संतान की सलामती के लिए महिलाओं ने रखा व्रत, किया पूजन

Sunil Vandewar

Publish: Sep, 01 2018 04:57:33 PM (IST)

Seoni, Madhya Pradesh, India

सिवनी. हरछट (हलषष्ठी) का त्योहार शनिवार को सनातन धर्मावलंबी महिलाओं ने श्रद्धा-भक्ति से मनाया। यह त्यौहार भादों कृष्ण पक्ष की छठ को मनाया जाता है। इसी दिन श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। मान्यता है कि यह व्रत पुत्रवती महिलाएं करती हैं। इसके लिए शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में हरे पत्तों की हलछट बनाई जाती है। पर्व पर उपयोग की जाने वाली पूजन तथा व्रत से संबंधित सामग्री की खरीदारी महिलाओं ने की।
भैरोगंज निवासी पं. शिव प्रसाद मिश्रा ने बताया कि हलछट पर्व में पेड़ों के फल बिना बोया अनाज पसाई के चावल आदि खाने का विधान है। केवल पडिय़ा (भैंस का बच्चा) वाली भैंस का दूध का सेवन किया जाता है। यह पूजन सभी पुत्रवती महिलाएं करती हैं। यह व्रत पुत्रों की दीर्घ आयु और उनकी सम्पन्नता के लिए किया जाता है। इस व्रत में महिलाएं प्रति पुत्र के हिसाब से छह छोटे मिट्टी या चीनी के बर्तनों में पांच या सात भुने हुए अनाज या मेवा भरती हैं। जारी की एक शाखा, पलाश की एक शाखा और नारी (एक प्रकार की लता) की एक शाखा को भूमि या किसी मिट्टी भरे गमले में गाड़ कर पूजन किया जाता है। महिलाएं पडिय़ा वाली भैस के दूध से बने दही और महुवा (सूखे फूल) को पलाश के पत्ते पर खाकर व्रत का समापन करती हैं।

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