सैकड़ों साल से निभाई जा रही है ये परम्परा, देखें वीडियो

Sunil Vandewar

Publish: Aug, 27 2018 12:55:11 PM (IST)

Seoni, Madhya Pradesh, India

सिवनी. सनातन धर्म की मान्यता अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा के अवसर पर रविवार को भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का त्योहार रक्षाबंधन मनाया गया। इस बार शुभ मुहूर्त का समय सुबह से शाम तक होने के कारण बहनों ने जहां अपने घरों में भाइयों को राखी बांधी वहीं एक दूसरे से दूसरे स्थान जाकर दूसरी जगह रह रहे भाइयों की कलाई में राखी बांधी।

दीप जलाकर आरती उतारी और कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र
रक्षाबंधन को लेकर बसों, दुकानों व बाजार में सुबह से ही काफी भीड़ रही। इस दिन बहनों ने अपने भाई को तिलक लगाकर, दीप जलाकर आरती उतारी और दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा, वहीं भाई ने अपनी बहनों को उपहार दिए।
पूर्णिमा तिथि उदियाकाल से शुरू हुआ मुहुर्त
शनि मंदिर के पुजारी शिव प्रसाद मिश्रा ने बताया कि रक्षाबंधन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शहर समेत जिले भर में मनाया गया। भद्रा नहीं होने के साथ ही इस बार पूर्णिमा तिथि उदियाकाल में ही शुरू होने से सुबह से शाम तक राखी बांधने का दौर चलता रहा।
बंधन का है महत्व
पं. राघवेन्द्र शास्त्री ने बताया कि रक्षाबंधन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे तथा सोने या चांदी जैसी महंगी वस्तु तक की हो सकती है। राखी सामान्यत: बहनें भाई को ही बांधती हैं, परन्तु ब्राम्हणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित संबंधियों जैसे पुत्री द्वारा पिता को भी बांधी जाती है।

बहनें अपने भाई से लेती है रक्षा का संकल्प -

रक्षाबंधन का संबंध राजा बलि से स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है। जिस प्रकार रक्षासूत्र से मकान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से बांधकर बहनें अपने भाई से रक्षा का संकल्प लेती है। इसी परम्परा का निर्वाह करते हुए रक्षाबंधन का त्योहार मनाया गया।

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