सरकारी स्कूलों में बच्चे नही फिर भी पढ़ाने दो-दो शिक्षक है तैनात!

सरकारी स्कूलों में बच्चे नही फिर भी पढ़ाने दो-दो शिक्षक है तैनात!

Sunil Vandewar | Publish: May, 01 2019 11:35:47 AM (IST) | Updated: May, 01 2019 11:35:48 AM (IST) Seoni, Seoni, Madhya Pradesh, India

वेतन में बंट रहे लाखों फिर भी सरकार की योजना फेल

सिवनी. भले ही केंद्र सरकार और राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में विशेष कदम उठाते हुए बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने की बात करती हो और कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करती हो लेकिन हकीकत यह है कि धीरे-धीरे सरकारी स्कूलों से बच्चों का मोहभंग होते जा रहा है और बच्चे और उनके परिजन प्राइवेट स्कूल की तरफ रुख करने लगे हैं। जिसका फायदा प्राइवेट स्कूल संचालकों के द्वारा भी उठाया जा रहा है। स्थिति यह हो गई है कि कहीं-कहीं सरकारी स्कूलों में 3 से लेकर 10 बच्चे ही पढ़ रहे हैं। आश्चर्य इस बात का है कि इतने बच्चों को पढ़ाने के लिए शासन शिक्षको को वेतन के रूप में लाखों रुपया भुगतान कर रहा है, जिसके कारण शासन के ऊपर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ आ रहा है।
स्कूल है,शिक्षक है, लेकिन बच्चे है गायब -
हाल ही में जिला शिक्षा अधिकारी के प्रयासों से सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के प्रतिनिधि मंडलों को प्राइवेट स्कूलों का निरीक्षण करने भेजा गया था, ताकि सरकारी स्कूलों के शिक्षक प्राइवेट स्कूल में दी जाने वाली शिक्षा, वहां का प्रबंधन देखें और अपने स्कूल में लागू करते हुए बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाएं। इस दिशा में प्रयास किया था, लेकिन यह प्रयास इसलिए भी रंग नहीं लाएगा, क्योंकि गांव में स्थित स्कूलों की दशा बेहद ही दयनीय है। कुछ स्कूलों में तैनात शिक्षक महज वेतन लेने के लिए स्कूल जाते हैं। उन्हें इस बात से कोई लेना-देना नहीं कि उनके स्कूलों में बच्चों की संख्या कम हो रही है या बढ़ रही है।
बिना विद्यार्थी के चल रहे स्कूल -
जागरुक नागरिक जब छपारा क्षेत्र के स्कूलों में पहुंचे तो ऐसे स्कूल मिले जहां बच्चों की दर्ज संख्या थी ही नहीं। बावजूद इसके स्कूलों में दो शिक्षक तैनात थे। ऐसा ही एक स्कूल है संजय कॉलोनी छपारा। इसमें कोई भी बच्चों का प्रवेश नहीं है, वहीं दूसरा स्कूल मुंडाटोला है। जहां मात्र एक बच्चा पढ़ता है लेकिन वहां 2-2 शिक्षक तैनात हैं। जो यह बताने के लिए काफी है कि शिक्षा विभाग के जिले में बैठे अधिकारियों का ध्यान भी कभी स्कूलों की तरफ नहीं जाता और ना ही आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त का ध्यान जाता है।
यही कारण है कि सरकारी स्कूलों में दिन पर दिन बच्चों की संख्या कम होती जा रही है और शिक्षकों की वेतन बढ़ते जा रही है। यदि सरकारी स्कूलों के शिक्षक जिस हिसाब से वेतन प्राप्त करते हैं उस हिसाब से मेहनत करने लगे तो हर गांव में बच्चों की दर्ज संख्या बढ़ जाएगी।
छपारा क्षेत्र के स्कूलों की ऐसी है स्थिति -
गत दिवस नागरिकों ने सरकारी स्कूलों का जायजा लिया तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आई। छपारा जनपद के अंतर्गत आने वाले दर्जनों स्कूलों में गई जहां पता चला कि स्कूलों में बच्चों की दर्ज संख्या 3 से लेकर 10 तक है जिन्हें पढ़ाने के लिए दो-दो शिक्षक तैनात है। जिनकी वेतन 30,000 से लेकर 70,000 महीना है। कम दर्ज संख्या वाले स्कूलों में प्रायमरी स्कूल घोघरी 3 बच्चे, नंदोरा 8 बच्चे, गोहना 5 बच्चे, छपारा कला 5 बच्चे, गंगाढाना 8 बच्चे, जूनापानी टोला 9 बच्चे, मुंडाटोला 1, दीघौरीटोला 9, कचनरा 10, बर्राटोला 9, संजय कालोनी छपारा, देवरीखुर्द 8 बच्चेएकन्या चमारी खुर्द 6 बच्चे, बालक चमारी खुर्द 5 बच्चे, नारायण टोला 4 बच्चे, सिंघोडी 8 बच्चे, गुन्द्रई 8 बच्चो की दर संख्या है। जहां दो-दो शिक्षक तैनात है, जिन्हें हर महीने खासा वेतन मिलता है लेकिन वह स्कूलों की तरफ ध्यान नही देते।
अधिकारियों को भेजी है रिपोर्ट -
हमने कम दर्ज संख्या वाले स्कूलों की एक रिपोर्ट बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा है। इस पर जैसे भी निर्देश प्राप्त होंगे, वैसी कार्यवाही की जाएगी।
गोविंद उइके, बीआरसीसी छपारा

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