सीएम की नाराजगी के बाद मिला चार माह का अनाज

जिले में खाद्यान्न वितरण में गड़बड़ी, पांच माह की जगह बांटा सिर्फ चार माह का अनाज, पहले नहीं की मॉनिटरिंग, सीएम ने जताई नाराजगी तो जमुई गांव में 130 घरों का किया सर्वे।

By: Hitendra Sharma

Published: 03 Jul 2021, 10:55 AM IST

शहडोल. जिले में खाद्यान्न वितरण मामले में गड़बड़ी को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी के बाद अब अधिकारियों की नींद टूटी है। मुख्यमंत्री के जांच के निर्देश के बाद शुक्रवार की सुबह से अधिकारियों का जमुई गांव में डेरा था। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ खाद्य विभाग के अधिकारी जमुई गांव में पहुंचकर सत्यापन किया।

पहले अधिकारियों ने गांव की बस्तियों में पहुंचकर पड़ताल की। बाद में राशन दुकानों में बैठकर पात्र हितग्राहियों से पूछताछ कर रेकार्ड तैयार किया। प्रशासन और अधिकारियों की टीम ने पात्र हितग्राहियों से राशन आवंटन को लेकर कथन दर्ज करते हुए हस्ताक्षर भी कराए हैं। सीएम की सख्ती के बाद कमिश्नर राजीव शर्मा और कलेक्टर डॉ सतेन्द्र कुमार सिंह ने भी अधिकारियों से सत्यापन कराते हुए मामले की पूरी रिपोर्ट मांगी है। शुक्रवार की शाम तक अधिकारियों की टीम गांव में घूमी रही।

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हालांकि शुक्रवार को आधे गांव की ही सर्वे हो सका है। इस दौरान एसडीएम सोहागपुर आइएएस शेर सिंह मीणा, खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी कमलेश टांडेकर, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सनद शुक्ला, सचिव अशोक कुमार दुबे, पटवारी मयंक पटेल मौजूद रहे।

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130 घरों में पहुंची टीम, आज फिर होगी सत्यापन
खाद्य अधिकारी और टीम ने जमुई में शाम तक 130 घरों में जाकर राशन उपभोक्ताओं से राशन वितरण को लेकर पड़ताल की है। बताया गया कि जमुई गांव में 358 राशन कार्ड धारी है। इस दौरान अधिकारियों की टीम ने मुफ्त राशन मिला है या नहीं और कितने माह का राशन मिला है। इसकी जानकारी जुटाई है। इसके अलावा हमेशा राशन वितरण की स्थिति को भी लेकर रिपोर्ट तैयार की है। अधिकारियों की टीम ने शाम तक 130 घरों में जाकर राशन उपभोक्ताओं से बात करके रिपोर्ट तैयार की है। बताया गया कि बाकी घरों में अगले दिन भी जाकर सत्यापन किया जाएगा।

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मजदूरी करते हैं लेकिन कार्ड नहीं बना
पूछताछ में यह भी सामने आया कि कई परिवार पात्र हैं लेकिन राशन कार्ड नहीं बना है। इसमें परिवार के कुछ का नाम राशन कार्ड में है तो कुछ का नाम राशन कार्ड में नहीं चढ़ा है। गांव के रामदेव लोधी ने बताया कि पत्नी का तथा एक बेटी का नाम राशन कार्ड में है लेकिन तीन बच्चों का नाम राशन कार्ड में नहीं है। राशन कार्ड में नाम चढ़वाने के लिए सभी प्रक्रिया पूरी कर लिया है। सचिव के यहां कई बार गए लेकिन हर बार कुछ न कुछ कहकर लौटा देते हैं। इस तरह आठ वर्ष बीत गए लेकिन राशन कार्ड नहीं बना है।

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ग्रामीण रामदेव ने बताया कि पूर्व सचिव ने राशन कार्ड में नाम जुड़वाने के लिए पैसा भी ले लिया लेकिन राशन कार्ड नहीं बना है। इसी तरह बाबूलाल बैगा ने बताया कि घर में चार लोग हैं लेकिन अभी तक किसी का राशन कार्ड नहीं बना है। लोगों ने कहा कि वे सचिव के पास जाते हैं तो कोई न कोई बहाना बनाकर वापस लौटा दिया जाता है।

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गड़बड़ी होती रही, नहीं की मॉनिटरिंग, अब गांव-गांव सर्वे
खाद्य विभाग शुरू से ही खाद्यान्न गड़बड़ी को लेकर सुर्खियों में रहा है। पहले हाल ही में हुई गेहूं की खरीदी में तीन हजार से कम किसानों से खरीदी करते हुए लक्ष्य से ज्यादा खरीदी कर ली गई थी। जांच कर किसानों से खरीदी के बाद 10 हजार क्विंटल से ज्यादा गेहूं को रिजेक्ट भी कर दिया था। इसके अलावा बाहरी जिलों के वारदाने में शहडोल की समिति में गेहूं उतारा जा रहा था। अधिकारियों ने पंचनामा भी बनाया था लेकिन राजनीतिक संरक्षण और अधिकारियों की मिलीभगत के चलते मामले को दबा दिया गया था।

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ऐसा ही उमरिया में कमिश्नर-कलेक्टर की कार्रवाई में बड़ा हेरफेर उजागर होने के बाद अब शहडोल के अधिकारियों की कार्यप्रणाली और गेहूं खरीदी को लेकर सवाल उठ रहे थे। ठेंगरहा समिति में दूसरे जिलों के वारदाने में गेहूं खपाया जा रहा था। राशन दुकानों का अनाज हेरफेर कर खपाने की आशंका थी। दुकानों में राशन ऑफलाइन भी दिया गया तो कई जगहों में पांच माह की जगह सिर्फ चार माह का राशन दिया गया। एक माह का राशन गोल कर दिया लेकिन विभाग ने मॉनिटरिंग नहीं की।

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