आईसीयू में रहकर 345 गंभीर मरीजों ने कोरोना को हराया

व्यवस्थाओं में निरंतर किया जा रहा सुधार

By: amaresh singh

Published: 05 Oct 2020, 12:14 PM IST

शहडोल. कोरोना काल में मेडिकल कॉलेज शहडोल में 4 अक्टूबर तक 1 हजार 273 मरीजों को भर्ती कराया गया। जिसमें 998 कोरोना पॉजिटिव मरीज शामिल है। मेडिकल कॉलेज शहडोल में आज की स्थिति में कुल 113 मरीज भर्ती है। जिसमें से 93 मरीज कोरोना पॉजिटिव है तथा 20 संदिग्ध मरीज है। डीन मेडिकल कॉलेज शहडोल डॉ. मिलिंद शिरालकर ने बताया के मेडिकल कॉलेज शहडोल द्वारा दिए गये बेहतर एवं गहन चिकित्सा उपचार से 345 कोरोना पॉजिटिव मरीजो का उपचार कर उन्हें पूरी तरह स्वस्थ किया गया है। इसी प्रकार 244 कोरोना संदिग्ध मरीजो का भी गहन उपचार कर उन्हें पूरीी तरह स्वस्थ्य कर उन्हें डिस्चार्ज किया जा चुका है। संभाग में 516 कोरोना पॉजिटिव मरीजो को होम आईसोलेशन में उपचार मुहैया कराकर कोरोना संक्रमण से मुक्त किया गया है। कोरोना काल में मेडिकल कॉलेज शहडोल में 60 वर्ष से अधिक आयु के कोरोना पॉजिटिव मरीज का उपचार किया गया। वहीं कोरोना संक्रमण के बीच दो वर्ष के कोरोना पॉजिटिव बच्चे का भी सफलतम उपचार किया गया।


व्यवस्थाओं को बेहतर कर मरीजों का इलाज
उल्लेखनीय है कि कमिश्नर नरेश पाल व कलेक्टर डॉ सतेन्द्र सिंह की मॉनिटरिंग में मेडिकल कॉलेज शहडोल की व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार किया जा रहा है। कमिश्नर द्वारा मेडिकल कॉलेज शहडोल में प्रशासनिक अधिकारियों एवं चिकित्सा अधिकारियों की समय-समय पर बैठके ली गई तथा मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को सुधार कर मरीजो को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश दिए गए।ऑक्सीजन सिंलेण्डरों की सतत उपलब्धता के लिये निरंतर प्रयास किये गए। भोजन व्यवस्था में सुधार किया गया और बेड्स, एम्बुलेंस, जनरेटर की भी व्यवस्था की गई। कोरोना संक्रमण टेंिस्टंग की सुविधा का विस्तार किया गया है जिसके परिणाम स्वरूप मेडिकल कॉलेज शहडोल में लगभग 600 कोरोना मरीजो की प्रतिदिन टेंिस्टंग करने की सुविधा में इजाफा हुआ है।


डॉक्टरों और पैरामेडिकल को दी ट्रेनिंग
कमिश्नर द्वारा मेडिकल कॉलेज शहडोल में सुविधाओ के विस्तार और अन्य कार्यों के लिए शासन को आवंटन मुहैया कराने पत्र लिखा गया तथा प्राप्त आवंटन का उपयोग सुविधाओं के विस्तार के लिए किया जा रहा है। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को क्षमता वृद्धि के लिए कई प्रशिक्षण दिए गए है। जिसके परिणाम स्वरूप पैरामेडिकल स्टाफ एंव डाक्टरों की क्षमता का विकास हुआ। इसी प्रकार पैरी-फैरी में पदस्थ डाक्टर्स को भी प्रशिक्षण दिया गया है।

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