घर-घर हेल्थ टीम ने दी दस्तक तो 40 दिन में बीमारियों की चपेट में मिले 35 सौ मासूम

घर-घर हेल्थ टीम ने दी दस्तक तो 40 दिन में बीमारियों की चपेट में मिले 35 सौ मासूम

Amaresh Singh | Publish: Jul, 20 2019 01:44:01 PM (IST) Shahdol, Shahdol, Madhya Pradesh, India

कहीं डायरिया तो कहीं कुपोषण और एनीमिया का दंश, अस्पताल में भी कराया भर्ती

शहडोल। जिले के आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य विभाग की टीम अभियान दस्तक के तहत घर-घर पहुंची तो तीन हजार से ज्यादा बच्चे गंभीर बीमारियों की चपेट में पाए गए। कोई अतिकुपोषण और एनीमिया की चपेट में था तो कोई डायरिया से जूझ रहा था। इस दौरान 35 सौ बच्चे ऐसे पाए गए जो कई गंभीर बीमारियों से पीडि़त थे। साढ़े तीन हजार से ज्यादा बच्चों को दस्तक टीम ने चिहिंत किया है। दरअसल जिले में 10 जून से 20 जुलाई तक दस्तक अभियान का पहला चरण पूरा किया जा रहा है। इस दौरान गांव- गांव डायरिया, निमोनिया, खून की कमी, कुपोषण, स्तनपान के फायदे सहित हेल्थ से जुड़ी कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। साथ ही एक लाख से ज्यादा बच्चों का हेल्थ चेकअप का भी लक्ष् य है। सीएमएचओ डॉ राजेश पांडेय व डीपीएम मनोज द्विवेदी के अनुसार, 19 जुलाई तक जिले में 0 से 5 साल तक के चिन्हित 1 लाख 12 हजार 298 बच्चों और चिन्हित 957 गांवों में अभियान चलाकर 925 गांवों के 90 हजार 246 बच्चों का हेल्थ चेकअप किया है।


80 फीसदी से ज्यादा कुपोषित बच्चे
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो अधिकांश बच्चे आदिवासी परिवार के मिले हैं। जिसमें डायरिया, अतिकुपोषण और अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित मिले हैं। कई आदिवासी बच्चे ऐसे भी मिले हैं, जिन्हे जन्मजात विकृतियां हैं। हालांकि हेल्थ टीम ने चिहिंत करते हुए ऐसे बच्चों को तत्काल भर्ती कराया है।


कठौतिया में हेल्थ चेकअप, 300 मरीजों की जांच
कठौतिया में शुक्रवार को ग्राम सभा का आयोजित की गई। सीएमएचओ डॉ राजेश पाण्डेय द्वारा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर 300 मरीजों का हेल्थ चेकअप करोया। यहां मरीजो को दवाईयॉ दी गई एवं दस्तक अभियान के बार में बताया। ग्राम सभा में डीईओ डॉ अंशुमान सोनारे, बीएमओ डॉ एसडी कंवर मौजूद थे। यहां महिलाओं के अलावा बुजुर्गो को बच्चों को न दागने की सलाह दी।
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पत्रिका व्यू : अब तक कहां था मैदानी अमला
पिछले 40 दिन के भीतर 35 सौ से ज्यादा बच्चे गंभीर बीमारियों की चपेट में मिले हैं। आदिवासी अंचलों से मैदानी अमले की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। विडंबना की बात तो यह है कि जब हेल्थ टीम पहुंची तो 35 सौ से ज्यादा बच्चे गंभीर बीमारियों की चपेट में मिले। स्वास्थ्य विभाग के बड़े अफसरों की अनदेखी और मैदानी अमले की लापरवाही से पहले भी कई बच्चों की दगना और कुपोषण से मौत भी हो चुकी है।


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डायरिया और कुपोषण का दंश
डायरिया -3420
ब्लड ट्रासमिशन -18
अतिकुपोषित बच्चे -62
जन्मजात विकृतियां -17
सेप्सिस -76
गांवों में सर्वे - 925
बच्चों की जांच - 90 हजार

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