क्यों चुप थे पीजी कॉलेज प्राचार्य और समिति, पढि़ए पूरी खबर

Sunil Vandewar

Publish: Feb, 14 2019 12:31:26 PM (IST) | Updated: Feb, 14 2019 12:31:27 PM (IST)

Seoni, Seoni, Madhya Pradesh, India

सिवनी. शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (पीजी कॉलेज) सिवनी में साल २०१५ में पुरानी बिल्डिंग के ऊपर करीब ८० लाख की लागत से १४ कक्षों की नई बिल्डिंग बनाई गई थी। बिल्डिंग के एक उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी होने (हेंडओवर) के डेढ़ साल बाद जब सहायक प्राध्यापक की जागरुकता से मामला उठा तो उच्च शिक्षा विभाग के अमले से लेकर कार्यएजेंसी तक हड़कम्प मच गया। पीडब्ल्यूडी विभाग ने सम्बंधित ठेकेदार को तलब किया और अब अधूरी बिल्डिंग के बकाया सारे काम किए जा रहे हैं।
पीजी कॉलेज में कुछ ही महीने पहले आए राजनीति शास्त्र विषय के सहायक प्राध्यापक एसके बाटड से पत्रिका ने मुलाकात कर उनके द्वारा उठाए गए मामलों पर चर्चा की। उन्होंने महाविद्यालय में वर्षों से चल रही व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, हालांकि कहा कि पहले चाहे जो भी हुआ हो लेकिन अब विभाग और स्टॉफ को विद्यार्थियों के हितार्थ और कर्तव्य का पालन कराने उनसे जो भी बन पड़ेगा वे करेंगे।
सीएम हेल्पलाइन से उठाया मामला -
सहायक प्राध्यापक ने बताया कि सीएम हेल्पलाइन हो या आरटीआई इस कानून का प्रयोग कोई भी नागरिक कर सकता है। इसलिए उन्होंने भी सीएम हेल्पलाइन पर कॉलेज भवन निर्माण का मामला उठाया था। शिकायत के विवरण में बताया कि पीजी कॉलेज सिवनी में पीडब्ल्यूडी विभाग के द्वारा वर्ष २०१५ में १४ कमरों का निर्माण किया गया था। जिसमें उनके द्वारा कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। जिससे समस्या हो रही है। विभाग के कार्यपालन यंत्री द्वारा अवगत कराया गया कि पीजी कॉलेज में निर्मित कक्षों में किन्हीं कारणों से कार्य अधूरा है। कार्य पूर्ण कराने के लिए अनुविभागीय अधिकारी उपसंभाग क्रमांक-२ सिवनी को सम्बंधित ठेकेदार से कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए।
ये अधूरे काम, अब हो रहे पूरे -
पीजी कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग के ऊपर निर्मित किए गए नए १४ कक्षों के अधूरे कार्यों का जिक्र करते हुए सहायक प्राध्यापक ने बताया कि जब वे इस कॉलेज में आए तो उन्होंने देखा कि नई बिल्डिंग में कई जरूरी काम बाकी हैं और बिल्डिंग हेंडओवर हो गई। बताया कि यहां की ६० खिड़कियों पर १२० कांच नहीं लगे थे। छत से जमीन तक पानी निकासी के पाइप नहीं लगे थे, दो छतों के बीच जोड़ नहीं मिलाया गया था। दीवारों पर सीलन आ रही थी। यानि शासन ने भुगतान तो पूरा किया था, लेकिन विद्यार्थियों के हित में काम उपयुक्त नहीं हुए थे। इसलिए उन्होंने इस सम्बंध में अपने प्राचार्य एसके चिले व स्टॉफ से चर्चा की और विद्यार्थियों के हितार्थ प्रयास आरंभ किए। जिसका ही परिणाम है कि अब ठेकेदार ने बिल्डिंग हेंडओवर होने के डेढ़ साल बाद खिड़कियों पर कांच लगवाई जा रही है। पाइप बिछाया जा रहा है। पुताई कराई जा रही है। दीवारों के जोड़ मिलाने और दूसरे बाकी काम पूरे कराए जा रहे हैं।
इन कामों की भी हुई शुरुआत -
कॉलेज परिसर में कक्षों के बीच स्थित दो गार्डन वर्षों से झाड़ी, टूटे फर्नीचर, कबाड़ से भरे हुए थे। इसी तरह लाइब्रेरी में आने वाले विद्यार्थियों के लिए बैठक व्यवस्था नहीं थी। छात्राओं के कॉमन रूम में सुविधाएं नहीं थी। तब सहायक प्राध्यापक ने प्राचार्य एसके चिले, स्टॉफ के सदस्य मानकचंद सनोडिया व अन्य से चर्चा की ओर कार्य के लिए विभिन्न मदों की राशि का प्रयोग कर गार्डन को व्यवस्थित कराया, अब पौधे लगवाए जा रहे हैं। लाइब्रेरी और कॉमन रूम में ४० कुर्सियां, टेबिल लगवाए गए हैं। खुली जगह पर शेड लगवाया जा रहा है। पीने के पानी की व्यवस्था दुरुस्त की गई है। इसके अलावा कई और काम हो रहे हैं।
बाकी थे कुछ काम -
ऊपरी बिल्डिंग का पीडब्ल्यूडी से एक उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी हो चुका है, एक शेष रह गया था। भवन में कुछ काम बाकी थे, विभाग और ठेकेदार के बीच समस्या थी, इसलिए कार्य में विलंब हुआ। अब ठेकेदार द्वारा काम पूरा कराया जा रहा है।
एनपी राहंगडाले -संयोजक, जनभागीदारी समिति पीजी कॉलेज सिवनी

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