आदेश के बाद भी तबादले के लिए करना पड़ेगा इंतजार

आदेश के बाद भी तबादले के लिए करना पड़ेगा इंतजार

Sunil Vandewar | Updated: 21 Apr 2018, 11:27:19 AM (IST) Seoni, Madhya Pradesh, India

अध्यापक संवर्ग के संविलियन आदेश पर आयुक्त ने लगाई रोक

सिवनी. जिले के जिन वरिष्ठ अध्यापक, अध्यापक और सहायक अध्यापकों ने वर्षों से अपने गृह जिलों को जाने का मन बनाए बैठे थे और इस वर्ष उनको संविलियन के आदेश मिले थे। उनको अब कार्यमुक्त होने के लिए इंतजार करना पड़ेगा। आगामी आदेश तक उन्हें उन्हीं स्कूलों में सेवाएं देनी है, जहां वे वर्षों से सेवाए दे रहे हैं। भोपाल से जारी इस आदेश के बाद अध्यापकों व संगठनों ने इस पर नाराजगी जाहिर की है। राज्य अध्यापक संघ, आजाद अध्यापक संघ के जिला अध्यक्षों ने नाराजगी जाहिर कर गुस्सा जाहिर किया।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष जिले से ७० अध्यापकों को संविलियन के तहत अन्य जिलों में जाने के आदेश हो चुके थे, जबकि ११६ ने अन्य जिलों से सिवनी आने की अनुमति ली थी।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अनुसार पारस्परिक संविलियन के ७ प्रकरण के आदेश हुए थे, जबकि अंतर्निकाय के ११६ अध्यापक संवर्ग के आदेश पर रोक लगाई गई है। सरकार द्वारा पहली बार अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों के लिए लाई गई ट्रांसफर पॉलिसी के तहत जिले के सभी ब्लॉक से शिक्षकों ने ट्रांसफर के लिए आवेदन किए हैं। करीब एक साल तक चली तबादला प्रक्रिया के बाद इस शिक्षण सत्र में शिक्षकों को डीईओ कार्यालय पहुंचकर ट्रांसफर हुए जिले के लिए वर्तमान जिले से कार्यमुक्त होने की प्रक्रिया शुरु करना था। लेकिन अचानक आयुक्त नीरज दुबे के आदेशों ने इस प्रक्रिया पर विराम लगा दिया। आयुक्त के आदेश के बाद शिक्षकों में नाराजगी है।
आयुक्त नीरज दुबे ने जारी आदेश में कहा है कि अध्यापक संवर्ग के एक जिले से दूसरे जिले के लिए की गई ट्रांसफर प्रक्रिया के सम्बंध आयुक्त जनजातीय कार्य विकास मप्र ने १२ अपै्रल को एक आदेश जारी कर कहा है कि शिक्षकों की कमी से आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित शालाओं के शिक्षकों को कार्यमुक्त नहीं करने के आदेश जारी किए गए हैं। इसी आदेश के कारण आयुक्त ने आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित शालाओं से ट्रांसफर हुए शिक्षकों के अलावा अन्य शिक्षकों के ट्रांसफर के बाद उनके कार्यमुक्त होने के आदेश पर रोक लगा दी है।
इस आदेश से जिले के करीब एक हजार अध्यापक प्रभावित हो रहे हैं। इन शिक्षकों के साथ ही इनके परिजन पर भी इस आदेश का प्रभाव साफ तौर पर नजर आ रहा है। साथ ही इसका असर वर्ग दो व तीन के अध्यापकों के ट्रांसफर पर भी पड़ेगा।
शिक्षक संघों ने आदेश पर जताई आपत्ति -
इस मामले में अध्यापक, शिक्षक संघों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा है कि आदिवासी विकास विभाग के तहत आने वाली शालाओं को छोडक़र शेष शालाओं के शिक्षकों को रिलीव करना चाहिए। अध्यापक वर्षों से परिवार से दूर हैं। ऐसे में अब उन्हें परिवार के साथ रहने का मौका देना चाहिए।
आयुक्त ने जारी किया निर्देश -
आयुक्त द्वारा पत्र में कहा गया है कि अध्यापक संवर्ग (वरिष्ठ अध्यापक, अध्यापक एवं सहायक अध्यापक) में कार्यरत कर्मचारी स्थानीय निकाय के अधीन एवं नियंत्रण में हैं। ये कर्मचारी स्कूल शिक्षा विभाग एवं आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थाओं में पदस्थ है। मप्र शासन स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश दिनांक १० जून २०१७ के अंतर्गत अध्यापक संवर्ग में कार्यरत व्यक्तियों द्वारा चाहे जाने पर अंतर्निकाय संविलियन के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे इस पर स्कूल शिक्षा एवं आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित शैक्षणिक संस्थाओं में पदस्थ अध्यापक संवर्ग द्वारा अंतर्निकाय संविलियन के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए थे। अध्यापक संवर्ग को उनके विकल्प के आधार पर पात्रता अनुसार ऑनलाइन शालाओं का आवंटन हुआ था। लेकिन अब अध्यापकों की कमी को देखते हुए इस पर जारी अनुमति के सभी प्रकरणों में आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है। इस संदर्भ में किसी भी अध्यापक संवर्ग को वर्तमान में कार्यरत स्थान से भारमुक्त नहीं किया जाएगा।
नहीं किया जाएगा कार्यमुक्त -
एसपी लाल, जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि अध्यापर्क संवर्ग को कार्यमुक्त न किए जाने आयुक्त से पत्र प्राप्त हुआ है। इस पर सभी सम्बंधित को अवगत कराकर आगामी आदेश तक पूर्व की तरह कार्य करने को कहा गया है।
आयुक्तों की खींचतान, हो कार्रवाई -
विपनेश जैन, जिला अध्यक्ष, राज्य अध्यापक संघ ने कहा कि अध्यापक संवर्ग के तबादले के लिए शासन ने ऑनलाइन आवेदन लिया था, इसके बाद आदेश भी जारी हुए और अब शिक्षा व आदिवासी विकास के दोनों आयुक्त की खींचतान के कारण अध्यापकों का तबादला रुका हैं। सीएम के आदेश की वादाखिलाफी है, ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
करेंगे शिक्षा मंत्री का घेराव -
कपिल बघेल, जिला अध्यक्ष, आजाद अध्यापक संघ ने कहा कि अध्यापकों को कार्यमुक्त करने के आदेश पर रोक लगाया जाना शासन की दोहरी नीति है। इसके विरोध में २४ अपै्रल को भोपाल में शिक्षा मंत्री के निवास का घेराव किया जाएगा। इसका विरोध जारी रहेगा।

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