आचार्य विद्यानंद महाराज के समाधीमरण पर समाज ने दी विलियांजली

आचार्य विद्यानंद महाराज के समाधीमरण पर समाज ने दी विलियांजली
आचार्य विद्यानंद महाराज के समाधीमरण पर समाज ने दी विलियांजली

Santosh Dubey | Updated: 11 Oct 2019, 12:22:05 PM (IST) Seoni, Seoni, Madhya Pradesh, India

सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में हुए आयोजन

सिवनी. सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में 95 वर्षीय वयोवृद्ध दिगम्बर जैनाचार्य राष्ट्रसंत आचार्य विद्यानंद महाराज को भावभीनी श्रृद्धांजली दिगम्बर जैन मंदिर में अर्पित की गई।
श्रृद्धांजली सभा में सर्वप्रथम पूज्य आचार्य भगवन्त के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलन शास्त्र सभा के सदस्यों द्वारा किया गया। दिगम्बर जैन जनरल पंचायत के सेकेटरी नरेन्द्र गोयल ने पूज्य आचार्य महाराज के प्रति अपनी विनयांजली व्यक्त करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के एक वर्ष पूर्व वर्ष 1946 में मात्र 20 वर्ष की लघुवय में आपने जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण कर अपने 75 वर्ष के दीक्षाकाल को जैन संस्कृति की अभूतपूर्व प्रभावना के साथ निष्कलंक व्यतीत किए।
पूर्व जनरल सेकेटरी अभय कुमार जैन ने पूज्य आचार्य भगवन्त के जीवन की अनेक अभूतपूर्व उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अशोक खजांची ने बताया कि में अपने परविार के साथ दिल्ली प्रवास पर था उस समय मुझे सपरिवार उनके दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। सरलता की प्रतिमूर्ति पूज्य आचार्यश्री ने हमें स्वयं अपने हाथों से जिन साहित्य प्रदान कर कृतार्थ किया था भगवान महावीर के 2500वें निर्वाणोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कराने में उनका अवसान अविस्मरणीय है।
यशोधर दिवाकर ने कहा कि स्व. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उनसे अत्यन्त प्रभावित थी। अनेक बार वे उनके दर्शनों को आया करती थीं। गोमटेश का सहस्त्राब्दी महाभिषेक बाबनगजा की 84 फुट प्रतिमा का जीर्णोद्धार इंदौर गोम्मटगिरी स्थापना धर्मस्थल बाहुबली स्थापना आदि अनेक वृहत आयोजनों में आचार्यश्री की मुख्य भूमिका रही।
सभा संचालन करते हुए पारस जैन ने बताया कि वर्तमान में वे सबसे वरिष्ठ जैन आचार्यश्री आचार्य शांतिसागर एवं अपने गुरुद्वय आ.महावीर कीर्ति एवं आचार्य देशभूषण महाराज के प्रति उनका समर्पण अनुकरणीय है। शेडवाल कर्नाटक से प्रारंभ उनकी 95वर्ष की यात्रा अपने 75 वर्ष के साधनाकाल के साथ राजधानी दिल्ली में अनेक मुनियों की उपस्थिती में णमोकार मंत्र के स्मरण के साथ जाग्रत अवस्था में 22 सितम्बर को पूर्ण हुई। सभा में चंद्रकुमार बैसाखिया, दिनेश जैन, कैलाश पाईया, भूपेन्द्र जैन, प्रमोद सनमति, सुकुमाल दिवाकर, सनमत जैन, राजा पटेल, अनिल जैन, विनय जैन, सुभाष जैन, ऋषि जैन, अमित दिवाकर सहित महिला समाज की सदस्याएं उपस्थित थी।

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