गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम ने तोड़ दिया शिव धनुष

गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम ने तोड़ दिया शिव धनुष

Sunil Vandewar | Updated: 16 Apr 2019, 11:28:50 AM (IST) Seoni, Seoni, Madhya Pradesh, India

देवरीकला में श्रीरामकथा के पांचवे दिन हुआ राम सीता विवाह

सिवनी. छपारा ब्लॉक के देवरीकला गांव में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा अमृत वर्षा के पांचवे दिन कथावाचक अतुल महाराज रामायणी ने श्रद्वालुओं से धनुष यज्ञ के प्रसंग का वाचन किया। कहा कि सिया स्वयंवर में श्रीराम विश्वामित्र के साथ जनक के महल में पहुंचे। वहां सभी देख रहें हैं कि अनेकों राजा धनुष को उठाने का प्रयास किए। लेकिन उठाना तो दूर रहा उसे हिला न सकें। तब जनक ने कह दिया मैं तो अब समझ नहीं पा रहा कि क्या यह पृथ्वी वीरों से खाली है। रामायणी ने कहा कि जहां त्रेता में धनुष के न टूटने से एक जनक रो रहे हैं वहीं आज दहेज रूपी धनुष के न टूटने के कारण अनेक जनक रो रहे हैं। पहले जमाने में बेटियों की शादी में लोग अपनी खुशी से सामान दे कर विदा करते थे। वो परिवार भी सुखी रहता था। परन्तु आज के दौर में दहेज रूपी दानव समाज को खराब कर रहा है। जो माता-पिता जन्म से पहले गर्भ में पल रहे रही लक्ष्मी रूपी कन्या को मार देते हैं उनका परिवार कभी सुखी नहीं रह सकता। उस परिवार का पूजा पाठ परमात्मा कभी स्वीकार नहीं करते।
राजा जनक के ललकारने पर लक्ष्मण आगबबूला होकर कहते है कि यदि राम आदेश दें तो धनुष क्या पूरे ब्रह्माण्ड को उठाकर पटक दूं और कच्चे घड़े के समान तोड़ डालूं। तब विश्वामित्र की आज्ञा से राम धनुष का खण्डन करके सीता के साथ विवाह सम्पन्न करते हैं। कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि यदि हमारे जीवन में गुरूदेव की कृपा प्राप्त रहे तो संसार में या परलोक में कुछ भी प्राप्त करना असंभव नहीं है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

 

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