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ग्राम पंचायतों के विकास का हाल: निर्माण के दौरान अफसर भी नहीं कर रहे निरीक्षण

– गांव के कार्यों में सबसे अधिक शिकायतें

सिवनीJun 12, 2024 / 06:39 pm

sunil vanderwar

निर्माणाधीन पुलिया।

निर्माणाधीन पुलिया।

सिवनी. अनुसूचित जाति व जनजाति सघन बस्तियों में रहवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने जनजातीय कार्य विभाग हर साल करोड़ों का बजट भेज रहा है। मूलभूत विकास कार्यो के नाम पर मिलने वाला करोड़ रुपए का बजट निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायतों के माध्यम ठेकेदार की जेब में पहुंच रहा है। सुदूर क्षेत्रों व खेतों में आवागमन सुगम बनाने जिले में अनुसूचित जनजाति बाहुल्य बस्तियों में 14 पुलिया निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। जबकि एक सीसी रोड तथा एक सामुदायिक भवन को स्वीकृति दी गई है। सभी निर्माण कार्यो पर 10-10 लाख की राशि स्वीकृत की गई है। जिले की छपारा जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में सात स्थानों पर पुलिया निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जहां अधिकांश ग्राम पंचायतों ने एक-दो बार में 10 लाख का भुगतान कर निर्माण कार्य पूरा कर दिया है। सामग्री के लिए लाखों का भुगतान एक फर्म अथवा व्यक्ति को किया गया है। वहीं मौके पर काम चलाऊ पुलिया निर्माण कराने का आरोप स्थानीय लोग लगा रहे हैं।

निर्माण में नियमों की अनदेखी-
वर्ष 2023-24 में छपारा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत गंगई रैयत, देवगांव, भटमतरा, पायली, बिछुआ बर्रा, गोरखपुर अंजनिया में 10-10 लाख की राशि से पुलिया निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें अधिकांश का निर्माण पूरा हो गया है। स्वीकृति के बाद ग्राम पंचायतों के खातों में निर्माण कार्य की राशि अग्रिम रूप से आ जाती है। ऐसे में नियमों व मापदंडों की परवाह किए गए सांठगांठ कर निर्माण कार्य चंद दिनों में करवा एक ही बार में संपूर्ण राशि का भुगतान हो जाता है, जहां जनपद पंचायत में तैनात तकनीकी अमले की गैर मौजूदगी में निर्माण करवा दिया जाता है। जबकि गुणवत्तायुक्त निर्माण कार्य कराने की जिम्मेदारी जनपद के तकनीकी अमले को सौंपी गई है। सुदूर क्षेत्रों में बसे गरीब आदिवासी परिवारों के उत्थान के लिए जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत मिलने वाले बजट पर ठेकेदार की नजर जमी रहती हैं। कामों को स्वीकृति मिलते ही जनपद पंचायत क्षेत्र की संबंधित ग्राम पंचायत में ठेकेदार और उनसे जुड़े लोग सक्रिय हो जाते हैं। ऐसी ही स्थिति छपारा विकासखंड की ग्राम पंचायतों में बनी हुई है। जहां निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत होने के बाद भी स्थानीय ठेकेदार का बोलबाला है।
&अनुसूचित जाति.जनजाति सघन बस्ती विकास से जुड़े कार्य जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायतों से कराए जाते है। विभागीय इंजीनियर से जिले में किए गए पुलिया व अन्य कार्यो की गुणवत्ता जांच कराना संभव नहीं है। मापदंड व गुणवत्ता अनुरूप निर्माण कार्य कराना जनपद पंचायत के तकनीकी अमले की जिम्मेदारी बनती है। जो भी शिकायतें आती हैं, उन पर नियम अनुसार जांच होती है। एसआर मरावी, प्रभारी सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सिवनी
एक्सपर्ट व्यू
ग्राम पंचायत के पोर्टल के अनुसार सामग्री के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान एक ही फर्म को किया गया है। पोर्टल पर दर्ज भुगतान के अनुसार एक ग्राम पंचायत में मात्र 12 मजदूरों ने पुलिया का निर्माण कर दिया, जिन्हें 1.13 लाख रुपये की मजदूरी का भुगतान किया गया है। जबकि 8.87 लाख रुपये की राशि पुलिया निर्माण के लिए सामग्री पर खर्च की गई होगी।
जितेन्द्र कुमार, ठेकेदार
&पुलिया-सडक़ों के निर्माण में मनमानी की शिकायतें आती रही हैं। विभाग के लोग भी इन मामलों में न तो निर्माण का निरीक्षण करते हैं, न बाद में।

अभिषेक सेन, ग्रामीण

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