स्कूल में पदस्थ दो शिक्षक, दोनों नदारद

Santosh Dubey

Updated: 11 Jul 2019, 12:24:04 PM (IST)

Seoni, Seoni, Madhya Pradesh, India

किंदरई (सिवनी). एक-एक दिन स्कूल जाकर शिक्षक बने शिक्षक ही जब अच्छा खासा वेतन पाकर देश के नौनिहालों के भविष्य को संवारने के लिए, उन्हें पढ़ाने के लिए स्कूल नहीं पहुंचे तब शिक्षक विहीन स्कूल में अध्ययनरत छात्रों का भविष्य कैसा होगा? यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकारी स्कूल में छात्रों की दर्ज संख्या बढ़े, इसके लिए सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैं। स्कूल में मध्यान्ह भोजन, नि:शुल्क साइकिल वितरण, नि:शुल्क किताबें आदि वितरण कर रही है लेकिन शहरी क्षेत्र के स्कूल हो या सुदूर अंचल क्षेत्र के स्कूल स्थिति ठीक नहीं है।
जनपद शिक्षा केंद्र घंसौर के अंतर्गत जन शिक्षा केंद्र किंदरई के शासकीय प्राथमिक शाला बुढऩा में सोमवार को डेली अपडाउन करने वाले स्कूल में पदस्थ दो शिक्षकों में से एक भी शिक्षक-शिक्षिका स्कूल नहीं पहुंची। स्कूल की चाबी जिन छात्रों को प्रतिदिन सौंप दी जाती है वे विद्यार्थी और अन्य विद्यार्थी सोमवार को निर्धारित समय पर पढ़ाई करने के लिए उत्साह से स्कूल पहुंचे। स्कूल पहुंचे लगभग 16 छात्र-छात्राओं ने यहां पदस्थ एक प्रधान पाठक शिक्षक और एक शिक्षिका के आने का काफी इंतजार किया। वहीं कुछ छात्र स्कूल परिसर में खेलते-कूदते रहे। कुछ गिट्टी, पत्थर एक दूसरे को फेककर खेलते नजर आए। सड़क किनारे बाऊण्ड्रीबॉल विहीन स्कूल में बच्चे तेजी से कभी सड़क की ओर तो कभी सड़क से स्कूल की ओर दौड़ते-भागते नजर आए। बच्चों को मध्यान्ह भोजन बनाने वाली महिला भी स्कूल पहुंची और बच्चों को भोजन बनाने में जुट गई। दोपहर का समय बीतने और स्कूल बंद होने तक उक्त स्कूल में न तो प्रधान पाठक स्कूल पहुंचे और न ही शिक्षिका।
छात्र ने सम्भाला मोर्चा, ली क्लास
दो कमरों में विद्यार्थी शिक्षक के पहुंचने और पढ़ाई होने की आस में काफी देर तक बैठे रहे। वहीं एक कमरे में कक्षा पांचवीं का छात्र राजकुमार ने स्कूल के बाहर खेलकूद कर रहे विद्यार्थियों को बुलाकर एक शिक्षिक की भूमिका अदा करते हुए हाथ में पुस्तक लेकर पढ़ाने जुट गया। जबकि दूसरे कक्ष के विद्यार्थी शिक्षिक-शिक्षिका के नहीं आने से मायूस बैठे रहे। वहीं राधा-कृष्ण स्व सहायता समूह की महिला रसोईया ने सभी बच्चों के लिए भोजन तैयार कर उन्हें मध्यान्ह भोजन भी समय पर कराया।
डेली अपडाउन से बिगड़ रही स्थिति
ग्रामवासियों व पालक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष मनसुख मसराम ने बताया कि घंसौर से ग्राम बुढऩा की दूर लगभग 22 किलोमीटर है। डेलीअपडाउन कर स्कूल पहुंचने के कारण अक्सर शिक्षक-शिक्षिकाएं विलम्ब से पहुंचते हैं। वहीं उन्होंने बताया कि यहां पदस्थ शिक्षिका के अक्सर समय पर स्कूल नहीं पहुंचने की शिकायत उन्होंने पूर्व में अधिकारियों से की थी लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ जिसका नतीजा यह है कि सुदूर ग्रामांचल क्षेत्र के अधिकांश स्कूलों में डेलीअपडाउन करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाएं या तो समय पर स्कूल नहीं पहुंचते या फिर पूरे दिन स्कूल नहीं पहुंचते हैं। इससे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई का स्तर भी गिर रहा है। जबकि अधिकांश शासकीय शिक्षक अपने बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाने भेजते हैं। जहां कम वेतन पाने वाले शिक्षक निजी स्कूल में बेहतर परीक्षा फल दे रहे हैं। ग्रामवासियों, अभिभावकों ने कलेक्टर से मांग की है कि डेलीअपडाउन करने वाले लापरवाह शिक्षक-शिक्षिकाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए।
इनका कहना है
मेरी रविवार से बहुत ज्यादा तबीयत खराब है। इसलिए सोमवार को स्कूल नहीं गया। स्कूल की शिक्षिका को फोन लगाया था लेकिन फोन नहीं लगा।
बखतलाल कुर्वेती, प्रधान पाठक
शास. प्राथमिक शाला बुढना

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