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दागना से निपटने एक्शन प्लान तैयार, बैगा पंडा ओझा की मदद से दाइयों की कराएंगे काउंसलिंग

locationशाहडोलPublished: Nov 25, 2023 12:18:26 pm

Submitted by:

shubham singh

टास्क फोर्स की बैठक में अधिकारियों को दी जिम्मेदारी

दागना से निपटने एक्शन प्लान तैयार, बैगा पंडा ओझा की मदद से दाइयों की कराएंगे काउंसलिंग
दागना से निपटने एक्शन प्लान तैयार, बैगा पंडा ओझा की मदद से दाइयों की कराएंगे काउंसलिंग

शहडोल. आदिवासी इलाकों में अंधविश्वास के फेर में बच्चों को दागने की कुप्रथा के खिलाफ कलेक्ट्रेट परिसर के विराट सभागार में दो घंटे तक अधिकारियों के बीच मंथन चला। जिला टास्क फोर्स समिति की बैठक कलेक्टर कार्यालय के विराट सभागार में शुक्रवार को आयोजित की गई। बैठक में महिला एवं बाल विकास अधिकारी मनोज लारोकर ने अलग-अलग विभागों के लिए तय जिम्मेदारी के साथ एजेंडा रखा। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत राजेश जैन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दगना कुप्रथा को रोकने के लिए स्कूली छात्र-छात्राओं, स्व-सहायता समूह की महिलाओं का सहयोग लिया जाए एवं दगना कुप्रथा रोकने के संबंध में पम्पलेट निमोनिया थीम बनाएं व गांव-गांव मुनादी कराई जाए। उन्होंने कहा कि 0 से 7 वर्ष के बच्चों को चिन्हित करें और ग्रामीण स्तर पर गर्भवती महिलाओं व धात्री महिलाओं की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा कार्यकर्ता निरंतर निगरानी रखें। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने कहा कि आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए गृह भेंट के दौरान बच्चों को नहीं दागे जाने की समझाइश दें। बच्चों को सर्दी, जुकाम, ठंड लगने या पेट फूलने की स्थिति में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र मेें ले जाकर इलाज कराने की समझाइश दें। उन्होंने कहा कि मैदानी अधिकारी गांव-गांव भ्रमण कर लोगों (दाइयों) को दगना कुप्रथा रोकने के संबंध में समझाइश दें व बताएं कि बच्चों को दागने पर सख्त कार्रवाई करे। बैठक में एएसपी अंजूलता पटले, सीएमएचओ डॉ. आरएस पाण्डेय, डीपीओ मनोज लारोकर, मेडिकल कॉलेज अधीक्षक डॉ नागेन्द्र सिंह, डॉ निशांत प्रभाकर, डॉ सुनील हथगेल, आनंद अग्रवाल सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
अपने मुखिया की बात मानते हैं, गांव गांव उनकी मदद लें
बैठक में एएसपी अंजूलता पटले व टास्क फोर्स कमेटी के समन्यक ने सुझाव दिया कि आदिवासी समुदाय अपने मुखिया की बात ज्यादा सुनता है। इनकी काउंसलिंग कर मदद ले सकते हैं।
जिनकी उम्र 8-10 माह, उनका रिकार्ड लाएं
सीइओ राजेश जैन ने बैठक में कहा कि अक्टूबर से जनवरी तक का समय महत्वपूर्ण है। इस बीच निमोनिया होने पर दागना के केस ज्यादा आते हैं। ऐसे बच्चों की सूची चिन्हित करें जिनकी उम्र अभी 8 से 10 माह है, उन पर नजर रखें। इसके अलावा दाइयों की सूची बनाकर गांव पहुंचकर काउंसलिंग करें।

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