कोरोना को मात देने 700 हाईरिस्क मरीजों ने लगवाई वैक्सीन

45 से 59 साल के बीमार लोग भी आगे आकर लगवा रहे हैं टीका

By: amaresh singh

Updated: 15 Mar 2021, 12:11 PM IST

शहडोल. कोरोना संक्रमण एक बार फिर बढऩे लगा है। लौटते कोरोना के बीच संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा हाइरिस्क मरीजों के लिए है। शुगर, बीपी और हदय रोग से जुड़े मरीजों को कोरोना का ज्यादा खतरा है। वैक्सीनेशन के बीच 45 से 59 साल के लोगों को भी कोरोना टीका लगाया जा रहा है। इसमें ऐसे लोगों को टीका लगाया जा रहा है जो किसी बीमारी से ग्रसित हो तथा डॉक्टर का प्रमाण पत्र लेकर स्थल पर आ रहे हैं। अलग-अलग केन्द्रों पर बुजुर्गो का कोरोना टीका लगाया जा रहा है। इसमें अभी तक में 40 हजार बुजुर्गो को कोरोना टीका लगाया जा चुका है। इसके साथ ही 45 से 59 साल के बीमार लोग भी काफी संख्या में कोरोना टीका लगवाने पहुंच रहे हैं।


पंजीकृत चिकित्सा अधिकारी का प्रमाण पत्र
जिले में दस केन्द्रों पर 45 से 59 साल के लोगों को भी कोरोना टीका लगाया जा रहा है। इसके लिए उन्हें किसी पंजीकृत चिकित्सा अधिकारी का प्रमाण पत्र देना पड़ रहा है। इसमें डॉक्टर अपने रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ लिखकर देते हैं कि व्यक्ति को कब से बीमारी है। इसमें अभी तक में सभी केन्द्रों पर 700 से ज्यादा लोगों ने कोरोना टीका का पहला डोज लगवाया है। धीरे-धीरे काफी संख्या में बीमार लोग कोरोना टीका लगवाने पहुंच रहे हैं लेकिन बढ़ते केस के बीच अब वैक्सीनेशन बढऩे लगा है। आज से अलग-अलग क्षेत्रों में मतदान केन्द्रों में भी यह व्यवस्था शुरू कर दी गई है। गांवों में अब मतदान केन्द्रों में कोरोना की वैक्सीन लगेगी।
इन बीमारियों में लगेगा टीका
45 वर्ष एवं 59 वर्ष के उन व्यक्तियों को कोरोना टीका लगाया जाएगा, जो बीमारियों से घिरे हैं। इसमें हृदय संबंधी रोग मरीज जिसका एक साल से इलाज चल रहा है को शामिल किया है। हृदय प्रत्यारोण या पेसमेकर लगाया गया हो। हृदय वाल्व संबंधी गंभीर या मध्यम विकार। जन्मजात हृदय रोग के साथ पल्मोनरी आर्टरी उच्च रक्तचाप। दिल की नसों की बीमारी, वायपास, दिल का दौरा, शुगर की बीमारी। ब्लडप्रेशर एवं शुगर रोगी। सीटी, एमआरआई परीक्षण में ब्रेन स्ट्रोक जो उच्च रक्तचाप एवं शुगर का उपचार ले रहे हो। पल्मोनरी आर्टरी हायपरटेंशन के साथ बीपी एवं शुगर। 10 वर्ष से शुगर एवं बीपी का उपचार ले रहे हो। किडनी, लीवर, स्टेमसेल प्रत्यारोपित अथवा प्रतीक्षारत व्यक्ति। डायलिसिस एवं किडनी के गंभीर रोगी। लंबे समय से ओरल कार्टिको स्टेरायड, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कम करने वाली दवाई ले रहो हो। गंभीर लीवर सिरोसिसि रोगी। गंभीर श्वसन तंत्र रोगी जिन्हें दो वर्षो में भर्ती किया गया हो। लिम्फोर्मा, ल्यूकीमिया एवं मायलोमा के रोगी। कैंसर की गठान थाव 1 जुलाई 2020 के बाद कैंसर का उपचार ले रहे हो। प्रारंभिक अवस्था के रोगी जिनको रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी, एचआईवी संक्रमित हो। दिव्यांग व्यक्ति जिन्हें सहायता की जरूरत हो।
मांसपेशियों की अशक्ता, मूक वधिर, एसिड अटैक पीडि़त जिनमें श्वसन तंत्र प्रभावित हो मरीजों को वैक्सीन लगा सकते हैं।

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