एमपी के इस जिले के 59 गांव खतरनाक बीमारी के हाईरिस्क जोन में

अब तक 73 मरीजों की हो चुकी है पहचान, सरकारी अमला अभी भी बेपरवाह

By: shivmangal singh

Published: 24 Jul 2018, 01:08 PM IST

शहडोल. मध्यप्रदेश के इस जिले के 59 गांव इस खतरनाक बीमारी के हाईरिस्क जोन में हैं। यहां हर रोज मरीज मिल रहे हैं, इनमें से भी कई तो ऐसे हैं तो बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच गए हैं। इनके इलाज और गांवों में बीमारी फैलने से रोकने के लिए सरकारी अमला हाथ-पैर तो मार रहा है लेकिन वह नाकाफी है। जिले में बरसात में प्रत्येक वर्ष स्थिति काफी खतरनाक हो जाती है, उसके बाद भी लापरवाही बरती जाती है।
बदलते मौसम के बीच वायरल के बाद अब मलेरिया तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। बारिश के चलते घर और बस्तियों में एकत्रित पानी में डेंगू और मच्छरों का लार्वा पनप रहा है। खतरनाक लार्वा के चलते मच्छरों से लोग मलेरिया की चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम के सर्वे में भी लार्वा पनपने का खुलासा हुआ है।
मलेरिया की चपेट में आने से हर दिन मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। हाल ही में जिले में ऐसे ७३ मरीज चिह्नित किए गए हैं जो मलेरिया की चपेट में आ गए हैं। दो दर्जन से ज्यादा मरीज ऐसे हैं, जिन्हें अतिगंभीर मलेरिया है। मलेरिया के लगातार पैर पसारने के बाद प्रथम चरण में दवाइयों का छिड़काव भी शुरू कर दिया है। पांचों ब्लॉकों में छिड़काव का काम शुरू है और ३१ जुलाई तक चलेगा। इसमें कई हाईरिस्क गांव भी शामिल हैं, जहां मलेरिया के कई केस हर साल मिलते हैं।
लगातार मलेरिया के प्रकोप के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में मलेरिया की नि:शुल्क जांच और इलाज की व्यवस्था की है। मलेरिया विभाग के दो कर्मचारियों को तैनात किया गया है। संभावित मरीजों के खून की जांच की जा रही है। जांच में मलेरिया मिलने पर नि:शुल्क इलाज और दवाइयां दी जा रही हैं।

बुढ़ार में सबसे ज्यादा अतिगंभीर
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक मलेरिया पीडि़त ७३ मरीज मिले हैं। इसमें अर्बन एरिया में मलेरिया के दो मरीज मिले हैं। इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में ७१ मरीज मलेरिया पीडि़त चिह्नित किए गए हंै। इसमें २१ मरीज ऐसे हैं, जो अतिगंभीर मलेरिया से पीडि़त हैं। अधिकारियों की मानें तो सबसे ज्यादा अतिगंभीर मलेरिया के मरीज बुढ़ार के झींकबिजुरी एरिया के मिले हैं, जिन्हें निगरानी में रखकर इलाज किया जा रहा है।

बरतें ये सावधानियां
1. पुराने टायर, खुली टंकियों सहित कूलर में जमा पानी में डेंगू और मच्छर पनपने है। इन स्थानों में पानी जमा नही होने देना चाहिए।
2. मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए साथ ही टीमोफॉस और मिट्टी तेल का छिड़काव करना चाहिए।
3. सर्दी कंपन के साथ तेज बुखार मलेरिया के लक्षण है। मलेरिया के लक्षण सामने आते ही खून जांच कराकर पूरा उपचार कराना चाहिए।
4. शाम के समय घरों में नीम का धुआं करना चाहिए और मच्छरों से बचना चाहिए।
12 लाख की आबादी, 59 हाईरिस्क गांव
जिले की 12 लाख की आबादी में 59 गांवों को मलेरिया पीडि़त गांवों में शामिल किया गया है। हाईरिस्क की श्रेणी में पिछल तीन साल के मलेरिया के आंकड़ों के आधार पर शामिल किया जाता है। इन गांवों में विशेष छिड़काव किया जाएगा।

कहां कितने गांव हाईरिस्क में
सिंहपुर, 02 , बुढ़ार 17, गोहपारू 16, जयसिंहनगर 10, ब्यौहारी 14

फैक्ट फाइल
मलेरिया स्लाइड लक्ष्य-1 लाख 58 हजार 254, अब तक लक्ष्य पूर्ति- 45 हजार 101, मलेरिया के मरीज-52, अतिगंभीर मलेरिया-21, छिडकाव के लिए गांव-59।

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