समय के महत्व को समझने से जीवन बनता है मूल्यवान

ब्रम्हाकुमारी संस्थान के समर कैम्प में खिले बच्चों के चेहरे

By: sunil vanderwar

Published: 18 May 2019, 12:00 PM IST

सिवनी. विद्यार्थी जीवन जिंदगी का सबसे सुनहरा समय होता है। इसलिए विद्यार्थी जीवन के एक-एक श्वांस का सदुपयोग अपने भविष्य को संवारने के लिए करना चाहिए। इससे ही जीवन को सफलता प्राप्त होगी। ऐसे प्रेरक उद्बोधन प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सिवनी द्वारा दिनांक 09 मई से 15 मई तक विद्यार्थियों के लिए आयोजित समर कैम्प के समापन अवसर पर वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका गीता दीदी ने विद्यार्थी जीवन सबसे उत्तम जीवन विषय पर व्यक्त किए।
उन्होंने आगे कहा कि समय बहुत मूल्यवान होता है। जो इसके महत्व को समझता है उसका जीवन मूल्यवान बन जाता है। इस दुनिया में जो भी महान पुरुष हुए हैं वह अपने समय के एक-एक मिनट का हिसाब रखते हैं। उन्होंने बच्चों को अपने समय का सही उपयोग करने के लिए प्रतिदिन की दिनचर्या बनाने का सुझाव दिया और कहा कि हमें हरेक कार्य का समय निश्चित कर लेना चाहिए ताकि हमें पता रहे कि कब पढऩा है, और कब खेलना तथा कितनी देर तक खेलना है। पढऩे के लिए सुबह का समय बहुत अच्छा होता है क्योंकि उस समय हमारा दिमाग पूरी तरह से ताजग़ी से भरा रहता है। इसलिए सुबह का पढ़ा हुआ विषय हमें अच्छी तरह से याद रहता है। इसके बाद सुबह के पढ़े हुए चेप्टर को सारे दिन में जब भी समय मिले दोहराने का अभ्यास करना चािहए। इस कैम्प में बच्चों को याद करने के सरल और सहज तरीके सिखलाए गए। साथ-साथ एकाग्रता बढ़ाने के लिए भिन्न-भिन्न गेम कराए गए। डायलॉग, संगीत, नृत्य के द्वारा बच्चों में दबी हुई कलाओं का विकास कैसे हो, आदि टिप्स बताए गए।
कार्यक्रम समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित रघुनंदन बघेल टेलीकॉम डिस्ट्रिक्ट इंजीनियर ने कहा कि आज डॉक्टर, इंजीनियर बनना आम बात है, लेकिन हमें एक आदर्श डॉक्टर, इंजीनियर बननें का लक्ष्य रखना चाहिए। हम अध्ययन अपनी चहुमुखी विकास के लिए करे। वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका रामेश्वरी दीदी ने कहा कि बच्चों को सिखाने का सबसे ज्यादा उत्तरदायित्व मां का होता है। वह बच्चों के संस्कारों को अच्छी तरह पहचानती है। बच्चे किस मैनर्स के साथ क्या बोले, बच्चों का व्यवहार दूसरों के प्रति कैसा हो, ंआदि संस्कार एक मां ही सिखला सकती है। उपस्थित अभिभावकों की तरफ इशारा करते हुए आपने कहा कि माता-पिता जो करते है वही बच्चे सीखते हैं। इसलिए हरेक माता-पिता को आध्यात्मिकता और भौतिकता में बैलेंस बनाने की कला आनी चाहिए। जिला संस्थान प्रभारी राजयोगिनी ज्योति दीदी ने कहा कि इस सप्त दिवसीय समर कैम्प में बच्चों ने जो कुछ सीखा है उसे सालभर जीवन में उतारना भी है। बच्चों का जीवन गीली मिट्टी के समान होता है, जिसे संवारने का काम स्वयं की शिक्षिका के रुप में उनके माता-पिता का होता हैं। प्रत्येक माता-पिता को बच्चों में बौद्धिक विकास के साथ चहुमुखी विकास के बारे में सोचना चाहिए। माता-पिता यह न सोचें कि बच्चे यदि आध्यात्मिकता से जुड़ जाएंगे तो वह चहुमुखी विकास नही कर पाएंगे, यह सोचना गलत है। आध्यात्मिकता को बचपन से अपनाने से ही बच्चों का चहुमुखी विकास हो पाएगा। आध्यात्मिकता से जुडऩे से संस्कारवान बनते है, ना कि साधू सन्यासी। अंत में विभिन्न प्रतियोगिता में सफल हुए बच्चों को पुरुस्कार वितरण किया गया एवं कैम्प में सम्मिलित सभी बच्चों को संस्थान की ओर से प्रमाण-पत्र वितरित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पेर सिंह बघेल ने की।

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