पाले से फसल बचाव के कृषि वैज्ञानिकों ने बताए ये उपाय

पाले से फसल बचाव के कृषि वैज्ञानिकों ने बताए ये उपाय

Sunil Vandewar | Publish: Jan, 30 2018 03:30:01 PM (IST) Seoni, Madhya Pradesh, India

आद्रता प्रतिशत कम हो तो उस रार्ति को पाला या तुसार पडने की सबसे अधिक संभावना रहती है।

सिवनी. रबी की फसलों में पाले से पौधे की पत्ते, फूल एवं फलियां झुलस जाती है अत: फसलों के उत्पादन पर प्रभाव पडता है शीत ऋतु में जब वायुमंडल का औसत तापक्रम शून्य डिग्री से कम हो जाता है तब फसल के पौधों की कोशिकाओं में उपस्थित जल बर्फ में परिवर्तित होने से एवं कोशिकाओं में उपस्थित जीव द्रव्य नष्ट होने से कोशिकायें मर जाती है फलस्वरूप पौधे झुलस जाते है। ऐसे ही अन्य उपाय कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा बताए जा रहे हैं।
कृषि वैज्ञानिक डॉ एनके सिंह ने बताया कि पाला इसी समय रबी फसलों में फूल व फलियां बनने प्रारंभ होता है, पौधों में यह अवस्थायें ही पाले के प्रति अतिसंवेदनशील होती है। शीतऋतु में जब दिन में विशेष ठंड हो, शाम को हवा चलना रूक जावे और रार्ति के दौरान आकाश साफ हो एवं आद्रता प्रतिशत कम हो तो उस रार्ति को पाला या तुसार पडने की सबसे अधिक संभावना रहती है। पाले से संवेदनशील फसलों की पत्तियां व फल मुरझा जाते है तथा झुलस कर बदरंग हो जाते है फलस्वरूप फसल की उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है। पाला से बचाव हेतु किसान भाई यह उपाए कर सकते है।
शाम के समय धुआँ:- खेत के आस-पास मेडों पर घासफूस एवं पत्तों को जलाकर धुआँ कर देने से खेत के आस-पास का तापक्रम गिर नहीं पाता तथा धुयें की चादर वायुमंडल में छा जाने से दबाव में कमी आ जाती है और फसलों पर पाले का प्रभाव नहीं पडता।
सिंचाई के द्वारा:- यदि पाला पडने की अशंका हो तो सिंचाई की सुविधा होने पर खेत में हल्की सिंचाई करें जिससे भूमि एवं वायुमंडल में नमी की मार्ता बढने से तापमान जबाव बिन्दु तक नहीं पहुंच पाता एवं फसलों पर पाले का असर नहीं होता।
गंधक अम्ल (सल्फर) के छिडकाव द्वारा:- यदि पाला पडने की अशंका हो तो फसलों पर 1 लीटर गंधक तनु अम्ल ?.1 प्रतिशत को 1०० लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करें इससे पौधों की कोशिकाओं में पाला को सहन करने की क्षमता बढ जाने से कोशिकाओं के अंदर पानी नहीं जमता है।
छाया करके:- नर्सरी में उगाये गये फल, सब्जी के छोटे पौधों को पाले से बचाव हेतु सूखी घास-फूस या गन्ने की पत्तियों आदि ढंके इससे भी पाले का बचाव किया जा सकता है।
अधिक जानकारी हेतु किसान भाई अपने क्षेर्त के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से सम्पर्क करें एवं कृषि विज्ञान केन्द्र सिवनी में भी सम्पर्क कर तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते है।

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