद्यालय हैं जिले में

देखिए ऐसे भी विद्यालय हैं जिले में

Sunil Vandewar | Publish: Apr, 18 2018 01:43:42 PM (IST) Seoni, Madhya Pradesh, India

नियमित शिक्षक विहीन शाला, अधर में बच्चों का भविष्य

सिवनी. जिले के अंतिम छोर पर घंसौर विकासखण्ड क्षेत्र में नर्मदा नदी किनारे अनकबाड़ा गांव है। इसे सिवनी जिले का अंतिम ग्राम होने का दर्जा प्राप्त है। इस गांव की खास बात यह भी है कि यह ग्राम बरगी बांध के विस्थापित लोगों का गांव है दूसरों के लिए खुद की जमीन देते समय सरकार व सरकारी अधिकारियों द्वारा इन विस्थापित लोगों को बड़े-बड़े वादे किए गए थे। शिक्षा, स्वास्थ्य और तरक्की के सपने दिखाने के बाद इन विस्थापितों को सरकार के द्वारा क्या दिया जा रहा है, इसका विश्लेषण सिर्फ इतने से ही आंका जा सकता है कि गांव में एक माध्यमिक विद्यालय है। लेकिन इस विद्यालय में एक भी नियमित शिक्षक पदस्थ नहीं है। विद्यालय का संचालन पिछले कुछ सालों से अतिथि शिक्षकों के भरोसे ही हो रहा है। जबकि गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ शिवप्रसाद कुलस्ते को विद्यालय का प्रभार सौंप दिया गया है। इस विद्यालय में पूर्व में नियमित शिक्षक के पद पर कार्यरत शिक्षक को भी जनपद शिक्षा केन्द्र में प्रतिनियुक्ति के आधार पर बीएसी के पद पर पदस्थ कर दिया गया एवं विद्यालय में पढऩे वाले जरूरतमंद आदिवासी वर्ग के 58 बच्चों का भविष्य अधर में कर दिया गया।
बताया गया कि लगभग तीन साल पहले घंसौर जनपद शिक्षा केन्द्र के में बीआरसीसी के पद पर रफीक खान पदस्थ थे, तब माध्यमिक शाला अनकबाड़ा में पदस्थ भुवन लाल मेश्राम की प्रतिनियुक्ति के लिए प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा गया था। लोगों का आरोप है कि बिना जांच पड़ताल किए उच्चाधिकारियों द्वारा प्रतिनियुक्ति बीआरसीसी कार्यलय में कर दी गई। इससे 58 बच्चों का भविष्य अधर में कर दिया गया। इस स्थ्ािित में अनकबाडा माध्यमिक शाला में एक भी नियमित शिक्षक नहीं है।
जिले के अंतिम क्षेत्र में बसे होने के कारण अब तक उच्चाधिकारियों का ध्यान भी इस ओर नही जा सका है। ऐसे में देखने वाली बात यह है कि एक ओर जहां सरकारी आंकड़े कहते हैं कि शिक्षकों से सिर्फ शैक्षणिक कार्य ही करवाए जाएंगे तो दूसरी ओर उन्हीं आदेशों को किनारे किया जा रहा है और बच्चों के भविष्य संवारने वाले शिक्षक लाभ के पदों पर आसीन होकर इन आदेशों को चुनौती दे रहे हैं।
बीआरसीसी घंसौर शरद तिवारी ने कहा कि इनकी पदस्थापना मेरे कार्यकाल से पहले हो चुकी है इस लिए बीएसी की प्रतिनियुक्ति के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। अगर शिक्षक विहीन शाला के बावजूद इनकी प्रतिनियुक्ति जनपद शिक्षा केन्द्र में की गई है तो यह गलत है।

जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं सभापति जिला शिक्षा समिति चंद्रशेखर चतुर्वेदी ने कहा कि अगर शिक्षक विहीन शाला से लाकर भुवन लाल मेश्राम की प्रतिनियुक्ति बीएसी के पद पर की गई तो यह गलत है। मैं जांच करवाकर कार्रवाई करुंगा क्योंकि शिक्षा जरूरी है बीएसी का काम नहीं।

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